उत्तराखंड: पहली बार वसुंधरा ताल में लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, हाईटेक सेंसर से होगी झील की निगरानी
यह पहला वैज्ञानिक दल है, जो उत्तराखंड की किसी ग्लेशियल झील में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में गया है। अभियान 15 अक्तूबर 2026 तक प्रस्तावित है।
विस्तार
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित संवेदनशील वसुंधरा ताल पर सीबीआरआई द्वारा विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित हो गया है। इसके स्थापित होने से हिमनद झील के जलस्तर, मौसम, बर्फ और भू-गतिविधियों की निगरानी में मदद मिलेगी। इससे डाटा मिलना भी शुरू हो गया है।
वसुंधरा ताल प्रदेश में यह पहली हिमनद झील है, जिस पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगा है। इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए 15 दिन पहले टीम को भेजा गया था। इस टीम के लौटने के बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह उपकरण सीबीआरआई ने 61 लाख में तैयार किया है। अभी यह ट्रायल फेज में है, अगर सभी मानकों पर सिस्टम खरा उतरता है, तो उसे अन्य हिमनद झीलों पर भी लगाया जाएगा। सीबीआरआई निदेशक प्रो.आर प्रदीप कुमार और अभियान दल के सदस्यों ने अर्ली वार्निंग सिस्टम और अभियान की जानकारी को साझा किया। वसुंधरा ताल उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण वहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता नहीं है। इसलिए प्रणाली में इरिडियम उपग्रह संचार तकनीक का उपयोग किया गया है।
इसके माध्यम से सेंसरों से प्राप्त आंकड़े संबंधित डैशबोर्ड तक पहुंचाए जाएंगे। उपकरणों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए सौर पैनल और 10 दिन के बैकअप वाली 280 एम्पीयर की बैटरी की व्यवस्था की गई है। बताया गया कि वसुंधरा ताल की गहराई लगभग 38.50 मीटर, चौड़ाई 600 मीटर तथा लंबाई 900 मीटर है। इस दौरान वैज्ञानिक डॉ.डीपी कानूनगो, डॉ.एसके पाणीग्रही, डॉ.कौशिक पंडित, चंद्रभान पटेल, कांतिलाल सोलंकी, डॉ.राजेश कुमार दास, अजीत सिंह गहरवार, आदित्य भगत आदि उपस्थित रहे। अभियान में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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अत्याधुनिक सेंसर से होगी झील और आसपास के क्षेत्र की निगरानी
वसुंधरा ताल में स्थापित प्रणाली के अंतर्गत ऑल-इन-वन मौसम सेंसर लगाया गया है, जो हवा की गति एवं दिशा, वर्षा, सौर विकिरण, वायु तापमान और वायुदाब से संबंधित आंकड़े मापेगा। इसमें वाटर लेवल सेंसर और हिमस्खलन से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए एक्सेलेरोमीटर एवं टिल्ट सेंसर स्थापित किया है। इसके अतिरिक्त स्नो डेप्थ सेंसर और झील की गहराई के तापमान के लिए सात और सतह के तापमान की निगरानी के लिए एक सेंसर लगाया है।
हर दो घंटे में डैशबोर्ड पर पहुंचेगा डाटा
प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सेंसर सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक दो घंटे में आंकड़े सीबीआरआई रुड़की और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में स्थापित डैशबोर्ड पर भेजेगा। किसी भी आपातकालीन स्थिति में निर्धारित दो घंटे के अंतराल की प्रतीक्षा किए बिना सेंसर तत्काल आंकड़े भेज सकेंगे, जिससे संभावित असामान्य परिस्थितियों की समय रहते पहचान करने में सहायता मिलेगी।
आपदा प्रबंधन व्यवस्था को बना रहे अधिक प्रभावी : सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना के प्रथम चरण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य की आपदा पूर्व तैयारी को तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।