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Kushinagar News: हाथों में पासबुक, आंखों में उम्मीद हर बार मिल रहा कोरा आश्वासन
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पडरौना। उम्र के आखिरी पड़ाव पर इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सहारा बनी वृद्धावस्था पेंशन करीब छह महीने से बुजुर्गों तक नहीं पहुंची है। हाथ में पासबुक, झोले में कागजात और आंखों में पेंशन की उम्मीद लिए रोजाना 30 से अधिक बुजुर्ग विकास भवन पहुंच रहे हैं। वहां उन्हें हर बार जल्द पेंशन आने का आश्वासन देकर लौटा दिया जा रहा है। जिले के करीब 76 हजार बुजुर्ग मार्च 2026 के बाद से पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। जिले में वृद्धावस्था पेंशन के 1,59,964 लाभार्थी हैं।
वृद्धावस्था पेंशन के तहत बुजुर्गों को साल में तीन बार एक-एक हजार रुपये की किस्त मिलती है। यानी साल में तीन हजार रुपये। यह रकम भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन बुजुर्गों के लिए दवा, इलाज, आने-जाने और अन्य जरूरी खर्चों का बड़ा सहारा है। पेंशन रुकने से ऐसे बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनकी आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। कई बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन से उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बच्चों या दूसरे लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता था। पांच महीने से पेंशन नहीं मिलने के कारण दवा और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए भी परिजनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें अपनों ने छोड़ दिया है और उनकी आजीविका पेंशन के सहारे ही चलती है।
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सेवरही ब्लॉक के जवही नरेंद्र गांव निवासी रामरूप ने बताया कि बड़ी मुश्किल से पेंशन शुरू हुई थी। तीन हजार रुपये से दवा और आने-जाने का खर्च निकल जाता था। अब छह माह से यह सहारा भी नहीं है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी हर बार यही कहते हैं कि पेंशन ऊपर से रुकी है, जल्द आ जाएगी।
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विशुनपुरा ब्लॉक के हीनहा गांव निवासी गोपाल ने बताया कि पत्नी ज्ञांती देवी की पेंशन आती थी। छह माह से बंंद है। विकास भवन आने-जाने में ही 40 रुपये से अधिक किराया लग जाता है। दो महीने से दवा के लिए रुपये नहीं हैं। पेंशन की आस में आया था लेकिन फिर वही आश्वासन मिला।
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कप्तानगंज ब्लॉक के हसनगंज निवासी नंदलाल ने बताया कि महंगाई में बेटों के लिए अपना घर चलाना मुश्किल है। पेंशन से अपनी जरूरतें पूरी कर लेते थे लेकिन अब बड़ी मुश्किल से दिन कट रहे हैं। कार्यालय में बताया गया कि कागजों में कोई कमी नहीं है और अगले महीने पेंशन आने की उम्मीद है।
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-पडरौना ब्लॉक के मटिहनिया के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि इनके भाई आनंद सिंह की पेंशन आती थी। छह माह से पेंशन नहीं आने से परेशानी हो रही है। पहले लगा कि कागजों में कमी होगी। कार्यालय आने पर पता चला कि शासन स्तर से ही पेंशन जारी नहीं हुई है। दवा, कपड़े और दूसरी जरूरतों के लिए बच्चों से रुपये नहीं मांगने पड़ रहे हैंं।
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कोट:::
पिछले सत्र की अंतिम किस्त मार्च में करीब आधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई थी। अभी जिले के 76 हजार पेंशनरों के खाते में पेंशन की धनराशि नहीं आई है। शासन स्तर से अभी पेंशन जारी नहीं हो सकी है। जल्द ही पेंशन की रकम आने की उम्मीद है। -रमाशंकर यादव, समाज कल्याण अधिकारी कुशीनगर
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वृद्धावस्था पेंशन के तहत बुजुर्गों को साल में तीन बार एक-एक हजार रुपये की किस्त मिलती है। यानी साल में तीन हजार रुपये। यह रकम भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन बुजुर्गों के लिए दवा, इलाज, आने-जाने और अन्य जरूरी खर्चों का बड़ा सहारा है। पेंशन रुकने से ऐसे बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनकी आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। कई बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन से उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बच्चों या दूसरे लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता था। पांच महीने से पेंशन नहीं मिलने के कारण दवा और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए भी परिजनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें अपनों ने छोड़ दिया है और उनकी आजीविका पेंशन के सहारे ही चलती है।
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सेवरही ब्लॉक के जवही नरेंद्र गांव निवासी रामरूप ने बताया कि बड़ी मुश्किल से पेंशन शुरू हुई थी। तीन हजार रुपये से दवा और आने-जाने का खर्च निकल जाता था। अब छह माह से यह सहारा भी नहीं है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी हर बार यही कहते हैं कि पेंशन ऊपर से रुकी है, जल्द आ जाएगी।
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विशुनपुरा ब्लॉक के हीनहा गांव निवासी गोपाल ने बताया कि पत्नी ज्ञांती देवी की पेंशन आती थी। छह माह से बंंद है। विकास भवन आने-जाने में ही 40 रुपये से अधिक किराया लग जाता है। दो महीने से दवा के लिए रुपये नहीं हैं। पेंशन की आस में आया था लेकिन फिर वही आश्वासन मिला।
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कप्तानगंज ब्लॉक के हसनगंज निवासी नंदलाल ने बताया कि महंगाई में बेटों के लिए अपना घर चलाना मुश्किल है। पेंशन से अपनी जरूरतें पूरी कर लेते थे लेकिन अब बड़ी मुश्किल से दिन कट रहे हैं। कार्यालय में बताया गया कि कागजों में कोई कमी नहीं है और अगले महीने पेंशन आने की उम्मीद है।
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-पडरौना ब्लॉक के मटिहनिया के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि इनके भाई आनंद सिंह की पेंशन आती थी। छह माह से पेंशन नहीं आने से परेशानी हो रही है। पहले लगा कि कागजों में कमी होगी। कार्यालय आने पर पता चला कि शासन स्तर से ही पेंशन जारी नहीं हुई है। दवा, कपड़े और दूसरी जरूरतों के लिए बच्चों से रुपये नहीं मांगने पड़ रहे हैंं।
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पिछले सत्र की अंतिम किस्त मार्च में करीब आधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई थी। अभी जिले के 76 हजार पेंशनरों के खाते में पेंशन की धनराशि नहीं आई है। शासन स्तर से अभी पेंशन जारी नहीं हो सकी है। जल्द ही पेंशन की रकम आने की उम्मीद है। -रमाशंकर यादव, समाज कल्याण अधिकारी कुशीनगर