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आयुर्वेद की फर्जी डिग्री: पंजीयन कराने वाले दो डॉक्टरों के खिलाफ होगी कार्रवाई, चला रहे डिस्पेंसरी; होगा FIR

Tue, 25 Aug 2026 05:46 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 25 Aug 2026 05:46 AM IST
सार
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जिले में आयुर्वेद की फर्जी डिग्री के आधार पर पंजीयन कराने वाले दो डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय में दोनों के प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार सत्यापन के बाद दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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Fake Ayurveda degrees Action taken against two registered doctors running dispensaries preparations underway
आयुर्वेद की फर्जी डिग्री पर होगी प्राथमिकी। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

फर्जी डिग्री के सहारे पंजीकरण कराकर डिस्पेंसरी चला रहे आयुर्वेद के दो डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी। आरोप है कि फर्जी डिग्री के सहारे आयुर्वेदिक व यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीकृत डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है। 

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डॉक्टरों पर आरोप है कि बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) एंड बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बीयूएमएस) की फर्जी डिग्री लेकर आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीकरण करा लिया है। दोनों डॉक्टरों फर्जी डिग्री के सहारे ही डिस्पेंसरी चला रहे हैं। एक डॉक्टर मड़ियाहूं के नएपुर में और दूसरा मुफ्तीगंज ब्लॉक के अपनी डिस्पेंसरी चला रहे हैं। 
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आरोप है कि दोनों डॉक्टरों ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल की डिग्री लगाई है। इसी फर्जी डिग्री के सहारे रजिस्ट्रार कार्यालय लखनऊ में पंजीकरण करा लिया। रजिस्ट्रार कार्यालय से दोनों डॉक्टरों को पंजीयन संख्या भी अलॉट कर दिया गया है। साल 2018 से ही दोनों अपनी डिस्पेंसरी चला रहे हैं।

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केस 1 : मड़ियाहूं के काजीपुर निवासी डॉ. किशन प्रेमचंद्र जिनका पंजीकरण संख्या 66647 है। आयुर्वेदिक व यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड से जारी सूची में इनका नाम 34वें नंबर दर्ज है। यह मड़ियाहूं कस्बा से सटे नएपुर में अपनी डिस्पेंसरी चलाते हैं। मोहल्ले में राधाकृष्ण हॉस्पिटल के नाम से अस्पताल संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि यहां एलोपैथिक पद्धति से भी इलाज किया जाता है। 

सोमवार को अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक मौके पर मौजूद नहीं मिले। उन्होंने फोन पर बातचीत करने से इन्कार किया। कहा कि मिलकर बात करेंगे। हालांकि, फर्जी डिग्री के मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। बोर्ड से जारी सूची में डॉ. जय हिंद यादव का नाम पहले क्रमांक पर है। उन्हें 67269 पंजीयन क्रमांक अलॉट किया गया है।

केस दो : धरौरा निवासी डॉ. जयहिंद यादव जौनपुर-केराकत मार्ग स्थित नई बाजार में एक मेडिकल स्टोर के पिछले हिस्से में डिस्पेंसरी चलाते हैं। हालांकि मौके पर वह नहीं मिले। फोन से उनसे बात नहीं हो पाई। आसपास के लोगों ने बताया कि उनकी डिस्पेंसरी यहीं चलती है। उन्होंने कोई बोर्ड लगाया है और न ही डिग्री का उल्लेख है। जिसे कमरे में वह मरीज देखते हैं उसमें बेड पड़े हैं। मेडिकल स्टोर के पिछले हिस्से में पतली गली जाती है। 

उसी में उनकी डिस्पेंसरी चलती है। जय हिंद यादव डीपीटी की डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज करते हैं। मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लीनिक संचालित है, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार करते हैं। मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह नियमित रूप से मरीजों को देखते हैं।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने यहां नहीं इनका कोई रिकॉर्ड
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय में दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. कमल का कहना है कि डिग्री मिलने के बाद रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा पद्धति लखनऊ के यहां पंजीकरण होता है। वहीं पंजीकरण की कॉपी जिला मुख्यालय को भेजी जाती है। जबकि इनके पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड नहीं आया है।

आयुर्वेदिक व यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड लखनऊ से दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा है। लेकिन हमारे कार्यालय में इन दोनों डॉक्टरों का कोई प्रमाण नहीं है। दोनों डॉक्टरों का पंजीकरण रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा पद्धति बोर्ड लखनऊ कार्यालय में हुआ है। कार्रवाई भी वहीं से होनी चाहिए। इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निर्देशक आयुर्वेदिक सेवाएं लखनऊ की ओर से कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। हमारे अधिकारी निर्देशक होते हैं। उनके निर्देश पर इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. कमल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी जौनपुर।

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