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Ambala News: सोसायटी ने एफडी का नहीं किया भुगतान, अब ब्याज सहित देने होंगे पांच लाख
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पानीपत। समय पूरा होने पर भी पांच लाख रुपये की एफडी का भुगतान न करना ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग ने सोसायटी को पांच लाख रुपये का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज के साथ करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने 11 हजार रुपये मानसिक परेशानी और 5500 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने निर्देश दिए।
आशोक विहार के सुखपाल ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने समालखा स्थित सोसायटी की शाखा में 26 मार्च 2019 को दो लाख रुपये की एफडी कराई थी। इसकी अवधि 60 महीने थी और परिपक्वता राशि चार लाख रुपये तय थी। इसके अगले दिन 27 मार्च 2019 को उन्होंने 50 हजार रुपये की दूसरी एफडी कराई, जिसकी परिपक्वता राशि एक लाख रुपये थी। दोनों एफडी की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें कुल पांच लाख रुपये मिलने थे।
मार्च 2024 में परिपक्वता नजदीक आने पर उसने सोसायटी से संपर्क किया। अधिकारियों ने एक सप्ताह में भुगतान का भरोसा दिया, लेकिन रकम नहीं मिली। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद 30 जुलाई 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जिसके बाद वह उपभोक्ता आयोग में पहुंचे और सोसायटी के खिलाफ याचिका दाखिल की।
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने मामले की सुनवाई की। जिसमें सोसायटी के एक पक्ष ने शिकायत का विरोध करते हुए एफडी और भुगतान संबंधी जिम्मेदारी से इंकार किया। वहीं दूसरा पक्ष आयोग के सामने पेश ही नहीं हुआ। आयोग ने एफडी प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर माना कि शिकायतकर्ता ने सोसायटी में रकम जमा की थी और परिपक्वता के बाद भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए।
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आशोक विहार के सुखपाल ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने समालखा स्थित सोसायटी की शाखा में 26 मार्च 2019 को दो लाख रुपये की एफडी कराई थी। इसकी अवधि 60 महीने थी और परिपक्वता राशि चार लाख रुपये तय थी। इसके अगले दिन 27 मार्च 2019 को उन्होंने 50 हजार रुपये की दूसरी एफडी कराई, जिसकी परिपक्वता राशि एक लाख रुपये थी। दोनों एफडी की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें कुल पांच लाख रुपये मिलने थे।
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मार्च 2024 में परिपक्वता नजदीक आने पर उसने सोसायटी से संपर्क किया। अधिकारियों ने एक सप्ताह में भुगतान का भरोसा दिया, लेकिन रकम नहीं मिली। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद 30 जुलाई 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जिसके बाद वह उपभोक्ता आयोग में पहुंचे और सोसायटी के खिलाफ याचिका दाखिल की।
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने मामले की सुनवाई की। जिसमें सोसायटी के एक पक्ष ने शिकायत का विरोध करते हुए एफडी और भुगतान संबंधी जिम्मेदारी से इंकार किया। वहीं दूसरा पक्ष आयोग के सामने पेश ही नहीं हुआ। आयोग ने एफडी प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर माना कि शिकायतकर्ता ने सोसायटी में रकम जमा की थी और परिपक्वता के बाद भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए।