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क्या आपदा में चीन ने नेपाल को दिया धोखा?: बाढ़ की जानकारी 45 मिनट देरी से की साझा, नहीं मिला बचाव का मौका
Wed, 26 Aug 2026 04:35 PM IST
कुमार विवेक
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/काठमांडू
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/काठमांडू
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 26 Aug 2026 04:35 PM IST
क्या आपदा के समय चीन ने लापरवाही दिखाकर नेपाल की मुश्किलें बढ़ी हैं? नेपाली सूत्रों का दावा है कि तिब्बत के केरुंग में आई बाढ़ की सूचना 45 मिनट देरी से मिलने के कारण राहत और बचाव का काम शुरू नहीं किया जा सका। इससे रसुवा के टिमुरे में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। जानें क्या है वर्तमान स्थिति।
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नेपाल में बाढ़
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
चीन की ओर से समय पर आपदा संबंधी जानकारी साझा न करने के कारण नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में एक बार फिर गंभीर संकट पैदा हो गया है। नेपाल के सूत्रों के अनुसार तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ की चेतावनी नेपाल को 45 मिनट की देरी से मिली, जिससे रसुवा के टिमुरे क्षेत्र में स्थानीय लोगों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। द्विपक्षीय समन्वय के दावों के बीच चीन की इस बड़ी लापरवाही ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में बाढ़ की सटीक समय-सीमा क्या थी?
चीनी मीडिया सीआरआई (CRI) ऑनलाइन नेटवर्क के अनुसार, तिब्बत के केरुंग काउंटी में चीनी समयानुसार सुबह 10:30 बजे अचानक बाढ़ देखी गई थी। चूंकि नेपाल और चीन के समय में 2 घंटे 15 मिनट का अंतर है, इसलिए नेपाली समयानुसार यह बाढ़ बुधवार सुबह 8:15 बजे ही आ चुकी थी। समय का यह अंतर सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा की पूर्व चेतावनी के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता था, लेकिन चीन की ओर से सूचना साझा न किए जाने के कारण नेपाल इसका लाभ नहीं उठा सका।
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नेपाल को आपदा की जानकारी मिलने में कितनी देरी हुई और यह सूचना कैसे प्राप्त हुई?
नेपाल को इस विनाशकारी बाढ़ की जानकारी तय समय से लगभग 45 मिनट देरी से मिली। इस देरी और संचार विफलता के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:- समय का अंतर: नेपाल और चीन के समय में 2 घंटे 15 मिनट का अंतर है, जिससे तिब्बत में सुबह 10:30 बजे आई बाढ़ नेपाली समयानुसार सुबह 8:15 बजे ही आ चुकी थी।
- कोई आधिकारिक सूचना नहीं: यह अति महत्वपूर्ण सूचना चीन के किसी भी आधिकारिक विभाग या आपदा प्रबंधन निकाय की ओर से जारी नहीं की गई। अगर समय रहते सूचना मिलती तो नेपाल में राहत और बचाव का काम पहले शुरू कर दिया जाता।
- सीडीओ की त्वरित कार्रवाई: रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी (सीडीओ) नरेंद्र परियार ने सुबह करीब 9:00 बजे फोन कर बताया कि स्थानीय लोगों ने केरुंग से नेपाल की ओर बाढ़ के पानी को बढ़ते हुए देखा है। उन्हें यह जानकारी चीन के क्षेत्र में बाढ़ आने के करीब 45 मिनट बाद मिली।
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रसुवा के टिमुरे क्षेत्र में समय पर चेतावनी न मिलने का क्या प्रभाव पड़ा?
समय पर आधिकारिक चेतावनी न मिलने के कारण नेपाल के टिमुरे क्षेत्र में सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए जा सके। इस विफलता के गंभीर परिणाम देखने को मिले:- दिल दहलाने वाले वीडियो फुटेज: वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि टिमुरे के स्थानीय निवासी जान बचाने के लिए भाग रहे थे और इसी दौरान कई लोग बाढ़ की तेज धाराओं में बह गए।
- पूर्व तैयारी का अभाव: स्थानीय निवासियों को जब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने का एहसास हुआ, तब वे भागने को मजबूर हुए, जिससे अधिकांश लोग इस विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गए।