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Hindi News ›   Education ›   IIT Delhi to Develop AI Tool to Identify Landslide-Prone Areas and Assess Risks

पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा बताएगा एआई टूल: आईआईटी दिल्ली तैयार करेगा खास तकनीक; जानें कैसे करेगी काम?

Mon, 02 Nov 2026 10:05 AM IST
शिवम तिवारी ललित कौशिक
ललित कौशिक Published by: शिवम तिवारी Updated Mon, 02 Nov 2026 10:05 AM IST
सार
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आईआईटी दिल्ली पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा पहचानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल तैयार करेगा। डीआरडीओ की मदद से विकसित होने वाला यह प्लेटफॉर्म जोखिम वाले क्षेत्रों का नक्शा बनाएगा और आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। इससे प्रशासन को समय रहते सतर्कता बढ़ाने, लोगों को चेतावनी देने और राहत-बचाव की तैयारी करने में मदद मिलेगी। जानें यह तकनीक कैसे काम करेगी और इसके क्या फायदे होंगे।
 

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IIT Delhi to Develop AI Tool to Identify Landslide-Prone Areas and Assess Risks
IIT Delhi - फोटो : AI Generated

विस्तार

नई दिल्ली। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के खतरे का पता लगाने और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल की मदद ली जाएगी। इसके लिए आईआईटी दिल्ली एआई टूल तैयार करेगा। इस टूल से भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों का नक्शा बनाने और खतरे का आकलन करने में मदद मिलेगी।
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इससे प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते तैयारी करने और नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से वित्तपोषित इस परियोजना के तहत संस्थान में प्लेटफॉर्म स्थापित और संचालित किया जाएगा।
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टूल के डिजाइन और विकास के लिए आईआईटी दिल्ली ने उद्योगों और स्टार्टअप्स से प्रस्ताव मांगे हैं। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया गया है। इस परियोजना में आईआईटी दिल्ली प्रमुख अन्वेषक के तौर पर मुख्य संस्थान होगा। वहीं, चुने गए उद्योग या स्टार्टअप तकनीक के विकास और उसे लागू करने वाले भागीदार के रूप में सह-प्रमुख अन्वेषक की भूमिका निभाएंगे।
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नक्शा और डैशबोर्ड होगा तैयार

इस प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग आंकड़ों और एआई मॉडल से मिली जानकारी को एक साथ देखा और समझा जा सकेगा। इसके लिए इंटरैक्टिव नक्शे और डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे। उपयोगकर्ता इनकी मदद से खतरे वाले क्षेत्रों की जानकारी देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार रिपोर्ट भी निकाल सकेंगे। साथ ही, टूल में आंकड़ों के विश्लेषण की प्रक्रिया पर नजर रखने की सुविधा भी होगी। इससे काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने और नतीजों को समझने में आसानी होगी।

आपदा प्रबंधन में मिलेगी मदद

भूस्खलन का खतरा कई कारणों पर निर्भर करता है। इनमें पहाड़ की ढलान, जमीन की बनावट और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति शामिल हैं। प्रस्तावित टूल इनसे जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करके उन इलाकों की पहचान करने में मदद करेगा, जहां भूस्खलन की आशंका अधिक है। इससे प्रशासन को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, लोगों को सतर्क करने और बचाव के इंतजाम करने की जरूरत है। जोखिम वाले इलाकों की जानकारी मिलने से राहत और बचाव कार्यों की योजना बनाने में भी आसानी होगी।
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