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Bageshwar News: नम आंखों से मां गौरा और भगवान महेश्वर को दी विदाई
Thu, 20 Aug 2026 11:32 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:32 PM IST
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बागेश्वर के खुनौली में गौरा महेश्वर को विदाई के लिए ले जाते ग्रामीण।
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बागेश्वर। लोक संस्कृति और आस्था का प्रतीक सातूं-आठूं पर्व बृहस्पतिवार को जिलेभर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। महिलाओं ने विधि-विधान से भगवान महेश्वर और मां गौरा की पूजा-अर्चना कर गले में पवित्र दूबधागा धारण किया और परिजनों की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बिरुड़ा का प्रसाद बांटकर आशीर्वाद लिया।
जिला मुख्यालय स्थित त्रिजुगी नारायण मंदिर में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और पूजा-अर्चना के साथ आठूं पर्व मनाया। इस दौरान चंदा उपाध्याय, गीता देवी, गंगा देवी, पार्वती देवी, भगवती देवी, सुनीता देवी और सीता देवी सहित कई महिलाएं मौजूद रहीं।
कपकोट के वार्ड नंबर दो में मोहन चंद्र उपाध्याय के आवास पर पंडित बसंत बल्लभ जोशी ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और झांझर की थाप पर लोकगीतों और भजनों के साथ गौरा-महेश्वर की झांकी निकाली गई। वियोग के गीतों के बीच रामघाट स्थित हनुमान मंदिर के समीप सरयू-रामगंगा संगम क्षेत्र में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान बसंती, सावित्री, दीपा उपाध्याय, पुष्पा, नीमा, पूनम, भावना बिष्ट, पूर्व प्रधान गणेश चंद्र उपाध्याय, बचुली कपकोटी और मोतिमा कोरंगा मौजूद रहीं।
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इसके अलावा कपकोट के तल्ला-मल्ला आंणू, सिलकानी और कंयुटी मोहल्ले में भी पर्व धूमधाम से मनाया गया। कांडा तहसील के खुनौली गांव में पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना के बाद मां गौरा-महेश्वर को विदाई दी गई। मौके पर पुष्पा कांडपाल, पार्वती देवी, चंपा देवी, तारा देवी और लीला देवी आदि मौजूद रहीं।
बोहाला के आंठू मेले में झोड़ा-चांचरी और सांस्कृतिक रंग
काफलीगैर। ग्रामसभा बोहाला स्थित हरज्यू मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक आंठू मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लोक कलाकार राकेश खनवाल, तारा पथनी, संजय बिष्ट और विक्की आर्या ने गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर शाम तक झोड़ा और चांचरी की प्रस्तुतियां होती रहीं। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र रावत ने किया। मेला समिति ने बताया कि शनिवार को विजेताओं और कलाकारों को पुरस्कार वितरण के साथ मेले का औपचारिक समापन किया जाएगा।
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जिला मुख्यालय स्थित त्रिजुगी नारायण मंदिर में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और पूजा-अर्चना के साथ आठूं पर्व मनाया। इस दौरान चंदा उपाध्याय, गीता देवी, गंगा देवी, पार्वती देवी, भगवती देवी, सुनीता देवी और सीता देवी सहित कई महिलाएं मौजूद रहीं।
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कपकोट के वार्ड नंबर दो में मोहन चंद्र उपाध्याय के आवास पर पंडित बसंत बल्लभ जोशी ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और झांझर की थाप पर लोकगीतों और भजनों के साथ गौरा-महेश्वर की झांकी निकाली गई। वियोग के गीतों के बीच रामघाट स्थित हनुमान मंदिर के समीप सरयू-रामगंगा संगम क्षेत्र में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान बसंती, सावित्री, दीपा उपाध्याय, पुष्पा, नीमा, पूनम, भावना बिष्ट, पूर्व प्रधान गणेश चंद्र उपाध्याय, बचुली कपकोटी और मोतिमा कोरंगा मौजूद रहीं।
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इसके अलावा कपकोट के तल्ला-मल्ला आंणू, सिलकानी और कंयुटी मोहल्ले में भी पर्व धूमधाम से मनाया गया। कांडा तहसील के खुनौली गांव में पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना के बाद मां गौरा-महेश्वर को विदाई दी गई। मौके पर पुष्पा कांडपाल, पार्वती देवी, चंपा देवी, तारा देवी और लीला देवी आदि मौजूद रहीं।
बोहाला के आंठू मेले में झोड़ा-चांचरी और सांस्कृतिक रंग
काफलीगैर। ग्रामसभा बोहाला स्थित हरज्यू मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक आंठू मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लोक कलाकार राकेश खनवाल, तारा पथनी, संजय बिष्ट और विक्की आर्या ने गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर शाम तक झोड़ा और चांचरी की प्रस्तुतियां होती रहीं। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र रावत ने किया। मेला समिति ने बताया कि शनिवार को विजेताओं और कलाकारों को पुरस्कार वितरण के साथ मेले का औपचारिक समापन किया जाएगा।