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'खून बहता रहा तो बदल जाएगा नक्शा': आसिम मुनीर को पाकिस्तानी सांसद ने दिखाया आईना, 1971 के जंग की दिलाई याद

Mon, 24 Aug 2026 12:24 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 24 Aug 2026 12:24 PM IST
सार
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JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान की करारी हार और उसके बाद ढाका में हुए आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि लंबे समय तक जारी दमन भविष्य में नक्शे में नए बदलाव की वजह बन सकता है।

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If bloodshed continues map will change Pakistani MP Fazlur Rehman holds mirror to Asim Munir reminds 1971 war
मौलाना फजलुर रहमान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सैन्य प्रतिष्ठान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 1971 में ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में भी ताकत और आखिरी दम तक लड़ने के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन उनका परिणाम पाकिस्तान की हार के रूप में सामने आया। रहमान ने लंबे समय से जारी हिंसा और दमन को भविष्य में संभावित भौगोलिक बदलाव से जोड़ते हुए आम जनता की परेशानियों पर भी सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और संघीय सरकार की शक्तियां एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित की जा रही हैं और विपक्ष से संसद के भीतर एकजुट होकर इसका विरोध करने की अपील की।

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आसिम मुनीर के शक्ति प्रदर्शन पर उठाए सवाल
पेशावर में JUI-F के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए रहमान ने सैन्य प्रतिष्ठान की ओर से बार-बार किए जाने वाले ताकत के दावों और आक्रामक रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के आम लोग गंभीर परेशानियों से गुजर रहे हैं और ऐसे हालात में सत्ता की ताकत का प्रदर्शन किस काम का है। पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व पर सीधा निशाना साधते हुए JUI-F प्रमुख ने कहा, 'हम इस देश के रक्षक हैं। किसी के बाप में भी इस देश को नुकसान पहुंचाने की ताकत नहीं है। मैं मानता हूं कि आप बहुत शक्तिशाली हैं।' हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की ताकत के दावे देश को अंदरूनी उथल-पुथल और बढ़ते जन असंतोष से बचा सकते हैं।
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1971 की जंग और ढाका में आत्मसमर्पण का जिक्र
फजलुर रहमान ने मौजूदा दौर में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की ओर से दिए जा रहे बयानों की तुलना 1971 के युद्ध के घटनाक्रम से की। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय भी पाकिस्तानी सेना की ओर से आखिरी दम तक लड़ने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन निर्णायक स्थिति आने पर ढाका में आत्मसमर्पण करना पड़ा था। दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच चला 13 दिनों का युद्ध 16 दिसंबर को ढाका में करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ था। इस हार के बाद पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा उससे अलग हो गया और अंततः बांग्लादेश का गठन हुआ।
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‘हम ये बड़ी-बड़ी बातें पहले भी सुन चुके हैं’
रहमान ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति और सैन्य शासक जनरल याह्या खान के उन बयानों को भी याद किया, जो आत्मसमर्पण से ठीक पहले दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अतीत में भी इसी तरह के बड़े दावे कर चुका है, लेकिन जब हालात निर्णायक मोड़ पर पहुंचे तो वे दावे जमीन पर टिक नहीं सके। मुझे याद है और शायद कुछ बुजुर्गों को भी याद होगा कि दिसंबर 1971 में हथियार डालने से एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने सेना को संबोधित करते हुए कहा था, ‘हम सड़कों पर लड़ेंगे, रेगिस्तानों में लड़ेंगे, खेतों में लड़ेंगे, कारखानों में लड़ेंगे, पहाड़ों में लड़ेंगे और उनसे लड़ेंगे। हम लड़ेंगे।’ हमने उस समय भी ये बड़ी-बड़ी बातें सुनी थीं। 

‘देश और जनता को क्यों परीक्षा में डाल रहे हैं?’
JUI-F प्रमुख ने पाकिस्तान में आम लोगों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए सैन्य प्रतिष्ठान से सवाल किया कि आखिर देश की जनता को लगातार मुश्किल हालात में क्यों धकेला जा रहा है। आप देश और लोगों को परीक्षा में क्यों डाल रहे हैं? जब आपकी जनता परेशान है तो आप यह तमाशा क्यों कर रहे हैं? पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र में लंबे समय से संघर्ष, हिंसा और खून-खराबे का दौर जारी है और इसके भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

'बदल जाएगा नक्शा'
क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्ष और रक्तपात का उल्लेख करते हुए फजलुर रहमान ने कहा कि इसकी शुरुआत के बाद कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन हिंसा का सिलसिला थमा नहीं है। जब 1989 में अफगानिस्तान में क्रांति आई और युद्ध शुरू हुआ 45-46 साल हो गए हैं; करीब आधी सदी से खून बह रहा है। जब इस तरह खून बहता है, तो यह भौगोलिक बदलाव का संकेत होता है। अगर यह दमन का संकेत है, तो कम से कम हमें अपने इरादों के बारे में बता दीजिए। हम इसे सहन कर रहे हैं और आगे भी सहते रहेंगे।

संसद की शक्तियां एक व्यक्ति के हाथ में देने का आरोप
फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद और संघीय सरकार के अधिकारों को कथित तौर पर एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित कर दिया गया है। आप सेना प्रमुख हो सकते हैं, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज हो सकते हैं, फील्ड मार्शल भी हो सकते हैं हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जिन शक्तियों का अधिकार संसद के पास होना चाहिए, उन्हें प्रतिष्ठान में बैठे एक व्यक्ति के हाथों में सौंप दिया गया है।


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संसद को दरकिनार किए जाने की आशंका
JUI-F प्रमुख ने आशंका जताई कि भविष्य में कानून बनाने और संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया में संसद को किनारे किया जा सकता है। सत्ता के ढांचे में ऐसा बदलाव लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को अपने रास्ते पर लाना और उसे अपने बूट के नीचे रखना उनके लिए शायद ज्यादा आसान हो सकता है। रहमान ने आगे कहा,'और वे कहते हैं कि अगर कोई फैसला करना है तो संघीय सरकार करेगी यानी इसमें संसद को भी दरकिनार कर दिया गया है।' 

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