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Almora News: सड़क नहीं होने से समय पर नहीं मिल सका इलाज, सिंगरौ की सरस्वती देवी ने तोड़ा दम

Thu, 20 Aug 2026 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Thu, 20 Aug 2026 11:38 PM IST
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Saraswati Devi from Singrau passed away after failing to receive timely medical treatment due to the lack of a road.
मौलेखाल(अल्मोड़ा)।सड़क सुविधा के अभाव और दुर्गम रास्ते के चलते समय पर इलाज न मिल पाने की पीड़ा एक बार फिर सामने आई है। सिंगरौ गांव की 77 वर्षीय बुजुर्ग सरस्वती देवी की बृहस्पतिवार शाम करीब पांच बजे मौत हो गई। बीते मंगलवार को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें गांव से काशीपुर अस्पताल ले गए थे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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जानकारी के अनुसार सरस्वती देवी का स्वास्थ्य पिछले करीब सात-आठ दिनों से खराब चल रहा था। वह गांव में अकेली रहती थीं और दुर्गम रास्ते के कारण समय रहते अस्पताल नहीं पहुंच सकीं। मंगलवार को तबीयत अधिक बिगड़ने पर उनके रिश्तेदार उन्हें गांव से अस्पताल ले जाने के लिए पहुंचे। देर शाम काशीपुर पहुंचने पर उनकी नातिन डॉली और बड़ी बहू ने उन्हें सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया।
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कुछ घंटे उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार दिखाई देने पर चिकित्सकों ने रात ही को उन्हें छुट्टी दे दी। इसके बाद बड़ी बहू उन्हें अपने घर ले आई। परिजनों के मुताबिक बुधवार को सरस्वती देवी की हालत ठीक रही और उन्होंने परहेज का भोजन तथा दवाएं भी लीं। गुरुवार को भी दिन में उनकी तबीयत सामान्य दिखाई दे रही थी। खाना खाने के बाद वह आराम करने लगीं।
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शाम करीब पांच बजे बड़ी बहू ने चाय पीने के लिए उन्हें उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठीं। परिजनों ने देखा तो सरस्वती देवी की सांसें थम चुकी थीं। अचानक हुई मौत से परिवार में कोहराम मच गया।

ग्रामीण बोले—गांव में सड़क होती तो शायद बच जाती जान
ग्रामीण भीम सिंह बोरा और जमाई डी. एस. अधिकारी ने कहा कि सरस्वती देवी कई दिनों से बीमार थीं, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उन्हें समय पर इलाज के लिए अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा, “अगर गांव में सड़क होती तो शायद सरस्वती देवी को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और आज वह हमारे बीच होतीं।”

सरस्वती देवी की मौत के बाद उनके बड़े बेटे दिनेश, जो उड़ीसा में नौकरी करते हैं, घर के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं उनके दो छोटे बेटे दिल्ली में नौकरी करते हैं, वे भी मां की मौत की सूचना मिलने के बाद घर के लिए रवाना हो गए हैं।
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