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Kaithal News: नई बसों के लिए डिपो को अक्तूबर तक करना होगा इंतजार
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बस अड्डा पर बसों के इंतजार में यात्री। संवाद
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कैथल। रोडवेज डिपो को नई बसों के लिए अभी अक्तूबर माह तक इंतजार करना पड़ेगा। डिपो को अगस्त में 10 नई बसें मिलने की उम्मीद थी लेकिन इनकी बॉडी अब तक तैयार नहीं हो पाई है। ऐसे में बसों की आपूर्ति अक्तूबर तक होने की संभावना है। नई बसों के आने में देरी से यात्रियों को फिलहाल बसों की कमी का सामना करना पड़ेगा।
डिपो से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्री रोडवेज बसों में सफर करते हैं। यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो को करीब 100 अतिरिक्त बसों की जरूरत है। वर्तमान में करीब 150 बसें ही उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत बेड़ा करीब 250 बसों का है। उपलब्ध बसों में पुरानी बसों की संख्या भी अधिक है जिससे इनके बार-बार खराब होने की समस्या बनी रहती है।
दोपहर बाद कई रूटों पर घट जाती हैं बसें
यात्री राजेंद्र, रामकुमार, राजेश और मनोज ने कहा कि बसों की कमी का असर दोपहर बाद विभिन्न रूटों पर अधिक दिखाई देता है। दिल्ली, जींद, कुरुक्षेत्र, असंध और करनाल जाने वाले यात्रियों को कई बार बस के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। बसों की संख्या कम होने से उपलब्ध बसों में भी यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। पुरानी बसों में तकनीकी खराबी आने पर स्थिति और मुश्किल हो जाती है। किसी बस के रूट से हटने पर उपलब्ध बसों की संख्या और कम हो जाती है। ऐसे में नई बसों के साथ अतिरिक्त बसों की भी आवश्यकता है।
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जल्द से जल्द डिपो में पहुंचे बसें : कृष्ण
चालक कृष्ण ने बताया कि डिपो में बसों की कमी बनी हुई है। डिपो में 70 से ज्यादा बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उनकी बार-बार वर्कशॉप में मरम्मत करवानी पड़ती है। ऐसे में जल्द डिपो में बसें भेजी जाएं, ताकि यात्रियों के साथ-साथ चालक व परिचालकों को भी राहत मिल सके।
नई बसें मिलने की चल रही है प्रक्रिया : अनिल
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि नई बसें मिलने की प्रक्रिया चल रही है। पहले उम्मीद थी कि अगस्त में 10 बसें डिपो को मिल जाएंगी लेकिन बसों की बॉडी अब तक तैयार नहीं हो पाई है। अब अक्तूबर तक बसें मिलने की संभावना है। नई बसों के आने से पुराने बेड़े पर निर्भरता कम होगी और यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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डिपो से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्री रोडवेज बसों में सफर करते हैं। यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो को करीब 100 अतिरिक्त बसों की जरूरत है। वर्तमान में करीब 150 बसें ही उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत बेड़ा करीब 250 बसों का है। उपलब्ध बसों में पुरानी बसों की संख्या भी अधिक है जिससे इनके बार-बार खराब होने की समस्या बनी रहती है।
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दोपहर बाद कई रूटों पर घट जाती हैं बसें
यात्री राजेंद्र, रामकुमार, राजेश और मनोज ने कहा कि बसों की कमी का असर दोपहर बाद विभिन्न रूटों पर अधिक दिखाई देता है। दिल्ली, जींद, कुरुक्षेत्र, असंध और करनाल जाने वाले यात्रियों को कई बार बस के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। बसों की संख्या कम होने से उपलब्ध बसों में भी यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। पुरानी बसों में तकनीकी खराबी आने पर स्थिति और मुश्किल हो जाती है। किसी बस के रूट से हटने पर उपलब्ध बसों की संख्या और कम हो जाती है। ऐसे में नई बसों के साथ अतिरिक्त बसों की भी आवश्यकता है।
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जल्द से जल्द डिपो में पहुंचे बसें : कृष्ण
चालक कृष्ण ने बताया कि डिपो में बसों की कमी बनी हुई है। डिपो में 70 से ज्यादा बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उनकी बार-बार वर्कशॉप में मरम्मत करवानी पड़ती है। ऐसे में जल्द डिपो में बसें भेजी जाएं, ताकि यात्रियों के साथ-साथ चालक व परिचालकों को भी राहत मिल सके।
नई बसें मिलने की चल रही है प्रक्रिया : अनिल
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि नई बसें मिलने की प्रक्रिया चल रही है। पहले उम्मीद थी कि अगस्त में 10 बसें डिपो को मिल जाएंगी लेकिन बसों की बॉडी अब तक तैयार नहीं हो पाई है। अब अक्तूबर तक बसें मिलने की संभावना है। नई बसों के आने से पुराने बेड़े पर निर्भरता कम होगी और यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

बस अड्डा पर बसों के इंतजार में यात्री। संवाद