मुनाफे के खेल में सेहत पर वार: दूध की धार में पानी की भरमार, मुरादाबाद में 29 में 18 नमूने फेल, फैट भी कम
मुरादाबाद में दूध में बड़े पैमाने पर पानी मिलावट का खुलासा हुआ है। अप्रैल से जुलाई तक खाद्य विभाग ने 42 नमूने लिए, जिनमें 29 की रिपोर्ट आई और 18 नमूने फेल मिले। जांच में दूध में पानी की मिलावट के साथ फैट की मात्रा भी कम पाई गई। कुछ नमूनों में आधा लीटर दूध में 300 ग्राम तक पानी मिला मिला। विभाग अब दोषी दूध विक्रेताओं के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी कर रहा है।
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विस्तार
मुरादाबाद जिले में घरों तक पहुंचने से पहले दूध की जान निकाल ली जा रही है। पहले मशीनों पर उसका फैट निकाल लिया जाता है और फिर इतना पानी मिला देते हैं कि उसमें दूध जैसा कुछ बचता ही नहीं। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट ने इसका खुलासा किया है। शहर में जगह-जगह दूध की डेयरियों से लिए गए 29 नमूनों की आई रिपोर्ट में 18 में पानी मिला है।
मिलावट का गणित इस तरह समझिए कि आधा लीटर दूध में 300 ग्राम तक पानी निकला। दुग्ध संघ मुरादाबाद के मुताबिक जिले में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें करीब सात लाख लीटर दूध डेयरियों पर जाता है। गर्मियों में कुल उत्पादन घटकर करीब नाै लाख लीटर हो जाता है।
जिले की अनुमानित आबादी करीब 37 लाख है। आंकड़ाें के मुताबिक एक व्यक्ति को करीब 460 मिलीमीटर दूध की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से जिले को रोजाना 17.20 लाख लीटर दूध की जरूरत है। कुल उत्पादन का करीब 60 फीसदी (सात लाख लीटर) दूध पशु पालक डेयरियों को बेच देते हैं।
इससे पनीर, मावा, दूध की मिठाई समेत अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। ऐसे में घरों में सप्लाई के लिए दूध कम पड़ जाता है। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट साफ कर रही है कि पानी मिलाकर मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटा जा रहा है। अप्रैल से जुलाई तक चार महीने में खाद्य विभाग की टीम ने दुकानों पर छापा मारकर दूध के कुल 42 सैंपल भरे।
बनारस और लखनऊ लेबोरेटरी से 29 नमूनों की रिपोर्ट आई। इसमें से दूध के 18 नमूने फेल मिले। जबकि अभी 13 नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। विभाग के मुताबिक रिपोर्ट में दूध में पानी मिला पाया गया है। इसके अलावा फैट की मात्रा भी कम पाई गई। विभाग दूध विक्रेताओं क खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी में है।
जरूरत से ज्यादा सफेद और मुलायम तो पनीर में मिलावट
मंडलीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी कृष्ण गोपाल यादव का कहना है कि अगर पनीर जरूरत से ज्यादा सफेद और अधिक मुलायम है तो पनीर मिलावटी हो सकता है। क्योंकि दूध से बना पनीर दूध से ज्यादा सफेद नहीं हो सकता है। फैट निकालने के बाद पनीर थोड़ा सख्त हो जाता है। अधिक सफेद दिखाने और साफ्ट करने के लिए रीफाइन, वेजिटेबल ऑयल, पाउडर, टीनोपाल का इस्तेमाल करते हैं।
बच्चों के विकास व वजन पर पड़ता है असर
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. शलभ अग्रवाल का कहना है कि मिलावट बड़ी समस्या है। अगर दूध में पानी मिला है तो बच्चों को पिलाने से कोई फायदा नहीं है। इससे बच्चों के विकास और वजन पर असर पड़ता है। बच्चा कुपोषित भी हो सकता है। इसलिए सिर्फ दूधर के भरोसे न रहे। दो साल तक बच्चों को मां का ही दूध पिलाएं।
गाय के दूध की रीडिंग 28-32 के बीच होती है और भैंस के दूध की 30-34 के बीच होती है। जैसे ही पानी मिलता है, घनत्व गिरता है और रीडिंग इन नंबरों से नीचे चली जाती है।
स्लोप टेस्ट (बिना किसी चीज के जांच)
ये 10 सेकंड का टेस्ट किसी भी चिकनी सतह पर हो जाता है। दूध की एक बूंद लें और साफ, चमकदार तिरछी सतह पर रखें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहता है और पीछे सफेद निशान छोड़ता है। मिलावटी दूध फटाफट बह जाता है, कोई निशान नहीं छोड़ता।
- चावल का पानी, मैदा, अरारोट से पतले दूध को गाढ़ा दिखाया जाता है। त्योहारों के वक्त, जब पनीर-खोया की मांग बढ़ती है, ये मिलावट ज्यादा होती है।
- छोटे बर्तन में 5 मिलीलीटर दूध उबालें और ठंडा करें। आयोडीन की दो-तीन बूंदें डालें। अगर दूध नीला या गहरा नीला हो जाए तो स्टार्च है। शुद्ध दूध पीला-भूरा रहता है।
डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध की जांच
साफ बोतल या गिलास में पांच मिलीलीटर दूध लें। उतना ही पानी मिलाएं। 20 सेकंड जोर से हिलाएं। शुद्ध दूध थोड़ा सा झाग बनाता है जो जल्दी खत्म हो जाता है। डिटर्जेंट वाले में घना, देर तक टिकने वाला झाग बनता है। जैसे साबुन पानी में बनता है।
- जिले में पशुओं की कुल संख्या करीब चार लाख
- दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) की संख्या 2.50 लाख
- जिले में दूध का कुल उत्पादन 12 लाख लीटर
- गर्मियों में दूध का उत्पादन 9 से 10 लाख लीटर
- जिले की कुल अनुमानित आबादी 37 लाख
- प्रति व्यक्ति प्रति दिन 460 मिली दूध की आवश्यकता