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भदोही में कालीन का अनोखा संसार: अमिताभ के तीन पीढ़ियों से क्यूआर कोड तक, 3.5 लाख के कालीन ने खींचा ध्यान
Wed, 07 Oct 2026 05:53 PM IST
Pragati Chand
साजिद अली अंसारी/चंद्रबालक राय/मनोज गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही।
साजिद अली अंसारी/चंद्रबालक राय/मनोज गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही।
Published by: Pragati Chand
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:53 PM IST
इंडिया कारपेट एक्सपो में कालीन का अनोखा संसार देखने को मिल रहा है। 45 किलो ऊन से बने कालीन पर अमिताभ बच्चन के परिवार की तीन पीढ़ियां उकेरीं गईं। वहीं 3.5 लाख के हस्तनिर्मित कालीन ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आइए जानते हैं खासियत
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कालीन एक्सपो में कालीन दिखाते व्यापारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कारपेट एक्सपो मार्ट में चल रहे 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में एक से बढ़कर एक कालीन खरीदारों को लुभा रहे हैं। गोपीगंज के कालीन निर्यातक प्रहलाद दास गुप्त की ओर से बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की तीन पीढि़यों के चित्र वाला कालीन तैयार किया गया है। ये कालीन ईरानी प्रशंसक की मांग पर तैयार किया गया है।
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निर्यातक प्रहलाद दास गुप्त के बेटे ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि बिग बी अमिताभ बच्चन के एक ईरानी प्रशंसक ने उनसे इस तरह के डिजाइन के बारे में चर्चा की थी। इसके बाद इंडो-नेपाली कालीन के 5 गुणा 8 साइज के इस कालीन को दो बुनकरों ने साढ़े चार महीने में तैयार किया। करीब 45 किलो ऊन से बने इस कालीन पर हरिवंश राय बच्चन, अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन की तस्वीर उकेरी गई है। इसकी कीमत 70 हजार रुपये है।
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इस कालीन के चार ऑर्डर अब तक मिल चुके हैं। ये चारों ऑर्डर ईरानी खरीदारों की तरफ से दिए गए हैं। वहीं, कालीन मेले में सिल्क, ऊन के अलावा पेट यार्न की प्रिंटिंग दरी, जूट के उत्पाद भी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। नायाब कारीगरी के साथ बारीक बुनाई और मखमली कालीन पर बनाई गई डिजाइन लोगों को अपनी तरफ खींच रही हैं। निर्यातक भी खरीदारों की उपस्थिति से गदगद हैं।
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कालीन एक्सपो में कालीन दिखाते व्यापारी
- फोटो : अमर उजाला
सिल्क और वूलन मिक्स हस्तनिर्मित कालीन में एक वर्ग मीटर में 100 गांठें, कीमत है 3.5 लाख रुपये
कालीन मेले में खरीदारों को लुभाने के लिए निर्यातक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यही वजह है कि मेले में एक से बढ़कर एक कालीन देखने को मिल रहे हैं। सिल्क और वूलन मिक्स धागों वाला कालीन भी तैयार किया गया है। मॉडर्न डिजाइन वाले इस कालीन को अमेरिकी खरीदार खूब पसंद कर रहे हैं।
भदोही के निर्यातक वैभव बरनवाल ने बताया कि खरीदारों की मांग पर कालीनों में अब नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिसमें वूलन और सिल्क के धागे से कालीन की बुनाई की जा रही है। 9 गुणा 12 साइज का सिल्क और वूलन मिक्स हस्तनिर्मित कालीन तैयार किया गया है। कालीन में एक वर्ग मीटर में 100 गांठें हैं। तीन बुनकरों ने इसे छह महीने में बुना है। सिल्क और वूलन मिक्स इस कालीन की कीमत 3.5 लाख रुपये हैं।
कालीन मेले में खरीदारों को लुभाने के लिए निर्यातक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यही वजह है कि मेले में एक से बढ़कर एक कालीन देखने को मिल रहे हैं। सिल्क और वूलन मिक्स धागों वाला कालीन भी तैयार किया गया है। मॉडर्न डिजाइन वाले इस कालीन को अमेरिकी खरीदार खूब पसंद कर रहे हैं।
भदोही के निर्यातक वैभव बरनवाल ने बताया कि खरीदारों की मांग पर कालीनों में अब नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिसमें वूलन और सिल्क के धागे से कालीन की बुनाई की जा रही है। 9 गुणा 12 साइज का सिल्क और वूलन मिक्स हस्तनिर्मित कालीन तैयार किया गया है। कालीन में एक वर्ग मीटर में 100 गांठें हैं। तीन बुनकरों ने इसे छह महीने में बुना है। सिल्क और वूलन मिक्स इस कालीन की कीमत 3.5 लाख रुपये हैं।
कालीन एक्सपो में कालीन दिखाते व्यापारी
- फोटो : अमर उजाला
प्रकृति से कालीन का जुड़ाव, तकनीक से पहचान... क्यूआर कोड से मिलेगी पूरी जानकारी
समय के साथ-साथ कालीन उद्योग भी बदल रहा है। नई पीढ़ी नए-नए प्रयोग भी कर रही है। कालीन मेले में पहली बार हिस्सा लेने वाले निर्यातक राहुल यादव ने प्रकृति के साथ कालीन को आधुनिकता से भी जोड़ा है। उन्होंने अपने कालीन में क्यूआर कोड भी लगाए हैं। कोड स्कैन करने से खरीदार को पता चल सकेगा कि कालीन कितने दिन में बना है, किसने बुना है, साइज क्या है, क्वालिटी कैसी है, कितने दिनों में तैयार किया गया है।
आईआईटी बीएचयू से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद राहुल यादव अपने पुश्तैनी कारोबार से जुड़ गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में 45 साल से दादा और पिता इस व्यवसाय से जुड़े रहे लेकिन वे स्थानीय स्तर पर व्यापार करते थे लेकिन उन्होंने इस व्यापार को ग्लोबल स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।
समय के साथ-साथ कालीन उद्योग भी बदल रहा है। नई पीढ़ी नए-नए प्रयोग भी कर रही है। कालीन मेले में पहली बार हिस्सा लेने वाले निर्यातक राहुल यादव ने प्रकृति के साथ कालीन को आधुनिकता से भी जोड़ा है। उन्होंने अपने कालीन में क्यूआर कोड भी लगाए हैं। कोड स्कैन करने से खरीदार को पता चल सकेगा कि कालीन कितने दिन में बना है, किसने बुना है, साइज क्या है, क्वालिटी कैसी है, कितने दिनों में तैयार किया गया है।
आईआईटी बीएचयू से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद राहुल यादव अपने पुश्तैनी कारोबार से जुड़ गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में 45 साल से दादा और पिता इस व्यवसाय से जुड़े रहे लेकिन वे स्थानीय स्तर पर व्यापार करते थे लेकिन उन्होंने इस व्यापार को ग्लोबल स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।
राहुल यादव बताते हैं कि वह अपनी कालीन में प्रकृति को प्राथमिकता में रखकर डिजाइन तैयार करते हैं। मिस्टी पाइन डिजाइन वाला कालीन बरबस लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। उन्होंने बताया कि देवदार के पेड़ों के बीच धुंधले कोहरे में उभरते पहाड़ों वाली सुंदर डिजाइन की नौ गुणा 12 की यह कालीन प्योर वूलन है, जिसे दो बुनकरों ने तीन महीने में तैयार किया है। इसकी कीमत 47 हजार रुपये है।
बताया कि उद्योग के साथ वह बुनकरी के हुनर को बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा बार कोड तैयार किया है जिसके माध्यम से संबंधित कालीन की पूरी जानकारी मिल सकती है। वे इसे अपनी कंपनी के कालीनों पर लगा रहे हैं।
बताया कि उद्योग के साथ वह बुनकरी के हुनर को बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा बार कोड तैयार किया है जिसके माध्यम से संबंधित कालीन की पूरी जानकारी मिल सकती है। वे इसे अपनी कंपनी के कालीनों पर लगा रहे हैं।