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उत्तरकाशी: धराली आपदा के 14 महीने बाद मलबे में दबे कल्प केदार मंदिर की तलाश शुरू, 100 साल बाद फिर खुदाई

Mon, 12 Oct 2026 07:46 AM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Mon, 12 Oct 2026 07:46 AM IST
सार
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धराली आपदा के बाद मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को फिर से खोजने की कोशिश शुरू हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में पूजा-अर्चना के बाद खुदाई शुरू की।

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Dharali Disaster excavation begins to find ancient kalp kedar temple after 14 months Uttarkashi
दबे प्राचिन कल्प केदार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए खुदाई शुरू कर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

गत वर्ष अगस्त माह में धराली में आई विनाशकारी आपदा के एक वर्ष दो माह बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचिन कल्प केदार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए खुदाई शुरू कर दी। मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार इतिहास में चौथी बार कल्प केदार को ढूढ़ने का काम शुरू किया गया है। इससे पूर्व आखिरी बार वर्ष 1926 में खुदाई के दौरान कल्प केदार के मुख्य मंदिर को जमीन ने नीचे ढूंढा गया था।

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रविवार को नवरात्रि के पहले दिन शुभअवसर पर आपदा प्रभावित धराली गांव के ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में कल्पकेदार मंदिर को मलबे के नीचे ढूढ़ने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई है
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वहां पर विधिविधान के हवन के साथ पूजा पाठ किया गया। उसके बाद समेश्वर देवता के दिए समय पर खुदाई शुरू की गई। कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि अभी देवता के आदेश के साथ ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से खुदाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की है।
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जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। समिति के सदस्य संजय पंवार ने बताया कि पुराने बुजुर्ग लोगों के अनुसार सबसे पहले कल्प केदार मंदिर वर्ष 1803 की आपदा के दौरान बाढ़ में बह गया था। उस समय वहां पर करीब 204 मंदिरो का समूह होता था। उसके बाद 1887 में यहां पर तीन मंदिर दिखे थे। उसके बाद वर्ष 1926 में यहां पर आपदा में मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा दब गया था और अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। उसके बाद ग्रामीणों ने खुदाई कर पूरे मंदिर को बाहर निकाला था। उसके करीब सौ वर्ष बाद गत वर्ष अगस्त माह में आई आपदा में मंदिर मलबे में करीब 25 फीट नीचे दब गया था। उसे ढूढ़ने की कवायद नवरात्रि के पहले दिन शुरू कर दी गई है।

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