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लेडी लॉयल का चौंकाने वाला सच: अल्ट्रासाउंड पर फोकस, खून जांच भूलीं गर्भवती; 70% महिलाएं एनीमिया की शिकार!
Tue, 25 Aug 2026 11:55 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:55 AM IST
आगरा के लेडी लॉयल अस्पताल की ओपीडी में आने वाली करीब 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित मिल रही हैं। अस्पताल में रोज करीब 200 गर्भवती महिलाएं पंजीकरण कराती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक खून की कमी से प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है और बच्चे के विकास पर भी असर पड़ सकता है।
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लेडी लायल
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल अस्पताल) से मातृ स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चिंताजनक हालात सामने आए हैं। अस्पताल के ओपीडी आंकड़ों के मुताबिक, यहां प्रतिदिन लगभग 200 गर्भवती महिलाएं पंजीकरण कराती हैं, इनमें औसतन 140 नई और करीब 60 पुरानी मरीज शामिल होती हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि लगभग यहां आने वाले 70 प्रतिशत गर्भवती एनीमिया (खून की कमी) से ग्रसित मिल रही हैं।
लापरवाही बन रही बड़ा संकट
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि इस गंभीर संकट का सबसे बड़ा कारण महिलाओं में जागरूकता की कमी है। बताया कि आमतौर पर गर्भवती महिलाएं केवल अल्ट्रासाउंड कराने पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करती हैं। वह हीमोग्लोबिन (खून की जांच) को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। इसी लापरवाही के चलते उन्हें समय पर यह पता ही नहीं चल पाता कि वे एनीमिया का शिकार हैं, जिससे बाद में स्थिति काफी गंभीर हो जाती है।
मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है स्थिति
उन्होंने बताया कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर प्रसव (डिलीवरी) के दौरान पोस्टपार्टम हैमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए खतरनाक हो सकती है। इसके अलावा, एनीमिया के कारण गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास भी बुरी तरह बाधित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को समय पर खून की जांच कराकर आयरन और पौष्टिक आहार का नियमित सेवन करना चाहिए।
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रखें इन बातों का ख्याल
- अल्ट्रासाउंड के साथ, हीमोग्लोबिन की नियमित जांच कराएं।
- आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, चना, अनार और चुकंदर शामिल करें।
- डॉक्टर की सलाह पर आयरन की गोलियों का नियमित सेवन करें।
- गर्भावस्था के दौरान बाहर के जंक फूड से बचें और घर का बना संतुलित आहार लें।
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लापरवाही बन रही बड़ा संकट
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि इस गंभीर संकट का सबसे बड़ा कारण महिलाओं में जागरूकता की कमी है। बताया कि आमतौर पर गर्भवती महिलाएं केवल अल्ट्रासाउंड कराने पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करती हैं। वह हीमोग्लोबिन (खून की जांच) को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। इसी लापरवाही के चलते उन्हें समय पर यह पता ही नहीं चल पाता कि वे एनीमिया का शिकार हैं, जिससे बाद में स्थिति काफी गंभीर हो जाती है।
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मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है स्थिति
उन्होंने बताया कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर प्रसव (डिलीवरी) के दौरान पोस्टपार्टम हैमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए खतरनाक हो सकती है। इसके अलावा, एनीमिया के कारण गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास भी बुरी तरह बाधित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को समय पर खून की जांच कराकर आयरन और पौष्टिक आहार का नियमित सेवन करना चाहिए।
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रखें इन बातों का ख्याल
- अल्ट्रासाउंड के साथ, हीमोग्लोबिन की नियमित जांच कराएं।
- आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, चना, अनार और चुकंदर शामिल करें।
- डॉक्टर की सलाह पर आयरन की गोलियों का नियमित सेवन करें।
- गर्भावस्था के दौरान बाहर के जंक फूड से बचें और घर का बना संतुलित आहार लें।