Will vs Nomination Legal Difference: अक्सर लोग अपने बैंक खाते, एफडी, इंश्योरेंस या अचल संपत्ति में किसी करीबी को 'नॉमिनी' बनाकर यह मान लेते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद वही व्यक्ति उस पूरी जायदाद का असली मालिक बन जाएगा। लेकिन जब संपत्ति के बंटवारे और कानूनी अधिकारों की बात आती है, तो स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। भारतीय कानून के तहत नॉमिनेशन और वसीयत दोनों दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं।
जब भी इन दोनों के बीच कोई विवाद खड़ा होता है, तो कानून की नजर में वसीयत को नॉमिनी से कहीं ज्यादा मजबूत और अंतिम माना जाता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि संपत्ति के बंटवारे में वसीयत और नॉमिनेशन में से कौन सबसे ज्यादा मजबूत होता है।
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नॉमिनी सिर्फ एक ट्रस्टी या संरक्षक होता है
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नॉमिनी सिर्फ एक ट्रस्टी या संरक्षक होता है
- कानून के अनुसार, नॉमिनी संपत्ति या पैसों का अंतिम मालिक नहीं होता है। अगर किसी बैंक खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट के पैसे का जिक्र एक रजिस्टर्ड वसीयत में किसी अन्य व्यक्ति के नाम किया गया है, तो कानून की नजर में अंतिम मान्यता वसीयत को ही दी जाएगी।
- नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या संरक्षक के रूप में काम करता है। उसका मुख्य काम खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक या संस्था से पैसे और संपत्ति हासिल करके उसे असली कानूनी वारिसों तक सुरक्षित पहुंचाना होता है।
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कानूनी रूप से सबसे ज्यादा मजबूत दस्तावेज है वसीयत
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कानूनी रूप से सबसे ज्यादा मजबूत दस्तावेज है वसीयत
- जब बात संपत्ति के मालिकाना हक की आती है, तो वसीयत को सबसे मजबूत और अंतिम दस्तावेज माना जाता है।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति ने अपनी जिंदगी में वैध वसीयत लिखी है, तो नॉमिनेशन दरकिनार हो जाता है और संपत्ति वसीयत के हिसाब से ही बांटी जाती है।
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अगर वसीयत न हो तो लागू होता है उत्तराधिकार कानून
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अगर वसीयत न हो तो लागू होता है उत्तराधिकार कानून
- अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत बनाए हो जाती है, तो भी नॉमिनी को पूरी संपत्ति नहीं मिलती।
- ऐसी स्थिति में देश का पर्सनल लॉ या उत्तराधिकार कानून लागू होता है और संपत्ति मृतक के सभी कानूनी वारिसों (जैसे पति, पत्नी, बच्चों) में बराबर-बराबर बांटी जाती है।
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भविष्य के विवादों से बचने के लिए क्या करें?
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भविष्य के विवादों से बचने के लिए क्या करें?
- अपने परिवार को भविष्य की कानूनी लड़ाइयों से बचाने के लिए सभी वित्तीय खातों में नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज रखें।
- इसके साथ ही, एक स्पष्ट और पंजीकृत वसीयत बनवाएं, ताकि आपकी मृत्यु के बाद आपकी इच्छा के अनुसार ही संपत्ति का सही बंटवारा हो सके।