राजस्थान विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन में विपक्ष के प्रदर्शन और उसकी गैरमौजूदगी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रतिक्रिया दी। विपक्षी बेंचों को खाली देखकर देवनानी ने चिंता जताई और कहा कि उन्हें इस स्थिति से पीड़ा हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष की मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और विपक्ष को अपने मुद्दे सदन के भीतर उठाने चाहिए।
देवनानी ने कहा कि शुरुआत में विवाद विधानसभा परिसर में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर था। विधायकों के लिए गेट नंबर-6 से विधानसभा में प्रवेश की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि जो विधायक पैदल आना चाहते हैं, उन्हें भी प्रवेश की अनुमति है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मार्शल की ओर से विधायकों को एक-एक करके अंदर आने के लिए कहा गया था।
विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक, कुछ विधायक इस व्यवस्था के तहत पहले ही सदन में पहुंच गए थे। इसके बाद सुरक्षा कारणों को देखते हुए अन्य विधायकों को भी एक-एक करके विधानसभा में प्रवेश करने के लिए कहा गया। इसके बावजूद कई विपक्षी विधायक सदन में नहीं पहुंचे। देवनानी ने कहा कि इस तरह की स्थिति ठीक नहीं है और सभी सदस्यों को विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होना चाहिए।
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उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि सभी सदस्य सदन में आएं और जिन मुद्दों को लेकर वे अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें विधानसभा के भीतर उठाएं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दे रखने का पूरा अधिकार और सम्मान है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसके सवालों तथा मुद्दों पर सदन में चर्चा होना जरूरी है।
देवनानी ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात मर्यादा और विधानसभा के नियमों के तहत रखनी चाहिए। उन्होंने सत्तारूढ़ दल से भी अपेक्षा जताई कि विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर सरकार संज्ञान ले और उनका उचित जवाब दे।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान के बाद विपक्ष के प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में उसकी भागीदारी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं। देवनानी ने दोनों पक्षों से सदन की गरिमा बनाए रखते हुए कार्यवाही में हिस्सा लेने और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप अपने-अपने दायित्व निभाने की अपील की।