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Muzaffarnagar News: मिठास की जरूरत बढ़ते ही चीनी ने बढ़ाई खटास
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किनौनी गाव के खेत में खड़ी गन्ने की फसल : संवाद
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मुजफ्फरनगर। किसानों की मेहनत से समृद्ध गन्ना बेल्ट के कारण जिले की पहचान शुगर बाउल के तौर पर बनी। यहीं पर एशिया की सबसे बड़ी मिल खतौली और नवीन गुड़ मंडी से व्यापारी भी खुशहाल हुए। वर्तमान में मिलों के पास 16.48 लाख क्विंटल का चीनी स्टॉक है लेकिन बढ़ते दाम के साथ लोगों की बेचैनी बढ़ रही है।
तीज के साथ शुरू हुई त्योहारों की श्रृंखला में अब दीवाली तक चीनी की खपत सबसे ज्यादा होगी। ऐसे में शनिवार को भाव 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से चीनी का कटोरा कसैला होने लगा है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या गन्ने का बीज बन रहा है। 0238 में बीमारी के कारण पिछले पेराई सत्र में दो करोड़ क्विंटल गन्ने का उत्पादन कम हुआ। इस बार 87 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हुआ, यह पिछले सत्र के मुकाबले 12 लाख क्विंटल कम है।
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किसानों को अभी 0238 का मनमाफिक विकल्प नहीं मिला है, जिस कारण गन्ने के उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। नए पेराई सत्र में यह समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
असल में इस बार सहारनपुर मंडल में छह हजार हेक्टेयर गन्ना कम हुआ है। जिले के ढाई लाख गन्ना किसान मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली की 12 चीनी मिलों को को गन्ने की आपूर्ति करते हैं।
पेराई सत्र 2025-26 में पौधा और पेड़ी का कुल क्षेत्रफल एक लाख 76 हजार 916 हेक्टेयर था। नए पेराई सत्र के लिए गन्ना विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमों ने सर्वे किया।
इस बार एक लाख 74 हजार 379 हेक्टेयर में ही गन्ना मिला है। खाईखेड़ी क्षेत्र में पेड़ी का रकबा 19 प्रतिशत तक कम हो गया है, जिसका असर नए पेराई सत्र पर पड़ेगा।
nस्टॉक की सीमा चार हजार क्विंटल : जिला खाद्य विपणन अधिकारी पीपी श्रीवास्तव और जिला पूर्ति अधिकारी ओम हरि उपाध्याय ने बताया कि कोई भी चीनी डीलर स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 30 दिन से अधिक अवधि तक उसका भंडारण नहीं कर सकेगा। डीलर के पास चार हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। यह व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी।
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तीज के साथ शुरू हुई त्योहारों की श्रृंखला में अब दीवाली तक चीनी की खपत सबसे ज्यादा होगी। ऐसे में शनिवार को भाव 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से चीनी का कटोरा कसैला होने लगा है।
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किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या गन्ने का बीज बन रहा है। 0238 में बीमारी के कारण पिछले पेराई सत्र में दो करोड़ क्विंटल गन्ने का उत्पादन कम हुआ। इस बार 87 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हुआ, यह पिछले सत्र के मुकाबले 12 लाख क्विंटल कम है।
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किसानों को अभी 0238 का मनमाफिक विकल्प नहीं मिला है, जिस कारण गन्ने के उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। नए पेराई सत्र में यह समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
असल में इस बार सहारनपुर मंडल में छह हजार हेक्टेयर गन्ना कम हुआ है। जिले के ढाई लाख गन्ना किसान मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली की 12 चीनी मिलों को को गन्ने की आपूर्ति करते हैं।
पेराई सत्र 2025-26 में पौधा और पेड़ी का कुल क्षेत्रफल एक लाख 76 हजार 916 हेक्टेयर था। नए पेराई सत्र के लिए गन्ना विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमों ने सर्वे किया।
इस बार एक लाख 74 हजार 379 हेक्टेयर में ही गन्ना मिला है। खाईखेड़ी क्षेत्र में पेड़ी का रकबा 19 प्रतिशत तक कम हो गया है, जिसका असर नए पेराई सत्र पर पड़ेगा।
nस्टॉक की सीमा चार हजार क्विंटल : जिला खाद्य विपणन अधिकारी पीपी श्रीवास्तव और जिला पूर्ति अधिकारी ओम हरि उपाध्याय ने बताया कि कोई भी चीनी डीलर स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 30 दिन से अधिक अवधि तक उसका भंडारण नहीं कर सकेगा। डीलर के पास चार हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। यह व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी।