फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Supreme Court Task Force Survey: 9% Students Reported Suicidal Thoughts

रिपोर्ट: छात्र आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स का सर्वे, नौ% विद्यार्थियों को आए आत्महत्या के विचार

Tue, 29 Sep 2026 01:12 PM IST
पीटीआई Published by: शाहीन परवीन Updated Tue, 29 Sep 2026 01:12 PM IST
सार
Register For Event

सुप्रीम कोर्ट की बनाई टास्क फोर्स के देशव्यापी सर्वे में छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। सर्वे में 9 फीसदी छात्रों ने आत्महत्या के विचार आने की बात कही।

विज्ञापन
Supreme Court Task Force Survey: 9% Students Reported Suicidal Thoughts
छात्र आत्महत्या - फोटो : AI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की ओर से छात्रों की आत्महत्याओं की जांच के लिए बनाई गई पैनल की देशभर में कराई गई स्टडी में सामने आया कि उच्च शिक्षा संस्थानों के करीब 15 फीसदी छात्रों ने पिछले छह महीनों में ऐसा समय देखा, जब वे बहुत ज्यादा तनाव या परेशानी में थे। वहीं, 9 फीसदी छात्रों ने आत्महत्या के विचार आने की बात कही।

विज्ञापन

31 अक्तूबर तक आ सकती है टास्क फोर्स की रिपोर्ट

पीटीआई को मिले सर्वे के नतीजों को राष्ट्रीय कार्य बल (NTF) की अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है। यह कार्य बल उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए बनाया गया है। इसकी अंतिम रिपोर्ट 31 अक्तूबर तक पेश किए जाने की संभावना है।

विज्ञापन


आईआईटी दिल्ली और आईआईटी बॉम्बे में दो छात्रों की मौत के बाद छात्र आत्महत्याओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इन घटनाओं के बाद इस मुद्दे पर व्यापक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों ने लिया हिस्सा

सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमिटी ने इस साल की शुरुआत में एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि कई छात्रों को उच्च शिक्षा के दौरान सामाजिक और जातिगत भेदभाव, यौन उत्पीड़न, जेंडर के आधार पर भेदभाव, भाषा की परेशानी और फैकल्टी की ओर से भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में एडमिशन, ग्रेडिंग और अकादमिक मदद में भी भेदभाव की शिकायतों का जिक्र किया गया था।


एनटीएफ के स्टूडेंट सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें 67 फीसदी छात्र एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से थे। सर्वे में करीब 34 फीसदी छात्रों ने बताया कि उन्होंने कैंपस में किसी न किसी स्तर पर खुद को बाहरी महसूस किया।

"लगभग 15 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने पिछले छह महीनों में ऐसे समय को याद किया जब वे बहुत ज़्यादा परेशान या तनाव में थे, या लगातार कई हफ़्तों तक उदास या एंग्जायटी महसूस कर रहे थे। नौ प्रतिशत ने बताया कि पिछले साल उन्हें अक्सर या बहुत ज़्यादा बार आत्महत्या के विचार आए।"

सर्वे में पाया गया कि "56 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उन्हें प्रशासन पर भरोसा है कि वह गंभीर मामलों को निष्पक्ष रूप से संभालेगा, जबकि लगभग 32 प्रतिशत ने कहा कि उनके संस्थान में काउंसलिंग की सुविधा नहीं है।"

अधिकारियों के अनुसार, पढ़ाई से जुड़े विकल्पों और नौकरी को लेकर लगातार चिंताएं आम थीं।

सर्वे के नतीजे अभी शुरुआती, आगे और विश्लेषण होगा

एक वरिष्ठ अधिकारी ने PTI को बताया, "ओपन-टेक्स्ट फील्ड सहित कई अन्य सवालों के जवाबों का अभी भी विश्लेषण किया जा रहा है। इसके अलावा, मौजूदा सैंपल के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व न होने के कारण, इन नतीजों को शुरुआती और अस्थायी माना जाना चाहिए।"
 
अधिकारी के मुताबिक, सामने आए रुझानों से छात्रों के लिए एक बेहतर सपोर्ट सिस्टम बनाने, फैकल्टी की ट्रेनिंग, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्टिग्मा को कम करने और संकट की स्थिति से निपटने के लिए तय प्रक्रिया बनाने की जरूरत सामने आती है। इसके साथ ही छात्रों की मानसिक सेहत पर नियमित नजर रखने और संस्थानों में जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है। 

छात्रों के सर्वे के अलावा, NTF ने संस्थानों का दौरा किया और स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ बातचीत की।

छात्रों ने पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और फैकल्टी से जुड़ी समस्याएं बताईं

 

  • अब तक दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम और पश्चिम बंगाल में 19 तरह के संस्थानों और विषयों से जुड़े कुल 30 बैठकें आयोजित की गई हैं।
  • कम संस्थानों का दौरा होने के कारण इसे प्रतिनिधि नमूना (रिप्रेजेंटेटिव सैंपल) नहीं माना जा सकता।
  • अधिकांश छात्रों ने पढ़ाई, सामाजिक जीवन, मानसिक स्वास्थ्य, फैकल्टी और प्रशासन से जुड़ी चिंताओं पर खुलकर अपनी बात रखी।
  • छात्रों ने सख्त अटेंडेंस पॉलिसी को एक बड़ी समस्या बताया।
  • मेडिकल और संबद्ध पाठ्यक्रमों में कठिन शेड्यूल तथा पढ़ाई और क्लिनिकल कार्य के अत्यधिक बोझ की शिकायत की गई।
  • मेडिकल छात्रों ने अपनी क्षमता से कहीं अधिक समय तक ‘ऑन-कॉल’ ड्यूटी करने की बात कही।
  • इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिलेटिव ग्रेडिंग और प्लेसमेंट के कड़े नियमों के कारण अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की समस्या सामने आई।
  • राज्य विश्वविद्यालयों में फैकल्टी की कमी के कारण छात्रों को पर्याप्त शैक्षणिक सहायता नहीं मिल पाने की शिकायत की गई।
  • डेंटल, नर्सिंग और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के छात्रों ने प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की कमी का मुद्दा उठाया।
  • छात्रों का कहना था कि पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण न मिलने से वे वास्तविक कार्यक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते।
  • कुछ शोधार्थियों ने पीएचडी सुपरवाइजरों द्वारा पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिलने की शिकायत की।
  • कुछ छात्रों ने पीएचडी सुपरवाइजरों पर अत्यधिक नियंत्रण और शोषण करने के आरोप भी लगाए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मार्च में NTF का गठन किया था। इसका मकसद छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों से निपटना और देश भर के HEI में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भलाई से जुड़ी चिंताओं की जांच करना था।

इस टास्क फोर्स के प्रमुख जस्टिस एस. रवींद्र भट हैं। इसमें मानसिक स्वास्थ्य, महिला अध्ययन और दिव्यांगों से जुड़े क्षेत्र के कई विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें मशहूर साइकियाट्रिस्ट आलोक सरीन, सेंटर फॉर विमेंस डेवलपमेंट स्टडीज की पूर्व डायरेक्टर मैरी ई. जॉन, नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अरमान अली, अमन सत्य कचरू ट्रस्ट के फाउंडर राजेंद्र कचरू और NIMHANS की क्लिनिकल साइकोलॉजी प्रोफेसर सीमा मेहरोत्रा शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed