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एक्सप्लेनर: नेपाल में 45 दिन बाद फिर क्यों आई भीषण बाढ़, कैसे उफनती बूढ़ी गंडकी बनी खतरा, कैसे बचीं हजारों जान
Sun, 11 Oct 2026 06:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 11 Oct 2026 06:57 PM IST
नेपाल में रविवार को अचानक से बाढ़ का खतरा कैसे पैदा हो गया? इससे अब तक कितने नुकसान की बात सामने आई है? करीब डेढ़ महीने पहले भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई बाढ़ से जिस तरह का नुकसान हुआ था, इस बार कैसे उन हालात को बिगड़ने से रोका गया? क्या आगे भी नेपाल में इस तरह का खतरा पैदा हो सकता है? आइये जानते हैं...
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नेपाल में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में रविवार सुबह तेज उफान आया, जिसके चलते नदी के आसपास के इलाकों में भीषण बाढ़ आई। सोशल मीडिया पर इस बाढ़ से जुड़े जो वीडियो और तस्वीरें साझा की गई हैं, उनमें साफ है कि नेपाल में करीब 45 दिन पहले ही जिस तरह के हालात पैदा हुए थे, आज भी वैसी ही स्थितियां पैदा होने का खतरा था। हालांकि, अब तक की जानकारी के मुताबिक, बूढ़ी गंडक में आई बाढ़ से नेपाल में जान-माल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है और सरकार का कहना है कि सतर्कता के चलते हालात अब उसके नियंत्रण में हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नेपाल में रविवार को अचानक से बाढ़ का खतरा कैसे पैदा हो गया? इससे अब तक कितने नुकसान की बात सामने आई है? करीब डेढ़ महीने पहले भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई बाढ़ से जिस तरह का नुकसान हुआ था, इस बार कैसे उन हालात को बिगड़ने से रोका गया? क्या आगे भी नेपाल में इस तरह का खतरा पैदा हो सकता है? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नेपाल में रविवार को अचानक से बाढ़ का खतरा कैसे पैदा हो गया? इससे अब तक कितने नुकसान की बात सामने आई है? करीब डेढ़ महीने पहले भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई बाढ़ से जिस तरह का नुकसान हुआ था, इस बार कैसे उन हालात को बिगड़ने से रोका गया? क्या आगे भी नेपाल में इस तरह का खतरा पैदा हो सकता है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- नेपाल में रविवार को अचानक बाढ़ का खतरा कैसे पैदा हो गया?
नेपाल के गोरखा जिले में रविवार को बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ के पीछे पहाड़ी क्षेत्र में हुई हलचल को वजह बताया गया है।1. नेपाल की भूवैज्ञानिक टीम के मुताबिक, गोरखा जिले के चुमानुब्री ग्राम निकाय में लोकपा और चुलीदांडा के बीच अचानक भूस्खलन हुआ। इससे बूढ़ी गंडक नदी का बहाव कई जगहों पर मलबा गिरने की वजह से रुक गया।
2. रविवार तड़के लगभग सुबह 4:00 से 4:30 बजे के बीच भूस्खलन से बना यह अस्थायी प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया। इसके बाद वहां रुका पानी, भारी काला कीचड़ और मलबा अत्यंत तीव्र वेग से बूढ़ी गंडकी नदी में जा गिरा, जिससे नदी में अचानक उफान आ गया और जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया।
3. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, भूस्खलन के बाद नदी का बहाव करीब छह बार रुका और खुला, जिससे तेज गड़गड़ाहट की आवाजों के साथ बार-बार पानी का स्तर घटता और अचानक बढ़ता रहा।
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4. जल और मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, उस क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश नहीं हुई थी। इसलिए यह बाढ़ तात्कालिक वर्षा से ज्यादा भूस्खलन के चलते नदी के ब्लॉक होने और फटने के कारण ही आई।
5. इस घटना के बाद बूढ़ी गंडकी के साथ-साथ निचले तटीय क्षेत्रों, जैसे- त्रिशूली नदी गलियारा, बेनीघाट, मुग्लिन, चितवन और नवलपरासी तक अचानक बाढ़ का भारी खतरा पैदा हो गया और प्रशासन को चेतावनी जारी करनी पड़ी।
5. इस घटना के बाद बूढ़ी गंडकी के साथ-साथ निचले तटीय क्षेत्रों, जैसे- त्रिशूली नदी गलियारा, बेनीघाट, मुग्लिन, चितवन और नवलपरासी तक अचानक बाढ़ का भारी खतरा पैदा हो गया और प्रशासन को चेतावनी जारी करनी पड़ी।
कैसे-कितनी तेजी से नेपाल में आगे बढ़ी बाढ़?
- बूढ़ी गंडकी नदी के तटीय गलियारे में मलबा गिरने के बाद जब बहाव अचानक सिर्दिबास, लोकपा, न्याक्चेत, जगत बगर, घट्टेखोला, सल्लेरी, यारुबगर, माछाखोला, सोती और आरुघाट तक पहुंच गई। इसका असर आगे त्रिशूली नदी गलियारे- बेनीघाट, मुग्लिन से लेकर चितवन और नवलपरासी जिलों तक फैला।
- सरकार के मुताबिक, ऊपरी हिमालय (पहाड़ी हिस्से) से निचले इलाकों, जैसे आरुघाट तक पहुंचने में बाढ़ के सैलाब को लगभग 3 से 4 घंटे लगे। पहाड़ी ढलान बहुत सीधा होने के कारण काला कीचड़, मलबा और पानी अत्यधिक तीव्र रफ्तार से बढ़ा; हिलोमाटो उछलकर ऊंचे पेड़ों की टहनियों तक जा पहुंचा।
- आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख धर्मराज उप्रेती के मुताबिक, आरुघाट में स्थित नदी का जलस्तर मापने वाले केंद्र पर खतरे का निशान पांच मीटर है, लेकिन बाढ़ का पानी 8.3 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। इस बीच जब-जब भूस्खलन से फंसी हुई नदी का पानी अचानक छूटता, इसका सैलाब करीब 15 मीटर ऊपर तक उठ जा रहा था।
नेपाल में बूढ़ी गंडक में आई बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
नेपाल में अब तक कितने नुकसान की बात सामने आई?
मृतक-लापता: ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल में फिलहाल इस अचानक आई बाढ़ में किसी की मौत की जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि, पांच लोग लापता बताए गए हैं, जिनकी खोज जारी है। यह सभी लोग चुमनुब्री-6 में बूढ़ी गंडक की सहायक नदी उंगिलुंग नदी के किनारे पर एक शेड में थे। हालांकि, बाढ़ के बाद इनका पता नहीं लगाया जा सका है।घर और बस्तियां: चुमनुव्री ग्राम पालिका के जगत बगर, सल्लेरी, घट्टेखोला और पैयुं क्षेत्रों में अनुमानित 35 से 40 घर बाढ़ में बह गए हैं। इसके अलावा माछाखोला के निचले तटीय क्षेत्रों में कई घरों में पानी घुस गया है और 20 से 22 घर खतरे की जद में हैं।
पुल और बुनियादी ढांचा: गोरखा और धादिड़ जिले को जोड़ने वाले आरुघाट पक्की पुल का लगभग 22 मीटर आरसीसी हिस्सा बह गया है। इसके अलावा सोती में लोहे का पुल पूरी तरह बह गया।
इसके अलावा न्याक्चेत-सिर्दीबास और माछाखोला-केरौंजा को जोड़ने वाले मुख्य सस्पेंशन पुल भी बाढ़ में बह गए हैं।
जलविद्युत परियोजनाएं: बाढ़ से चार जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है।
1. अब तक कितने रेस्क्यू हुए
- निर्माणाधीन 341 मेगावाट बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना का मुख्य निर्माण कैंप और मशीनें बह गईं।
- 24.5 मेगावाट दोभान खोला परियोजना का कैंप और बेली ब्रिज बह गया।
- 30.59 मेगावाट यारु खोला परियोजना का बेलीब्रिज और उपकरण/सामग्री बह गई।
- 16 मेगावाट माछा खोला परियोजना की सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो गए।
राहत-बचाव कार्य कैसे चल रहा है, अब तक कितने रेस्क्यू किए गए?
1. अब तक कितने रेस्क्यू हुए
- नेपाल के आपदा विभाग के मुताबिक, अब तक कुल 47 लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। नेपाली सेना के हेलिकॉप्टरों ने कई अलग-अलग स्थानों से लोगों को निकाला है।
- जगत गांव के भूस्खलन-संभावित क्षेत्र से छह लोग का हवाई रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा न्याकफेदी से नौ लोग। यारुबगर क्षेत्र में रास्तों के कट जाने से बीच में फंसे हाइड्रोपावर कर्मियों, स्थानीय लोगों, एक शिशु और एक विदेशी नागरिक को सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा पैयुं गांव से 12 लोग बचाए गए।
2. सुरक्षा बलों और संसाधनों की तैनाती
3. तकनीकी निरीक्षण और बेली ब्रिज की तैयारी
आपदा प्रबंधन विभाग और सड़क विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम ड्रोन कैमरों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। यह टीम बाढ़ के सटीक कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आरुघाट में क्षतिग्रस्त हुए मुख्य पुल के स्थान पर तुरंत बेली ब्रिज स्थापित करने की संभावना का अध्ययन कर रही है, ताकि संपर्क मार्ग बहाल किया जा सके।
4. तटीय निवासियों व पर्यटकों की स्थिति
- खोज और बचाव के लिए कुल 387 सुरक्षाकर्मियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है। इनमें नेपाली सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल की तैनाती की गई।
- नेपाली सेना के चार हेलीकॉप्टर लगातार हवाई सर्वेक्षण, फंसे लोगों को रेस्क्यू करने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
3. तकनीकी निरीक्षण और बेली ब्रिज की तैयारी
आपदा प्रबंधन विभाग और सड़क विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम ड्रोन कैमरों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। यह टीम बाढ़ के सटीक कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आरुघाट में क्षतिग्रस्त हुए मुख्य पुल के स्थान पर तुरंत बेली ब्रिज स्थापित करने की संभावना का अध्ययन कर रही है, ताकि संपर्क मार्ग बहाल किया जा सके।
4. तटीय निवासियों व पर्यटकों की स्थिति
- बाढ़ के खतरे को देखते हुए आरुघाट बाजार और निचले तटीय क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों और जंगलों की तरफ स्थानांतरित किया गया है।
- मनास्लु मार्ग पर पुल टूटने के कारण फंसे पर्यटकों, जगत में करीब 115 और लोकपा में 40 पर्यटक अपने-अपने होटलों और सुरक्षित स्थानों पर बने हुए हैं।
नेपाल में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
नेपाल में इस बार कैसे बाढ़ के बावजूद बेहतर रही स्थिति?
- बूढ़ी गंडकी नदी में आई भयानक बाढ़ और भारी तबाही के बावजूद मानवीय क्षति अब तक दर्ज नहीं की गई है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स और नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने इससे जुड़ी वजहों का भी खुलासा किया है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, आम लोगों की सतर्कता इस बार जान बचाने में काफी अहम साबित हुई। तड़के करीब 4 बजे नदी में रुकावट और तेज गड़गड़ाहट की आवाज सुनते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत एक-दूसरे को फोन पर सचेत किया और घरों को छोड़कर जंगलों तथा ऊंची पहाड़ियों की ओर भागकर अपनी जान बचाई।
ये भी पढ़ें: नेपाल में फिर आई तबाही: बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से कई घर और पुल बहे; गांवों में मचा हड़कंप
- बाढ़ का खतरा मंडराते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने माइकिंग और अलर्ट जारी कर आरुघाट बाजार, सिर्दिबास, माछाखोला और जगत् जैसे निचले तटीय क्षेत्रों की बस्तियों को समय रहते खाली करा लिया।
- आपदा की खबर मिलते ही नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी बल के सुरक्षाकर्मियों ने खोज और बचाव कार्य के लिए तुरंत जमीन पर उतर गए। नेपाली सेना के चार हेलीकॉप्टरों ने शुरुआत से ही लगातार उड़ान भरकर भूस्खलन-संभावित और कटे हुए क्षेत्रों से लोगों को एयरलिफ्ट किया।
- उप्रेती ने कांतीपुर मीडिया समूह को बताया कि उनके विभाग को सुबह करीब 6.20 पर भीषण बाढ़ की चेतावनी मिली। इसके 20 मिनट के अंदर ही नदी के रास्ते पर पड़ने वाले सभी जिलों में रहने वालों को एसएमएस के जरिए खतरे के बारे में अलर्ट कर दिया गया।
- बाढ़ पूर्वानुमान शाखा ने त्रिशूली नदी गलियारे, बेनीघाट, मुग्लिन, चितवन और नवलपरासी तक पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया और रेस्क्यू टीमों की तैनाती समय पर की गई। इससे नदी किनारे रहने वाले लोग सतर्क हो गए।
नेपाल में अब आगे कितना खतरा, तैयारियां क्या?
- नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, बूढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। प्रशासन ने बेनीघाट तक के क्षेत्र को अति-उच्च जोखिम और मुग्लिन, चितवन और नवलपरासी तक के तटीय इलाकों को सतर्कता बरतने के वर्ग में रखा है।
- ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र चुम्चेत-तुम्जे में भूस्खलन का मलबा अभी भी गिर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मलबे से नदी के दोबारा रुकने और अचानक फटने का अंदेशा बना हुआ है।
- मौसम विज्ञान विभाग के मताबिक, पश्चिमी कम-दबाव वाली प्रणाली और मानसूनी हवाओं के प्रभाव से नेपाल के पहाड़ी और हिमाली क्षेत्रों- गंडकी, बागमती, कोशी आदि में बारिश और तूफान की संभावना बनी हुई है।