अजब प्रेम: प्रेमिका ने कोर्ट में फर्जी कागज पेश कर दिला दी लूट के आरोपी प्रेमी को जमानत, रिपोर्ट हुई दर्ज
खास बात यह कि ओम प्रकाश कभी कोर्ट गए ही नहीं। जब उनको भनक लगी कि उनके नाम पर इस मामले में कोर्ट में कुछ चल रहा है, तो उनके होश उड़ गए। शिकायत पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपी और उसकी प्रेमिका के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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अलीगढ़ के गांधी पार्क थाना क्षेत्र में एक महिला ने कोर्ट में फर्जी कागज पेश कर लूट के आरोपी अपने प्रेमी को जमानत दिला दी। प्रेमिका ने धोखाधड़ी कर एक ग्रामीण का आधार कार्ड और फोटो इस्तेमाल किया। खुलासा होने पर पीड़ित ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सात मार्च को थाना सासनी गेट क्षेत्र में भूपेंद्र पाल सिंह की मोबाइल की दुकान पर तमंचे के बल पर 2.24 लाख रुपये की लूट हुई थी। पुलिस ने आरोपी धर्मेंद्र उर्फ बंटी निवासी पला चौक साहिबाबाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। धर्मेंद्र के मुकदमों की पैरवी उसकी महिला दोस्त पंकज देवी कर रही थी। प्रेमी को बाहर निकालने के लिए पंकज देवी ने थाना गांधी पार्क क्षेत्र के गांव भदेसी निवासी ओम प्रकाश का आधार कार्ड और फोटो हासिल कर लिया।
महिला ने उस आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कोर्ट में ओम प्रकाश के फर्जी कागजात और हस्ताक्षर तैयार करवा लिए। खास बात यह कि ओम प्रकाश कभी कोर्ट गए ही नहीं। जब उनको भनक लगी कि उनके नाम पर इस मामले में कोर्ट में कुछ चल रहा है, तो उनके होश उड़ गए। शिकायत पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपी धर्मेंद्र उर्फ बंटी और उसकी प्रेमिका पंकज देवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है। जांच की जा रही है कि आखिर पंकज देवी को ओम प्रकाश का आधार कार्ड और फोटो कहां से मिला। इस खेल में और कौन-कौन शामिल था।-धनंजय कुमार, सीओ द्वितीय
आरोपियों के हाथ लगी फोटो कॉपी और फोटो
पीड़ित ओम प्रकाश पक्ष के मुताबिक एक बार सिम कार्ड लेने के सिलसिले में उन्होंने अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी कराई। साथ ही कुछ फोटो भी खिंचवाए थे। यहीं से उनका आधार कार्ड और फोटो आदि आरोपियों के हाथ लग गए, जिसका इस्तेमाल फर्जी तरीके से जमानत लेने में किया गया।
सत्यापन प्रक्रिया सवालों के घेरे में
इस केस में जमानत लेने वालों की और उनके दस्तावेज की सत्यापन प्रक्रिया पर विधि के जानकार सवाल उठा रहे हैं। एडवोकेट देवेश गौतम कहते हैं कि किसी भी मामले में जमानत लेने के लिए पहले जमानतदार का आधार कार्ड, फोटो आदि से दस्तावेज तैयार होते हैं। कोर्ट उसको थाने के पैरोकार पर भेजती है। थाने का पैरोकार संबंधित गांव का प्रधान या शहर में सभासद से पत्र पर उसका सत्यापन लेकर कोर्ट को वापस भेजता है। इसके बाद भौतिक रूप से भी जमानतदार को हाजिर होना पड़ता है। इसी के साथ अचल संपत्ति आदि के भी दस्तावेज लगते हैं, जिसका सत्यापन तहसील स्तर से होता है। इस मामले में यह सभी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है और जांच का विषय है।