बरेली: पीपीपी मॉडल पर संचालित होगा 300 बेड अस्पताल, मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद
बरेली का 300 बेड अस्पताल पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस कदम से जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।
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बरेली का 300 बेड अस्पताल अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होगा। इससे जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम होगा। अस्पताल में भर्ती , आपातकालीन उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हो सकेगा। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि शासन से आदेश मिलते ही स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं कराई जाएंगी।
वर्ष 2018 में जब 300 बेड अस्पताल का निर्माण पूरा हुआ तो मंडल भर के मरीजों में आस जगी कि अब बेहतर इलाज के लिए दिल्ली और लखनऊ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, लेकिन ये आस बीते करीब 8 वर्ष से अभी भी बाकी है। शासन से लेकर प्रशासन तक जिम्मेदारों ने अस्पताल के संचालन के दावे तो किए लेकिन धरातल पर ये दावे दम तोड़ गए। हालांकि अब कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद इस अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालन होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कोविड काल में बना कोविड अस्पताल
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिला व महिला अस्पताल के अलावा मरीजों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए शासन ने 300 बेड के लिए दिल खोलकर धनराशि खर्च की। मार्च 2013 से इस अस्पताल को बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। करीब 10 साल बाद कोविड काल में इसे कोविड अस्पताल बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने यहां औपचारिक ओपीडी संचालन कराने का आदेश दिया।
शासन ने करीब 8.33 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को भेजे। इस पैसे से डीप फ्रीजर, स्ट्रेचर, मरीजों के बेड अलमारी, ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर, बाइपैप, आईसीयू बेड समेत तमाम उपकरणों की खरीद की गई। इन सभी उपकरणों को फिलहाल अस्पताल के स्टोर रूम में डंप कर दिया गया है। लेकिन आईपीडी कब शुरू होगी, इस सवाल का जबाव किसी के पास नहीं है।
इन पदों पर होनी है भर्ती, फिर मिलेगी सुविधा
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि यहां पर तीन फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक चर्म रोग विशेषज्ञ, एक पैथोलॉजिस्ट, एक रेडियोलॉजिस्ट, पैरामेडिकल स्टाफ में दो लिपिक, 10 स्टाफ नर्स, छह फार्मासिस्ट, चार लैब टेक्नीशियन, दो एलए, दो एक्सरे टेक्नीशियन, एक डीआरए, 15 वार्ड ब्वाय, 10 वार्ड आया, 15 सुरक्षा गार्ड चौकीदार, दो ईसीजी टेक्नीशियन की भर्ती होनी है। इसके अलावा दो वाहन चालक, दो रिकार्ड कीपर, दो प्लंबर, दो इलेक्ट्रिशियन, दो रिसेप्सनिस्ट, आठ लिफ्ट ऑपरेटर, दो जनरेटर ऑपरेटर की जरूरत है।
जर्जर भवन से मिलेगी मुक्ति, सीएमओ कार्यालय का हो रहा निर्माण
अस्पताल के संचालन के बाद सिर्फ मरीजों के लिए ही ये अस्पताल किसी संजीवनी से कम नहीं होगा। बल्कि वर्षों से जिला अस्पताल परिसर में संचालित सीएमओ कार्यालय को यहां शिफ्ट करने की कवायद जारी कर दी गई है। अस्पताल परिसर में सीएमओ कार्यालय के नये भवन का निर्माण भी जारी है। कार्यालय शिफ्ट होने के बाद मरीजों को यहां किस प्रकार बेहतर इलाज और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। इसकी निगरानी भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।