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डिजिटल लाइब्रेरी: घंटों में बिक रहा समय, बेरोजगार युवा सबसे बड़े खरीदार; सालाना 15 करोड़ का बाजार

Mon, 19 Oct 2026 10:35 AM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 19 Oct 2026 10:35 AM IST
सार
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आगरा में करीब 200 निजी डिजिटल लाइब्रेरियों में लगभग 20 हजार विद्यार्थी पढ़ाई के लिए सीट किराये पर ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारोबार का सालाना बाजार करीब 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
 

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Agra Digital Libraries Generate Rs 15 Crore Business Amid Safety Concerns
डिजिटल लाइब्रेरी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

समय अनमोल है और शहर में यह घंटों के भाव बिक रहा है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे बेरोजगारों की मजबूरियों को बाजार में खुली डिजिटल लाइब्रेरियां कैश कर रही हैं। यहां लक्ष्य साधना में जुटे युवा एकांत और एकाग्रता की कीमत चुका रहे हैं।
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किराए का कमरा, हाईस्पीड वाई-फाई और फर्नीचर से शुरू होने वाला डिजिटल लाइब्रेरी का यह कारोबार शहर में सालाना 15 करोड़ रुपये के बाजार का रूप ले चुका है। कम लागत और न्यूनतम प्रबंधन वाले इस मॉडल में सीधे 50 प्रतिशत तक का मुनाफा है जिसके चलते हर इलाके में डिजिटल लाइब्रेरियां खुल रहीं हैं। भारी मुनाफे की इस अंधी दौड़ में छात्रों की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
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रियल एस्टेट और सीट मैनेजमेंट के इस व्यावसायिक मॉडल पर शहर के नगला पदी, भगवान टॉकीज, खंदारी, रामबाग, कारगिल चौराहा, सिकंदरा, सदर और फतेहाबाद रोड सहित विभिन्न इलाकों में करीब 200 निजी लाइब्रेरियां संचालित हैं। मुनाफे को अधिकतम करने के लिए छह-छह घंटे का शिफ्ट सिस्टम लागू है।
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लाइब्रेरी संचालक आकाश कुमार ने बताया कि दो शिफ्ट में एक लाइब्रेरी में औसतन 100 बच्चे आते हैं और शहर के करीब 20,000 छात्र इस सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। छह घंटे के लिए 600 और 12 घंटे के लिए 900 रुपये प्रतिमाह तक शुल्क वसूला जा रहा है।
यदि हम न्यूनतम औसत भी लें तो इतने छात्रों से प्रतिमाह करीब सवा करोड़ रुपये और सालाना 15 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा हो रहा है। कोचिंग सेंटर्स के समानांतर आगरा में यह एक नया सर्विस सेक्टर बन गया है।


50 फीसदी का मुनाफा
एक औसत लाइब्रेरी में 50 सीटों पर दो शिफ्टों में 100 बच्चों से औसतन 500-600 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से 50,000 से 60,000 रुपये महीने इकट्ठा होता है। लॉकर व अन्य सुविधाओं के लिए अलग से भुगतान करना होता है। एक हॉलनुमा कमरे का किराया 10-12 हजार रुपये, बिजली-एसी का बिल 8-10 हजार रुपये और वाई-फाई व पानी 2,000 रुपये। कुल मासिक खर्च करीब 25 हजार रुपये बैठता है। सारे खर्च निकालकर भी संचालक को 25 से 30 हजार रुपये यानी 50 प्रतिशत का सीधा मुनाफा हो रहा है।


सुविधाओं का मायाजाल और सुरक्षा मानक दरकिनार
अमर उजाला टीम की पड़ताल में सामने आया कि न्यू आगरा क्षेत्र में दयालबाग मोड़ स्थित एक ही बिल्डिंग में तीन-तीन लाइब्रेरियां संचालित हैं। हॉल में प्लाईवुड के छोटे-छोटे केबिन बनाकर छात्रों को बैठाया जा रहा है। कारोबार के लिहाज से यह मॉडल भले ही हिट हो लेकिन सैकड़ों छात्रों की आवाजाही के इन केंद्रों में सुरक्षा शून्य है। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक लगातार 17 घंटे चलने वाले इन बंद और वातानुकूलित कमरों में न तो आपातकालीन निकासी स्थान है और न ही अग्निशमन के कोई इंतजाम। ऐसे में किसी भी शॉर्ट सर्किट या अग्निकांड की स्थिति में मुनाफे का यह मॉडल छात्रों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

 
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