राजस्थान हाईकोर्ट ने वापस लिया ‘टार्गेटेड केस डिस्पोजल’ आदेश; वकीलों के आंदोलन को बड़ी सफलता
राजस्थान हाईकोर्ट ने वकीलों के विरोध के बीच 11 अगस्त का टार्गेटेड केस डिस्पोजल आदेश वापस ले लिया। प्रदेशभर के एक दर्जन से अधिक जिलों में अधिवक्ता आंदोलनरत थे।
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राजस्थान हाईकोर्ट में मामलों के लक्षित निस्तारण को लेकर अधिवक्ताओं और हाईकोर्ट प्रशासन के बीच चल रहे विवाद में बुधवार देर शाम बड़ा घटनाक्रम सामने आया। हाईकोर्ट प्रशासन ने 11 अगस्त 2026 को जारी वह आदेश वापस ले लिया है, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए गए थे। आदेश वापस लिए जाने को अधिवक्ताओं के लगातार विरोध और आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस फैसले के बाद वकीलों में संतोष का माहौल है।
टार्गेट तय करने पर जताई थी आपत्ति
हाईकोर्ट प्रशासन के आदेश के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई थी। उनका कहना था कि न्यायिक मामलों के निस्तारण में केवल मामलों की संख्या या तय लक्ष्य को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। न्याय की गुणवत्ता, मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर पर्याप्त विचार करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अधिवक्ताओं ने आशंका जताई थी कि मामलों के निस्तारण का लक्ष्य तय होने से न्यायिक अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बन सकता है। लंबित मामलों की संख्या कम करने के दबाव में जल्दबाजी में फैसले होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
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एक दर्जन से ज्यादा जिलों में वकीलों ने किया था बहिष्कार
आदेश के विरोध में जोधपुर और जयपुर सहित प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाने का ऐलान किया था। वकीलों ने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य के बहिष्कार की घोषणा की थी। जोधपुर हाईकोर्ट की दोनों बार एसोसिएशनों ने भी मामले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन समेत विभिन्न अधिवक्ता संगठनों ने प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
विरोध के बाद प्रशासन ने लिया फैसला
अधिवक्ताओं के लगातार विरोध के बीच हाईकोर्ट प्रशासन ने मामलों के लक्षित निस्तारण से जुड़े निर्देशों पर पुनर्विचार किया। इसके बाद बुधवार शाम 11 अगस्त को जारी आदेश को वापस ले लिया गया। आदेश की वापसी के बाद अधिवक्ताओं में संतोष है। इसे लंबे समय से चल रहे विरोध और आंदोलन के बाद मिली महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।