US-Iran: ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी, अमेरिका ने चीन से भी मांगा साथ; तेहरान क्या बोला?
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी और चीन से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के प्रयासों में साथ देने को कहा। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद और युद्ध का दूसरा रूप बताया है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह आर्थिक टकराव आगे बड़े संकट में बदल सकता है? आइए, विस्तार से मामले को समझते हैं...
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे पर और गहराता दिख रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करेगा और ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। बेसेंट ने यह भी कहा कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब फिलहाल सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है।
अमेरिका ईरान पर क्या बड़ी कार्रवाई करने वाला है?
बेसेंट के मुताबिक अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा, जिससे ईरान की आर्थिक क्षमता और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों तक पहुंच सीमित हो सके। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है। बेसेंट ने संकेत दिया कि सोमवार को होने वाली एक मीडिया बैठक में ईरान के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यानी अमेरिका की नई रणनीति केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रह सकती है।
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चीन को अमेरिका ने क्यों दी चेतावनी?
ईरान के साथ चीन के व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अमेरिका ने दबाव बढ़ाया है। बेसेंट ने चीन से अमेरिकी कार्यक्रम के साथ आने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए होर्मुज का खुला रहना चीन के अपने हित में भी है। अमेरिका ने चीन पर संभावित कार्रवाई के सवाल पर साफ जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि कुछ बातचीत निजी स्तर पर बेहतर होती है।
ट्रंप ने ईरान पर क्या ऐलान किया था?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की रणनीति बताया। ट्रंप ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और फर्जी कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही। उन्होंने सहयोगी देशों से भी ईरान को अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ देने की अपील की।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद में क्यों अहम है?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी रही है। दूसरी ओर ईरान की ओर से इसे लेकर सख्त रुख सामने आया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किए जाने तक तेहरान इसे फिर से खोलने पर सहमत नहीं होगा।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को क्या बताया?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन्हें ‘आर्थिक आतंकवाद’ और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका दशकों से ईरानी लोगों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपना रहा है। ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव युद्ध और सैन्य हमले के ही दूसरे रूप हैं। साथ ही उसने साफ किया कि अमेरिकी दबाव के बावजूद वह अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।
क्या आर्थिक दबाव के बाद सैन्य कार्रवाई का खतरा टल गया?
बेसेंट ने कहा है कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब संभवतः सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका आर्थिक और वित्तीय दबाव को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने की बात दोहराई है। ऐसे में सैन्य विकल्प को पूरी तरह खत्म माना नहीं जा सकता। होर्मुज में तनाव और ईरान की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय कर सकती है।
क्या अमेरिका-ईरान टकराव में चीन भी खिंच सकता है?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधा आर्थिक टकराव है, लेकिन चीन का मुद्दा इसे और बड़ा बना सकता है। चीन के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं और उसकी ऊर्जा जरूरतों का संबंध खाड़ी क्षेत्र से है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग करे। वहीं ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार करने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर भी कार्रवाई करता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों और कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।