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Fake IAS Case: विप्रा शर्मा का खास गुर्गा है विश्वविद्यालय का लिपिक, ठगी में दिया साथ, एक और रिपोर्ट दर्ज

Thu, 20 Aug 2026 11:28 AM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 20 Aug 2026 11:28 AM IST
सार
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बरेली में खुद को आईएएस बताकर लोगों से ठगी करने वाली विप्रा शर्मा और उसके सहयोगी देवप्रकाश के खिलाफ एक और रिपोर्ट की गई है। देवप्रकाश विश्वविद्यालय में क्लर्क है। उसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। 

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university clerk is a key associate of fake ias Vipra Sharma he abetted the fraud in Bareilly
आरोपी विप्रा शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में रुहेलखंड विश्वविद्यालय का क्लर्क फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा का खास गुर्गा निकला। वह छात्रों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर विप्रा के जरिये ठगी करता था। उसके खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। शाहजहांपुर निवासी पुष्पेंद्र ने दर्ज कराई रिपोर्ट में जिक्र किया है कि उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध पुवायां स्थित महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर का कोर्स किया था। इसी दौरान रुहेलखंड विश्वविद्यालय में लिपिक के पद पर तैनात देवप्रकाश से जान पहचान हो गई। 

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देवप्रकाश ने बताया कि उसका संपर्क आईएएस अधिकारी डॉ. विप्रा शर्मा से है। वह रुपये लेकर सरकारी नौकरी लगवा देंगी। अगर नौकरी नहीं लगी तो रुपये वापस करा दिए जाएंगे। देवप्रकाश के साथ पुष्पेंद्र ग्रीन पार्क स्थित विप्रा के घर गए। इसके बाद इन लोगों ने राजस्व विभाग में नौकरी लगवाने का झांसा देकर सात लाख रुपये झटक लिए। बाद में पता चला कि क्लर्क देवप्रकाश और विप्रा अपने गिरोह के साथ मिलकर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते हैं। देवप्रकाश ने कई और लोगों को यह बताकर शिकार बनाया था कि विप्रा ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की है।
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देवप्रकाश पर पहले भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। अब दोबारा उसके खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। बताते हैं कि देवप्रकाश का नाम लगातार सामने आने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है। उसे विवि के कृषि -संकाय में जरूर भेज दिया गया है। 

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विप्रा ने फर्जी नियुक्ति पत्र थमाए
संजय नगर के अरविंद कुमार ने भी विप्रा के खिलाफ बारादरी थाने में एक रिपोर्ट कराई है। बताया है कि विप्रा से उनकी मुलाकात कपड़े की दुकान पर हुई थी। अरविंद दुकान पर काम करते थे। विप्रा ने अरविंद को कॉल कर गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित घर बुलाया। वहां सरकारी नौकरी लगवाने के बदले चार लाख रुपये लिए। इसके बाद फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। अरविंद जब शाहजहांपुर में नियुक्ति स्थान पर गए तो फर्जीवाड़े का पता चला। बारादरी थाने में अरविंद की तरफ से रिपोर्ट दर्ज की गई है।

तीन दर्जन हो गई मुकदमों की संख्या
फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। कुल मुकदमों की संख्या करीब 36 हो चुकी है जिनमें सर्वाधिक बारादरी थाने में हैं। अधिकांश मामलों में विप्रा के साथ उसके पिता, बहनोई व गुर्गे नामजद हैं। विप्रा और उसकी दो बहनें जेल में हैं लेकिन परिवार के अन्य सदस्य व गुर्गों की गिरफ्तारी पर जोर नहीं दिया जा रहा।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि विप्रा व उसके साथियों के खिलाफ लगातार नई शिकायतें आ रही हैं, जो दर्ज की जा रही हैं। सभी मामलों में चार्जशीट लगाकर कानूनी घेराबंदी की जा रही है। उच्चाधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि गैंगस्टर की धारा लगाकर जब्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी। कोई आरोपी नहीं बचेगा। 

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