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बड़ी कामयाबी: जम्मू-कश्मीर में आतंक मूसा का मारा जाना अहम सफलता, स्थायी शांति के लिए इसी आक्रामकता जरूरी

Thu, 01 Oct 2026 10:05 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Thu, 01 Oct 2026 10:05 AM IST
सार
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पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के आतंकवादी हाशिम मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक बड़ी कामयाबी है। हालांकि, पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए इसी आक्रामकता को दृढ़ता से जारी रखने की जरूरत है।

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Killing terrorist Musa in Jammu Kashmir significant  Success aggression essential for lasting peace
लश्कर आतंकी हाशिम मूसा ढेर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहे पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी हाशिम मूसा का मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में मंगलवार देर रात सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा जाना आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तो है ही, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-ताइबा के लिए भी बड़ा झटका है।

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बताया जा रहा है कि मूसा पाकिस्तानी सेना का पूर्व पैरा-कमांडो था और घुसपैठ के जरिये कश्मीर घाटी में दाखिल हुआ था। वह पिछले कई वर्षों से पीर पंजाल रेंज के दोनों ओर कई हमलों में शामिल होने की वजह से भी वांछित था।
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गौरतलब है कि सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त कार्रवाई में आतंकियों से मुठभेड़ हुई और जवाबी कार्रवाई में मूसा मारा गया। इस अभियान की अहमियत इसलिए भी है कि पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में आतंकियों के पूरे नेटवर्क को समझने व उसे तोड़ने पर जोर दिया और अंतत: सफलता भी पाई।
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हालांकि, सुरक्षा बलों की नजर काफी समय से घाटी में सक्रिय लश्कर के चार आतंकियों-जुनैद अहमद, अबू ताल्हा, यासिर नायक और हाशिम मूसा पर थी। इनमें से जुनैद अहमद को दिसंबर, 2024 में, अबू ताल्हा को अप्रैल, 2025 में और यासिर नायक को पिछले ही महीने सेना ने ढेर कर दिया था। उधमपुर और बडगाम जिलों में केवल सितंबर में ही करीब पांच आतंकी मारे जा चुके हैं। ये सफलताएं इस बात का संकेत हैं कि सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया सूचनाओं, स्थानीय नेटवर्क की पहचान और लगातार निगरानी के आधार पर आतंकियों तक पहुंचने की क्षमता बढ़ी है।

हालांकि, आतंकवाद का चरित्र ऐसा है कि एक आतंकी के मारे जाने के बाद कोई दूसरा उसकी जगह खड़ा हो जाता है। लिहाजा, अब भी सतर्क बने रहने की जरूरत है। हाशिम मूसा का अंत निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ अभियान में एक अहम पड़ाव है, लेकिन असली चुनौती उस तंत्र को कमजोर करने की है, जो ऐसे मूसा पैदा करता है और उन्हें भारत भेजता है।


आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लंबी है और इसमें कुछ मुठभेड़ों को निर्णायक मानने के बजाय लगातार, सटीक और समन्वित कार्रवाई की जरूरत है। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जिस तरह उसके संदिग्ध नेटवर्क तक पहुंच बनाई और उसके प्रमुख चेहरों को निशाना बनाया है, उसे आगे भी उसी दृढ़ता से जारी रखने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति तभी संभव है, जब आतंकियों के साथ-साथ उनकी घुसपैठ, प्रशिक्षण, वित्तपोषण और स्थानीय सहयोग की पूरी शृंखला को प्रभावी ढंग से तोड़ा जाए।

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