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अलवर: नौकरी के नाम पर सात लाख की ठगी, रिटायर्ड पुलिसकर्मी के बेटे-बहू पर तीसरा मामला दर्ज
Fri, 02 Oct 2026 06:22 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Fri, 02 Oct 2026 06:22 PM IST
अलवर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सात लाख रुपये लेने का एक और मामला सामने आया है। पीड़ित मजदूर ने रिटायर्ड पुलिसकर्मी के बेटे और बहू पर बेटे को दिल्ली पुलिस में सिपाही बनवाने का झांसा देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने दंपती के खिलाफ तीसरा मामला दर्ज किया है।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से रकम ऐंठने वाले सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के बेटे और बहू पर ठगी का तीसरा मामला दर्ज हुआ है। पीड़ितों की शिकायत के आधार पर अलवर के वैशाली नगर थाना पुलिस ने आरोपी दंपती के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
दिल्ली पुलिस में सिपाही बनाने का दिया झांसा
ताजा मामले में खुदनपुरी निवासी एक मजदूर ने आरोपी योगेश पारीक और उसकी पत्नी बिंदिया पारीक पर अपने बेटे को दिल्ली पुलिस में सिपाही बनवाने के नाम पर सात लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। इस नए मामले के सामने आने के बाद आरोपी दंपती पर ठगी की कुल राशि 32 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
टाइल बिछाने के दौरान नौकरी का ऑफर
पीड़ित पूरणमल बैरवा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह मकानों में टाइल लगाने का काम करता है। जनवरी 2023 में वह सिकंदरा निवासी मिस्त्री रामोतार के साथ आरोपी के सूर्यनगर स्थित मकान पर काम कर रहा था। इसके बाद मार्च 2023 में उसने आरोपी दंपती के शालीमार स्थित दूसरे मकान में 15 दिन काम किया। इसी दौरान दंपती ने उसे बेटे की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
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पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसके बेटे को दिल्ली पुलिस में सिपाही बनवाने के बदले सात लाख रुपये मांगे। उसने मार्च 2023 में एक लाख रुपये दे दिए। इसके करीब एक सप्ताह बाद आरोपी उसके घर पहुंचे और अधिकारियों तक रकम पहुंचने की बात कहते हुए बकाया छह लाख रुपये देने के लिए कहा।
कर्ज लेकर जुटाई रकम, ऑनलाइन भी किया भुगतान
शिकायत के अनुसार, बकाया रकम जुटाने के लिए पीड़ित ने फाइनेंस कंपनियों से ऋण लिया। राशि खाते में आने के बाद उसने 1.85 लाख रुपये ऑनलाइन और 65 हजार रुपये चेक के जरिए दिए। बाकी 3.50 लाख रुपये उसने अपनी पत्नी के पीहर से जुटाए। परीक्षा से ठीक पहले आरोपी उसके घर पहुंचे और 3.50 लाख रुपये नकद ले गए।
जयपुर ले जाकर दिलाई परीक्षा
पीड़ित ने बताया कि 24 नवंबर 2023 को आरोपी उसके बेटे राहुल को परीक्षा दिलाने जयपुर ले गए। वहां महिला आरोपी ने केवल आता हुआ पेपर हल करने और बाकी प्रश्न खुद देखने का आश्वासन दिया। हालांकि परीक्षा परिणाम जारी होने पर राहुल का चयन नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई कथित ठगी का पता चला और उसने आरोपियों से रकम वापस मांगनी शुरू की।
रकम मांगने पर मारपीट और धमकी का आरोप
नौकरी नहीं लगने के बाद जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने कथित तौर पर टालमटोल शुरू कर दी। शिकायत के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को पीड़ित आरोपी के शालीमार स्थित मकान पर गया। आरोप है कि वहां आरोपियों ने उसका मोबाइल छीन लिया और उसके साथ मारपीट की।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस दौरान आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसे और उसकी पत्नी को अपमानित किया। महिला आरोपी ने अपने ससुर के थानेदार होने की बात कहकर पुलिस में बंद कराने की धमकी देने का भी आरोप है। इसके बाद दोनों को वहां से भगा दिया गया।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं दो मामले
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आठ मई को वैशाली नगर और 16 जून को कोतवाली थाने में भी मामले दर्ज हैं। कोतवाली थाने में दर्ज मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय, अलवर से आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब तीसरे मामले में पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
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दिल्ली पुलिस में सिपाही बनाने का दिया झांसा
ताजा मामले में खुदनपुरी निवासी एक मजदूर ने आरोपी योगेश पारीक और उसकी पत्नी बिंदिया पारीक पर अपने बेटे को दिल्ली पुलिस में सिपाही बनवाने के नाम पर सात लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। इस नए मामले के सामने आने के बाद आरोपी दंपती पर ठगी की कुल राशि 32 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
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टाइल बिछाने के दौरान नौकरी का ऑफर
पीड़ित पूरणमल बैरवा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह मकानों में टाइल लगाने का काम करता है। जनवरी 2023 में वह सिकंदरा निवासी मिस्त्री रामोतार के साथ आरोपी के सूर्यनगर स्थित मकान पर काम कर रहा था। इसके बाद मार्च 2023 में उसने आरोपी दंपती के शालीमार स्थित दूसरे मकान में 15 दिन काम किया। इसी दौरान दंपती ने उसे बेटे की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
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पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसके बेटे को दिल्ली पुलिस में सिपाही बनवाने के बदले सात लाख रुपये मांगे। उसने मार्च 2023 में एक लाख रुपये दे दिए। इसके करीब एक सप्ताह बाद आरोपी उसके घर पहुंचे और अधिकारियों तक रकम पहुंचने की बात कहते हुए बकाया छह लाख रुपये देने के लिए कहा।
कर्ज लेकर जुटाई रकम, ऑनलाइन भी किया भुगतान
शिकायत के अनुसार, बकाया रकम जुटाने के लिए पीड़ित ने फाइनेंस कंपनियों से ऋण लिया। राशि खाते में आने के बाद उसने 1.85 लाख रुपये ऑनलाइन और 65 हजार रुपये चेक के जरिए दिए। बाकी 3.50 लाख रुपये उसने अपनी पत्नी के पीहर से जुटाए। परीक्षा से ठीक पहले आरोपी उसके घर पहुंचे और 3.50 लाख रुपये नकद ले गए।
जयपुर ले जाकर दिलाई परीक्षा
पीड़ित ने बताया कि 24 नवंबर 2023 को आरोपी उसके बेटे राहुल को परीक्षा दिलाने जयपुर ले गए। वहां महिला आरोपी ने केवल आता हुआ पेपर हल करने और बाकी प्रश्न खुद देखने का आश्वासन दिया। हालांकि परीक्षा परिणाम जारी होने पर राहुल का चयन नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई कथित ठगी का पता चला और उसने आरोपियों से रकम वापस मांगनी शुरू की।
रकम मांगने पर मारपीट और धमकी का आरोप
नौकरी नहीं लगने के बाद जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने कथित तौर पर टालमटोल शुरू कर दी। शिकायत के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को पीड़ित आरोपी के शालीमार स्थित मकान पर गया। आरोप है कि वहां आरोपियों ने उसका मोबाइल छीन लिया और उसके साथ मारपीट की।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस दौरान आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसे और उसकी पत्नी को अपमानित किया। महिला आरोपी ने अपने ससुर के थानेदार होने की बात कहकर पुलिस में बंद कराने की धमकी देने का भी आरोप है। इसके बाद दोनों को वहां से भगा दिया गया।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं दो मामले
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आठ मई को वैशाली नगर और 16 जून को कोतवाली थाने में भी मामले दर्ज हैं। कोतवाली थाने में दर्ज मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय, अलवर से आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब तीसरे मामले में पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।