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भारत के प्रदर्शनों पर अमेरिका की नजर: छह सांसदों ने रूबियो को लिखा पत्र; कहा- जयशंकर के सामने उठाएं मुद्दा

Sat, 17 Oct 2026 08:02 AM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 17 Oct 2026 08:02 AM IST
सार
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छह अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों ने मार्को रूबियो से भारत में सीजेपी और अन्य प्रदर्शनों के दौरान कथित बल प्रयोग तथा अमेरिका में निगरानी के आरोप उठाने को कहा है। भारत ने पहले भी ऐसे हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है।

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US Lawmakers Urge Marco Rubio to Question India Over handling Protests in Delhi
मार्को रूबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

भारत में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की निगरानी के आरोपों को लेकर अमेरिका के छह डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सांसदों ने रूबियो से अगले सप्ताह भारत दौरे के दौरान भारतीय अधिकारियों के सामने इन मुद्दों को उठाने का आग्रह किया है।

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इन सांसदों में प्रामिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया शामिल हैं। उन्होंने शुक्रवार को रूबियो को लिखे पत्र में दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित दमन, गलत तरीके से हिरासत में लेने और अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर चिंता जताई।

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सीजेपी प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन का जिक्र
सांसदों ने अपने पत्र में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया।
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पत्र में सांसदों ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार अमेरिका और भारत, दोनों की लोकतांत्रिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने रूबियो से भारतीय सरकार के सामने इन मुद्दों को उठाने का अनुरोध किया।

अमेरिकी सांसदों ने भारतीय राजनयिक मिशनों पर भी लगाए आरोप
छह सांसदों ने अमेरिका में भारतीय दूतावास और अन्य शहरों में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावासों पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए फोटोग्राफर तैनात करने का आरोप भी लगाया। उनका दावा है कि अमेरिका में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों पर नजर रखी गई और उन्हें डराने की कोशिश की गई। सांसदों ने रूबियो से इन आरोपों की गहन जांच कराने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के कारण भारतीय या अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन में हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई का मुद्दा उठाया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी सरकार से यह आकलन करने का आग्रह किया कि क्या भारत की ओर से अमेरिका में लोगों को डराने या परेशान करने की लगातार घटनाएं हुई हैं। सांसदों ने इस संदर्भ में अमेरिकी आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट के तहत भारत की हथियार खरीद से जुड़ी पात्रता की समीक्षा करने की भी मांग की।

प्रामिला जयपाल ने एसआईआर को लेकर भी जताई चिंता
पत्र में प्रामिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मसौदा मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जयपाल की टिप्पणियों की आलोचना की थी। उन्होंने उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में 'अस्वीकार्य हस्तक्षेप' करार दिया था।

भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी उठे सवाल
अमेरिकी सांसदों की मांग पर डेमोक्रेटिक नेता और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के सलाहकार रह चुके अजय जैन भूटोरिया ने जयपाल की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां अपनी अदालतें, स्वतंत्र प्रेस और 90 करोड़ से अधिक मतदाता हैं।

भूटोरिया ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस को भारत के आंतरिक मामलों पर उसे उपदेश नहीं देना चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह की टिप्पणियां भारत-अमेरिका की महत्वपूर्ण साझेदारी को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने अमेरिकी सांसदों को अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह भी दी।


आज भारत आएंगे मार्को रूबियो
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, मार्को रुबियो 17 से 22 अक्तूबर तक भारत और उज्बेकिस्तान के दौरे पर रहेंगे। भारत में वे मुंबई और जामनगर जाएंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात भारतीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से होगी। इस दौरान उनकी मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात प्रस्तावित है। अमेरिकी सांसदों ने इसी दौरे का हवाला देते हुए उनसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई, हिरासत और निगरानी के आरोपों को भारतीय पक्ष के सामने उठाने का आग्रह किया है।

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