झाबुआ में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर झाबुआ में किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में शुरू हुआ किसानों का धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। अपनी मांगों को लेकर किसान कलेक्ट्रेट परिसर में ही डटे हुए हैं। किसानों ने गुरुवार रात भी धरना स्थल पर ही बिताई और वहीं भोजन बनाकर खाया। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिला किसान और बच्चे भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर किसानों से की चर्चा
गुरुवार शाम किसानों की समस्या सुनने के लिए एसडीएम मेघनगर अवंधती प्रधान और एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापेकर सहित अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस दौरान मुआवजे की प्रक्रिया और फोरलेन निर्माण से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को लेकर किसानों को जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत के बावजूद किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने अपना धरना जारी रखने का निर्णय लिया।
मुआवजे को लेकर किसानों में नाराजगी
किसानों का आरोप है कि बदनावर–टिमरवानी फोरलेन निर्माण के दौरान उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। किसानों का कहना है कि जमीन उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में जमीन जाने के बाद मिलने वाला मुआवजा उचित और नियमानुसार होना जरूरी है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष लगातार अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण उन्हें धरना देना पड़ा है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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धरना स्थल बना किसानों का अस्थायी ठिकाना
आंदोलन के दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों की मौजूदगी बनी रही। रात के समय किसानों ने धरना स्थल पर ही भोजन तैयार किया और सामूहिक रूप से खाना खाया। महिला किसान और बच्चे भी आंदोलन में मौजूद रहे। किसानों के धरना स्थल पर रात बिताने से आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, प्रशासन की ओर से कहा गया है कि किसानों को मुआवजे और संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई है। प्रशासन किसानों से संवाद और तालमेल बनाकर जल्द ही धरना समाप्त कराने का प्रयास कर रहा है। अब देखना होगा कि किसानों और प्रशासन के बीच आगे होने वाली बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन इसी तरह जारी रहता है।