फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Two accused acquitted after victim retracts her statement

गवाही में बिखर गई अभियोजन की कहानी: कोर्ट में बयान से मुकर गई पीड़िता, सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपी दोषमुक्त

Wed, 04 Nov 2026 10:30 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Wed, 04 Nov 2026 10:30 AM IST
सार
Register For Event

पीड़िता ने अदालत में गवाही के दौरान कहा कि अंधेरा होने के कारण वह आरोपियों को देख नहीं पाई थी। राजकुमार और धर्मेंद्र मौके पर नहीं थे। दोनों ने उसके साथ न तो छेड़छाड़ की और न ही दुष्कर्म किया।

विज्ञापन
Two accused acquitted after victim retracts her statement
कोर्ट सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ और जातिसूचक गाली देने जैसे गंभीर आरोपों में करीब आठ साल तक मुकदमे का सामना करने वाले दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट एडीजे-30 कुंदन किशोर सिंह ने दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब जिस पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, उसी ने अदालत में दोनों को घटना के समय मौके पर मौजूद होने से इन्कार कर दिया। उसने यहां तक कहा कि आरोपियों ने उससे छेड़छाड़ और दुष्कर्म नहीं किया है। अभियोजन के तीन अन्य गवाहों ने भी घटना का समर्थन नहीं किया।
विज्ञापन


थाना फतेहाबाद में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, किशोरी के पिता ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 8 अक्तूबर, 2018 की रात करीब 8 बजे उनकी बेटी खेत में शौच के लिए गई थी। वहां राजकुमार और धर्मेंद्र ने उसके साथ छेड़छाड़ की, कपड़े फाड़े और सामूहिक दुष्कर्म किया। शोर सुनकर गांव के लोग पहुंचे तो दोनों भाग गए। जातिसूचक गालियां देने का आरोप भी लगाया था।
विज्ञापन


मुकदमे का सबसे महत्वपूर्ण पीड़िता की गवाही रही। मजिस्ट्रेट के सामने 26 अक्तूबर, 2018 को दिए बयान में उसने दो युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था लेकिन अदालत में गवाही के दौरान उसने कहा कि अंधेरा होने के कारण वह आरोपियों को देख नहीं पाई थी। राजकुमार और धर्मेंद्र मौके पर नहीं थे। दोनों ने उसके साथ न तो छेड़छाड़ की और न ही दुष्कर्म किया। उसने यह भी कहा कि उसने अपने पिता और परिवार को आरोपियों के खिलाफ ऐसी कोई बात नहीं बताई थी। गांव के लोगों ने आरोपियों के नाम उसके चाचा को बताए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


तीन गवाह भी नहीं कर सके आरोपों की पुष्टि
अभियोजन ने प्रेम सिंह, रामकिशोर और दिलीप सिंह उर्फ बंटू को घटना का चश्मदीद बताया था। तीनों ने अदालत में घटना देखने से इन्कार कर दिया। अभियोजन ने इन तीनों को पक्षद्रोही घोषित कर जिरह भी की, लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं करा सका। पीड़िता के पिता ने भी जिरह में स्वीकार किया कि आरोपियों ने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म नहीं किया था। उसने भीड़ के बताए जाने पर आरोपियों के नाम रिपोर्ट में लिखवाई थी।


मेडिकल में उम्र 18 साल, फॉरेंसिक साक्ष्य भी निर्णायक नहीं
अदालत ने पीड़िता की उम्र के साक्ष्य पर भी विचार किया। स्कूल का प्रमाणित रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र पेश नहीं किया गया था। मुख्य चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट में एक्सरे और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 18 वर्ष निर्धारित की गई। इस आधार पर अदालत ने उसे घटना के समय बालिग माना। लिहाजा पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी साबित नहीं हुईं। अदालत ने यह भी पाया कि इन साक्ष्यों से आरोपियों की संलिप्तता साबित नहीं होती। डीएनए मिलान से आरोपियों को घटना से जोड़ने वाला प्रमाण भी पेश नहीं किया गया।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed