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बरेली बवाल का एक साल: वर्ष 2006 में मिली थी 'भविष्य में जलने' की चेतावनी, 19 साल सोती रही पुलिस

Sat, 26 Sep 2026 10:55 AM IST
Mukesh Kumar शशांक मिश्र, अमर उजाला बरेली
शशांक मिश्र, अमर उजाला बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 26 Sep 2026 10:55 AM IST
सार
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बरेली के तत्कालीन एसपी सिटी ने दो दशक पहले ही आईएमसी और मौलाना तौकीर रजा पर नियंत्रण नहीं लगाने पर बवाल की आशंका जताई थी। उन्होंने अमर उजाला में 16 जुलाई 2006 में प्रकाशित खबर का हवाला देकर गोपनीय रिपोर्ट भी भेजी थी। लेकिन पुलिस ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए। नतीजा 26 सितंबर 2025 को शहर में बवाल हुआ। 

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One year since the Bareilly unrest A warning of 'future conflagration' was received in 2006
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में बीते साल 26 सितंबर को हुए बवाल को पूरा एक साल बीत गया है। मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान सलाखों के पीछे है। शहर कानून-व्यवस्था की बहाली का दम भर रहा है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बवाल अचानक हुआ था? या फिर यह पुलिस-प्रशासन की दो दशकों की उस अनदेखी और लापरवाही का नतीजा है, जिसने छोटी सी चूक को बड़े बवाल का रूप दे दिया।

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अमर उजाला के पास मौजूद 13 अक्तूबर 2006 के अति-गोपनीय दस्तावेज (पत्र सं. एसटी-सीआर 12/06) पुलिस की सुस्ती की पोल खोलते हैं। 19 साल पहले चेतावनी मिलने के बावजूद पुलिस-प्रशासन ने आंखें मूंद ली थीं। नतीजा बवाल के रूप में सामने आया। 
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वर्ष 2006 में तैयार की थी रिपोर्ट 
वर्ष 2025 में शहर में हुए बवाल के बाद मुख्य आरोपी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान और सचिव डॉ. नफीस अभी भी जेल में हैं। इन दोनों आरोपियों पर कार्रवाई के लिए वर्ष 2006 में ही पुलिस ने रिपोर्ट तैयार की थी, मगर वह फाइल से बाहर नहीं निकल पाई।
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दरअसल, 19 वर्ष पहले जुलाई 2006 में आईएमसी प्रमुख ने बयान दिया था कि इंसाफ मिलता रहे तो कोई बम नहीं रखेगा और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना देशद्रोह नहीं। इस बयान की शिकायत के बाद पुलिस ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार की।

तत्कालीन एसपी सिटी ने की थी जांच 
तत्कालीन एसपी सिटी राम बहादुर ने अपनी जांच रिपोर्ट में अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए लिखा था कि तौकीर रजा खां व डॉ. नफीस सांप्रदायिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। यदि इस संगठन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो भविष्य में बरेली को गंभीर सांप्रदायिक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। दो दशक पहले ही पुलिस को मालूम था कि शहर किस मुहाने पर खड़ा है। 

आज घटना के एक साल बाद भले ही तौकीर रजा जेल में हों और प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन सच यही है कि अगर 2006 की उस पुलिस रिपोर्ट पर समय रहते सख्त कदम उठाए गए होते तो बरेली को पिछले साल का वह खौफनाक दिन न देखना पड़ता। 

अब जागे, कोर्ट तक पहुंचाएंगे पुराने दस्तावेज
दूसरी ओर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य का दावा है कि वर्ष 2025 में हुए बवाल के आरोपियों पर की गई कार्रवाई पुलिस की सक्रियता से संभव हुई। साजिश बड़ी थी, मगर समय रहते पुलिस ने उसको पहचान की और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई भी की। आरोपियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई में पुरानी फाइलों को भी सबूत के तौर पर न्यायालय तक पहुंचाया जाएगा।

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