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Ambala News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में गूंजेगी तेलंगाना की संस्कृति
Fri, 21 Aug 2026 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 21 Aug 2026 02:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विविधता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) ने एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत हरियाणा के स्कूलों को तेलंगाना राज्य के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जोड़ा गया है।
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से जारी आदेशों में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए महीने के अनुसार और कक्षा-वार गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है। अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि हर महीने की गतिविधियां तय समय पर पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएं।
कक्षा-वार गतिविधियां
प्राइमरी से लेकर उच्च कक्षाओं तक के विद्यार्थियों के लिए बोनालू उत्सव, तेलंगाना की वेशभूषा, ऐतिहासिक स्थल, और बथुकम्मा उत्सव से जुड़े प्रोजेक्ट, पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिताएं तय की गई हैं। स्कूलों को हर महीने की 20 तारीख तक गतिविधियां पूरी करनी होंगी और 25 तारीख तक अनिवार्य रूप से फोटोग्राफ व पीपीटी ईमेल आईडी पर भेजनी होगी।
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निगरानी का जिम्मा
ब्लॉक संसाधन व्यक्तियों (बीआरपी) और सहायक ब्लॉक संसाधन समन्वयकों (एबीआरसी) को जमीनी स्तर पर इन गतिविधियों के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अगस्त की प्रस्तावित गतिविधियां
कक्षा 1 से 5 के छात्रों को ड्राइंग शीट पर हिंदी और तेलुगु में फलों व सब्जियों के नाम लिखने होंगे। इसी प्रकार
कक्षा 6 से 8 के तहत तेलंगाना के संगीतकारों के नाम और पीपीटी पर एक गाना तय किया गया है। वहीं कक्षा 9 से 12 के छात्रों को तेलंगाना में बोनालू उत्सव मनाने की शैली पर वीडियो निर्माण करना होगा।
सितंबर (वेशभूषा संस्कृति):
कक्षा 1-5 के तहत विभिन्न तरीकों से कक्षा कक्ष में शिक्षकों द्वारा तेलंगाना की पसंदीदा वेशभूषा का प्रदर्शन, कक्षा 6-8 के तहत प्रार्थना सभा में हरियाणा और तेलंगाना की वेशभूषा पहनकर दोनों के बीच का अंतर दिखाना और कक्षा 9 से 12 के तहत हरियाणा और तेलंगाना में महिला व पुरुष वेशभूषा की समानता पर वीडियो निर्माण करना होगा।
अक्तूबर (पेरला पांडुगा)
कक्षा 1-5 के लिए हिंदी और तेलुगु में गिनती की भाषण प्रतियोगिता, कक्षा 6-8 के लिए हैदराबाद के 10 ऐतिहासिक स्थलों पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन होगी।
नवंबर (दुकान/दशहरा)
कक्षा 6-8 के लिए हरियाणा और तेलंगाना में दशहरा मनाने की परंपरा पर प्रार्थना सभा में चर्चा की जाएगी
दिसंबर (दीपावली):
कक्षा 1-5 के लिए कमरे की सजावट के साथ दीपावली का उत्सव और कक्षा 6-8 के लिए रंगोली और कक्षा सज्जा के साथ हरियाणा में दीपावली का जश्न मनाने का निर्धारण किया गया है।
जनवरी (संक्रांति / पेड्डा पांडुगा)
कक्षा 6-8 के लिए हरियाणा व तेलंगाना में संक्रांति/पेद्दा पांडुगा और भोगी महोत्सव मनाने की रीति, खान-पान व पहनावे पर चर्चा की जाएगी।
फरवरी (बथुकम्मा उत्सव)
कक्षा 1-5 के तहत हिंदी और तेलुगु में 10 फूलों के नाम सीखना, कक्षा 9-12 के लिए तेलंगाना में बथुकम्मा उत्सव पर पीपीटी और वीडियो निर्माण करना होगा।
मार्च (विशेष प्रार्थना सभा - तेलंगाना)
कक्षा 1-5 के तहत भारत में राज्यों की संख्या और तेलंगाना के पड़ोसी राज्यों की जानकारी और कक्षा 9 से 12 के तहत तेलंगाना के राज्योत्सवों, खान-पान, पहनावे, संस्कृति और संगीत आदि पर विस्तृत पीपीटी और वीडियो का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
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एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत वार्षिक गतिविधि कैलेंडर जारी हो गया है। सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ नौनिहाल देश की सांस्कृतिक विविधता को भी जान सकेंगे। -ज्योति सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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अंबाला। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विविधता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) ने एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत हरियाणा के स्कूलों को तेलंगाना राज्य के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जोड़ा गया है।
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से जारी आदेशों में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए महीने के अनुसार और कक्षा-वार गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है। अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि हर महीने की गतिविधियां तय समय पर पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएं।
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कक्षा-वार गतिविधियां
प्राइमरी से लेकर उच्च कक्षाओं तक के विद्यार्थियों के लिए बोनालू उत्सव, तेलंगाना की वेशभूषा, ऐतिहासिक स्थल, और बथुकम्मा उत्सव से जुड़े प्रोजेक्ट, पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिताएं तय की गई हैं। स्कूलों को हर महीने की 20 तारीख तक गतिविधियां पूरी करनी होंगी और 25 तारीख तक अनिवार्य रूप से फोटोग्राफ व पीपीटी ईमेल आईडी पर भेजनी होगी।
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ब्लॉक संसाधन व्यक्तियों (बीआरपी) और सहायक ब्लॉक संसाधन समन्वयकों (एबीआरसी) को जमीनी स्तर पर इन गतिविधियों के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अगस्त की प्रस्तावित गतिविधियां
कक्षा 1 से 5 के छात्रों को ड्राइंग शीट पर हिंदी और तेलुगु में फलों व सब्जियों के नाम लिखने होंगे। इसी प्रकार
कक्षा 6 से 8 के तहत तेलंगाना के संगीतकारों के नाम और पीपीटी पर एक गाना तय किया गया है। वहीं कक्षा 9 से 12 के छात्रों को तेलंगाना में बोनालू उत्सव मनाने की शैली पर वीडियो निर्माण करना होगा।
सितंबर (वेशभूषा संस्कृति):
कक्षा 1-5 के तहत विभिन्न तरीकों से कक्षा कक्ष में शिक्षकों द्वारा तेलंगाना की पसंदीदा वेशभूषा का प्रदर्शन, कक्षा 6-8 के तहत प्रार्थना सभा में हरियाणा और तेलंगाना की वेशभूषा पहनकर दोनों के बीच का अंतर दिखाना और कक्षा 9 से 12 के तहत हरियाणा और तेलंगाना में महिला व पुरुष वेशभूषा की समानता पर वीडियो निर्माण करना होगा।
अक्तूबर (पेरला पांडुगा)
कक्षा 1-5 के लिए हिंदी और तेलुगु में गिनती की भाषण प्रतियोगिता, कक्षा 6-8 के लिए हैदराबाद के 10 ऐतिहासिक स्थलों पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन होगी।
नवंबर (दुकान/दशहरा)
कक्षा 6-8 के लिए हरियाणा और तेलंगाना में दशहरा मनाने की परंपरा पर प्रार्थना सभा में चर्चा की जाएगी
दिसंबर (दीपावली):
कक्षा 1-5 के लिए कमरे की सजावट के साथ दीपावली का उत्सव और कक्षा 6-8 के लिए रंगोली और कक्षा सज्जा के साथ हरियाणा में दीपावली का जश्न मनाने का निर्धारण किया गया है।
जनवरी (संक्रांति / पेड्डा पांडुगा)
कक्षा 6-8 के लिए हरियाणा व तेलंगाना में संक्रांति/पेद्दा पांडुगा और भोगी महोत्सव मनाने की रीति, खान-पान व पहनावे पर चर्चा की जाएगी।
फरवरी (बथुकम्मा उत्सव)
कक्षा 1-5 के तहत हिंदी और तेलुगु में 10 फूलों के नाम सीखना, कक्षा 9-12 के लिए तेलंगाना में बथुकम्मा उत्सव पर पीपीटी और वीडियो निर्माण करना होगा।
मार्च (विशेष प्रार्थना सभा - तेलंगाना)
कक्षा 1-5 के तहत भारत में राज्यों की संख्या और तेलंगाना के पड़ोसी राज्यों की जानकारी और कक्षा 9 से 12 के तहत तेलंगाना के राज्योत्सवों, खान-पान, पहनावे, संस्कृति और संगीत आदि पर विस्तृत पीपीटी और वीडियो का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत वार्षिक गतिविधि कैलेंडर जारी हो गया है। सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ नौनिहाल देश की सांस्कृतिक विविधता को भी जान सकेंगे। -ज्योति सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।