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अमेरिका ने पश्चिम एशिया में भेजा नया विमानवाहक पोत: यूएसएस लिंकन की लेगा जगह, सैनिकों की हालत पर मचा था बवाल

Thu, 20 Aug 2026 09:55 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 20 Aug 2026 09:55 PM IST
सार
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अमेरिकी सेना ने गुरुवार को बताया कि एशिया में तैनात यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन विमानवाहक पोत अब पश्चिम एशिया में काम कर रहा है। यह पोत लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा है। लिंकन को ईरान युद्ध के दौरान तैनाती के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और आपूर्ति की कमी की खबरों का सामना करना पड़ा था।
 

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US aircraft carrier arrives in Middle East, relieving long-deployed USS Lincoln
विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन - फोटो : आईएएनएस

विस्तार

यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने मध्य पूर्व में विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन की तैनाती का एलान कर दिया है। हाल ही में यूएसएस लिंकन पर यूएस नौसेना कर्मियों की लंबे समय से तैनाती को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। गुरुवार को सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, "जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सेंटकॉम क्षेत्र में पहुंचने के बाद, तय तैनाती के तहत पश्चिम एशिया में काम कर रहा है।"

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यूएसएस अब्राहम लिंकन की स्थिति पर मचा था बवाल
यूएसएस अब्राहम लिंकन करीब 5,000 सैन्यकर्मियों के साथ 260 से ज्यादा दिनों से समुद्र में रहा था। यूएसएस अब्राहम लिंकन को लेकर विवाद तब गहराया जब जहाज पर तैनात कुछ नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ नाविकों ने समुद्र में छलांग लगाने की कोशिश की थी।
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अमेरिकी सांसदों और सैन्य परिवारों ने जहाज पर लंबे समय तक लगातार तैनाती के असर की जांच की मांग की थी। हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने आत्महत्या की प्रवृत्ति में किसी वृद्धि की पुष्टि नहीं की। रक्षा विभाग ने भी जहाज की स्थिति को लेकर सामने आई कुछ रिपोर्टों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कही थी।
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हाल ही में सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने लंबी चिट्ठी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ को लिखी थी। उन्होंने यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) में तैनात नौसैनिकों की खराब परिस्थितियों, आपूर्ति की कमी, प्लंबिंग समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर रक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने तीन पन्नों की चिट्ठी साझा करते हुए पूछा था कि "विभाग बताए कि सैनिकों को लेकर वो क्या कर रहा है?" उन्होंने विमानवाहक पोत के 250 दिनों से अधिक समय से समुद्र में रहने का जिक्र किया था। नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पोत की समुद्र में तैनाती छह महीने से ज्यादा नहीं रहती और ये वियतनाम युद्ध के बाद सबसे लंबी तैनाती रही।सीनेटर ने तैनाती, तैयारी और सेहत को लेकर कुल 6 सवाल पूछे थे। जिसमें युद्ध पोत के रुकने की अवधि, नौसैनिकों के लिए इंतजामात , आगामी ऑपरेशन्स को लेकर नेवी की तैयारी, विभाग की स्ट्रैटजी संबंधी जवाब मांगे गए थे। वहीं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इसे लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा कि जहाज की तैनाती उनके हिसाब से "काफी लंबी नहीं है और उनके हिसाब से पर्याप्त भी नहीं है।

क्या है मामला?

दरअसल, पिछले साल नवंबर से ही अमेरिकी सैन्य बंदरगाह से निकलने के बाद यह युद्धपोत जलक्षेत्र में है और अब करीब 250 दिन के बाद इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर खाने की कमी, प्लंबिंग की समस्या और मानसिक थकान की दिक्कतों से जूझ रहे थे। मौजूदा समय में यूएसएस लिंकन पर करीब पांच हजार सैन्य कर्मी तैनात हैं, जिनमें सेना, नौसेना के कर्मी और हजारों मरीन हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हालात इतने खराब हैं कि कुछ सैनिक इस एयरक्राफ्ट कैरियर से समुद्र में कूदने की कोशिश तक कर चुके हैं, वहीं कुछ कर्मी आत्महत्या तक को लेकर चर्चाएं तक कर रहे हैं। इन स्थितियों की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका अब जल्द क्षेत्र में नया विमानवाहक पोत तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जिसके बाद यूएसएस लिंकन की वापसी संभव होगी। 

भोजन की कमी पैदा हुई
इन परिस्थितियों के बीच  जहाज पर ताजे भोजन की भारी कमी हो गई है। सैनिकों को राशन किया हुआ भोजन दिया जा रहा है; यहां तक कि उन्हें एक वक्त के भोजन में केवल आधा कप चावल और दो टॉर्टिला तक परोसे जा रहे हैं। भोजन की इस कमी के कारण एक सैनिक के रिश्तेदार ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य का वजन तैनाती के दौरान लगभग 29 किलोग्राम तक घट गया है।

आम जरूरत की चीजें भी कम हुईं
इतना ही नहीं जहाज पर साबुन, टूथपेस्ट और यहां तक कि टॉयलेट पेपर जैसी बुनियादी चीजों की भारी कमी है। लॉन्ड्री सिस्टम हफ्तों से बंद पड़े होने के कारण सैनिक कपड़े तक नहीं धो पा रहे हैं। जहाज के बाथरूमों में गंदा पानी और सीवेज भरा रहता है। फंगस लगे शॉवर, टूटे शौचालय और हफ्तों तक गर्म पानी न मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा युद्धपोत पर मेल सिस्टम ठप हो गया है, जिसकी वजह से परिवारों की तरफ से भेजे गए केयर पैकेज या तो महीनों लेट पहुंच रहे हैं या रास्ते में ही खो जा रहे हैं। 

लंबे समय में जहाज और सैनिक दोनों की सेहत पर असर
जहाज के फ्लाइट डेक पर, जहां से पायलट उड़ान भरते हैं, कई जगह छेद हो गए हैं जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। दूसरी तरफ सैनिकों को दिन-रात जहाज के इंजन के शोर और विमानों के उड़ने के भारी कंपन के बीच काम करना पड़ रहा है। 16-16 घंटे की थकाऊ शिफ्ट के बाद भी उन्हें सोने या आराम करने का आराम  और शांति का क्षण नहीं मिलता। 
 

हालात इतने खराब कैसे हो गए, इसके लिए ईरानी हमले कैसे जिम्मेदार? 

यूएसएस अब्राहम लिंकन पर आए इस भीषण रसद संकट के पीछे ईरान की सोची-समझी सैन्य रणनीति और सटीक हमले सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं...

बहरीन के प्रमुख नौसैनिक अड्डे की तबाही
युद्ध की शुरुआत में ही ईरानी मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों के भीषण हमलों ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के प्रमुख रसद और आपूर्ति केंद्र को पूरी तरह तबाह कर दिया था। यह अड्डा अमेरिकी नौसेना के लिए दशकों से खाड़ी क्षेत्र में रसद आपूर्ति और सैनिकों के आराम का सबसे बड़ा लाइफलाइन हब था। इस हब के नष्ट होते ही पूरी आपूर्ति व्यवस्था बिखर गई।

2200 मील दूर हिंद महासागर में आपूर्ति केंद्र का खिसकना
बहरीन के नष्ट होने के बाद, अमेरिकी सेना को मजबूरन अपनी पूरी लॉजिस्टिक्स चेन खाड़ी से 2200 मील दूर हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर ट्रांसफर करनी पड़ी। इतनी भारी भौगोलिक दूरी की वजह से यूएसएस अब्राहम लिंकन तक समय पर ताजी सब्जियां, राशन, दवाएं, स्वच्छता उत्पाद और सैनिकों-कर्मियों के घर से भेजे गए पार्सल पहुंचाना बेहद मुश्किल, धीमा और अनिश्चित हो गया है।

एडमिरल कूपर ने लिंकन का किया था दौरा
लिंकन का दौरा करने के बाद रविवार को जारी बयान में एडमिरल कूपर ने पोत के नेतृत्व की मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती को प्राथमिकता देने के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि इतिहास इस तैनाती को आधुनिक दौर की सबसे अधिक परिचालनात्मक रूप से गहन और महत्वपूर्ण तैनातियों में से एक के तौर पर दर्ज करेगा।


एशिया में फिलहाल अमेरिकी विमानवाहक पोत नहीं
यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन के पश्चिम एशिया में पहुंचने के बाद वहां यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश भी मौजूद है। इसके चलते एशिया में फिलहाल कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप नहीं है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब चीन की ओर से आक्रामकता के और संकेत मिले हैं। अमेरिकी नौसेना अगले कुछ महीनों में किसी अन्य विमानवाहक पोत को तैनात कर सकती है, जिससे प्रशांत क्षेत्र में यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे यह भी पता चलता है कि ईरान के साथ चल रहे अनिश्चितकालीन अभियानों का अमेरिकी सैन्यकर्मियों पर कितना दबाव पड़ रहा है।

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