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Unnao News: वायरल फीवर ने बढ़ाई डायबिटीज मरीजों की परेशानी
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फोटो-9- फिजीशियन ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते मरीज
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उन्नाव। वायरल बुखार ने डायबिटीज मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुखार के दौरान शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इससे शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन ऐसे 50-60 मरीज आ रहे हैं।
मौसम में बदलाव के साथ वायरल बुखार के मामले बढ़े हैं। बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों में चेस्ट संक्रमण भी फैल रहा है। यह स्थिति डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। ओपीडी में रोजाना 50-60 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। इनकी डायबिटीज का स्तर तेजी से घट-बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बुखार में कार्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ती है। यह हार्मोन प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है और डायबिटीज मरीजों में इंसुलिन के स्तर को कमजोर करता है, जिससे खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार संक्रमण के दौरान रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता है।
ये हैं लक्षण
वायरल फीवर के साथ डायबिटीज मरीजों को तेज बुखार, कंपकंपी और शरीर में दर्द हो सकता है। अत्यधिक कमजोरी, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ भी संभव है। रक्त शर्करा बढ़ने पर तेज प्यास, बार-बार पेशाब और मुंह सूखना जैसे लक्षण दिखते हैं। चक्कर और धुंधला दिखाई देना भी है। कुछ मरीजों में भूख कम होने पर भी शुगर बढ़ जाती है। उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस या अत्यधिक उनींदापन गंभीर संकेत हैं। सामान्य बुखार मानकर घर में इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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बचाव के तरीके
बुखार के दौरान डायबिटीज मरीज दिन में कई बार शुगर की जांच करें और रीडिंग लिखते रहें। पर्याप्त पानी, सूप या डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ लेते रहें। इंसुलिन लेने वाले मरीज बिना डॉक्टर की सलाह इसे बंद न करें। दवाओं की मात्रा बढ़ाना या घटाना भी खतरनाक हो सकता है। हल्का भोजन लें और पर्याप्त आराम करें। खांसी, सांस फूलने या सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें। यदि शुगर लगातार बहुत अधिक रहे तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
चिकित्सकों की सलाह
वायरल फीवर में डायबिटीज मरीजों को शुगर की निगरानी सामान्य दिनों से अधिक करनी चाहिए। बुखार और संक्रमण से शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन या दवा की खुराक निर्धारित करें। पर्याप्त पानी पिएं और चेस्ट संक्रमण के लक्षणों पर तुरंत जांच कराएं। लगातार बढ़ी शुगर, उल्टी, सांस फूलना या बेहोशी जैसी स्थिति में देरी न करें।
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मौसम में बदलाव के साथ वायरल बुखार के मामले बढ़े हैं। बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों में चेस्ट संक्रमण भी फैल रहा है। यह स्थिति डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। ओपीडी में रोजाना 50-60 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। इनकी डायबिटीज का स्तर तेजी से घट-बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बुखार में कार्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ती है। यह हार्मोन प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है और डायबिटीज मरीजों में इंसुलिन के स्तर को कमजोर करता है, जिससे खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार संक्रमण के दौरान रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता है।
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ये हैं लक्षण
वायरल फीवर के साथ डायबिटीज मरीजों को तेज बुखार, कंपकंपी और शरीर में दर्द हो सकता है। अत्यधिक कमजोरी, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ भी संभव है। रक्त शर्करा बढ़ने पर तेज प्यास, बार-बार पेशाब और मुंह सूखना जैसे लक्षण दिखते हैं। चक्कर और धुंधला दिखाई देना भी है। कुछ मरीजों में भूख कम होने पर भी शुगर बढ़ जाती है। उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस या अत्यधिक उनींदापन गंभीर संकेत हैं। सामान्य बुखार मानकर घर में इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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बचाव के तरीके
बुखार के दौरान डायबिटीज मरीज दिन में कई बार शुगर की जांच करें और रीडिंग लिखते रहें। पर्याप्त पानी, सूप या डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ लेते रहें। इंसुलिन लेने वाले मरीज बिना डॉक्टर की सलाह इसे बंद न करें। दवाओं की मात्रा बढ़ाना या घटाना भी खतरनाक हो सकता है। हल्का भोजन लें और पर्याप्त आराम करें। खांसी, सांस फूलने या सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें। यदि शुगर लगातार बहुत अधिक रहे तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
चिकित्सकों की सलाह
वायरल फीवर में डायबिटीज मरीजों को शुगर की निगरानी सामान्य दिनों से अधिक करनी चाहिए। बुखार और संक्रमण से शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन या दवा की खुराक निर्धारित करें। पर्याप्त पानी पिएं और चेस्ट संक्रमण के लक्षणों पर तुरंत जांच कराएं। लगातार बढ़ी शुगर, उल्टी, सांस फूलना या बेहोशी जैसी स्थिति में देरी न करें।