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‘समझदार को इशारा काफी’: मनीष तिवारी ने आलोचना दबाने को बताया खतरनाक, कांग्रेस में किसे चेताया?
Fri, 21 Aug 2026 07:21 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 07:21 PM IST
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के ठीक अगले दिन मनीष तिवारी ने आलोचना दबाने पर ‘घातक’ स्थिति की चेतावनी क्यों दी? ‘समझदार को इशारा काफी’ कहकर उन्होंने आखिर किसे संदेश दिया? G-23 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर और पंजाब में नाराजगी तक, तिवारी का यह नया पोस्ट कांग्रेस के भीतर फिर कई सवाल खड़े कर रहा है।
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मनीष तिवारी, कांग्रेस सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के एक दिन बाद एक रहस्यमयी पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि आलोचना भले ही अच्छी न लगे, लेकिन वह जरूरी होती है। अगर आलोचना को दबा दिया जाए तो स्थिति घातक भी हो सकती है। तिवारी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का एक पुराना कथन साझा किया। इस पोस्ट के बाद उनके इशारे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। तिवारी ने अपने पोस्ट में खासतौर पर ‘Fatal’ यानी ‘घातक’ शब्द का जिक्र किया। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि उनका इशारा किसकी ओर है।
चर्चिल के कथन का दिया हवाला
मनीष तिवारी ने विंस्टन चर्चिल के 7 जनवरी 1939 के एक कथन को साझा किया। इसमें कहा गया है कि आलोचना भले ही पसंद न आए, लेकिन यह जरूरी है। चर्चिल के कथन के अनुसार, आलोचना मानव शरीर में दर्द की तरह काम करती है। दर्द शरीर में किसी अस्वस्थ स्थिति की ओर ध्यान दिलाता है। उसी तरह आलोचना भी किसी गलत या खराब होती स्थिति की चेतावनी देती है। कथन में आगे कहा गया है कि अगर समय रहते इस चेतावनी पर ध्यान दिया जाए तो खतरे को टाला जा सकता है। लेकिन अगर इसे दबा दिया जाए तो स्थिति घातक रूप ले सकती है।
पूछा गया तो बोले- समझदार को इशारा काफी
मनीष तिवारी से जब उनके पोस्ट का मतलब पूछा गया तो उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं कहा। उन्होंने केवल इतना कहा,'समझदार को इशारा काफी होता है।' उनके इस जवाब ने पोस्ट को लेकर सियासी चर्चा और तेज कर दी है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि यह पोस्ट कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के अगले ही दिन आया है।
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यह भी पढ़ें: ‘ये न्याय का पहला कदम’: पैलेट गन पीड़ित की FIR दर्ज होने पर बोले राहुल गांधी, धरने के बाद पुलिस ने मानी मांग
पहले भी पार्टी लाइन से अलग रहा है रुख
मनीष तिवारी तीन बार के सांसद हैं। वह कई मौकों पर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग राय रखते रहे हैं। वह G-23 समूह का भी हिस्सा रहे हैं। इस समूह के नेताओं ने अतीत में राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी मनीष तिवारी का रुख कांग्रेस की ओर से लिए गए रुख से अलग रहा था। उन्होंने सरकार का समर्थन किया था। सरकार ने ऑपरेशन के दौरान भारत का पक्ष रखने के लिए सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुना था। मनीष तिवारी भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। हालांकि, कांग्रेस ने उनके नाम की सिफारिश नहीं की थी।
पंजाब में नजरअंदाज किए जाने पर भी जताई थी नाराजगी
मनीष तिवारी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के फैसलों को लेकर भी नाराज नजर आए थे। सीमा से लगे राज्य पंजाब में चुनावी तैयारियों के बीच कुछ फैसलों में खुद को नजरअंदाज किए जाने पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई थी।
अब सीडब्ल्यूसी की बैठक के अगले ही दिन आया उनका यह पोस्ट कई सवाल खड़े कर रहा है। तिवारी ने सीधे किसी नेता या पार्टी का नाम नहीं लिया है। लेकिन ‘आलोचना’, ‘खतरा’ और खासतौर पर ‘घातक’ शब्द पर उनका जोर इस पोस्ट को महज सामान्य टिप्पणी नहीं रहने देता।
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चर्चिल के कथन का दिया हवाला
मनीष तिवारी ने विंस्टन चर्चिल के 7 जनवरी 1939 के एक कथन को साझा किया। इसमें कहा गया है कि आलोचना भले ही पसंद न आए, लेकिन यह जरूरी है। चर्चिल के कथन के अनुसार, आलोचना मानव शरीर में दर्द की तरह काम करती है। दर्द शरीर में किसी अस्वस्थ स्थिति की ओर ध्यान दिलाता है। उसी तरह आलोचना भी किसी गलत या खराब होती स्थिति की चेतावनी देती है। कथन में आगे कहा गया है कि अगर समय रहते इस चेतावनी पर ध्यान दिया जाए तो खतरे को टाला जा सकता है। लेकिन अगर इसे दबा दिया जाए तो स्थिति घातक रूप ले सकती है।
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पूछा गया तो बोले- समझदार को इशारा काफी
मनीष तिवारी से जब उनके पोस्ट का मतलब पूछा गया तो उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं कहा। उन्होंने केवल इतना कहा,'समझदार को इशारा काफी होता है।' उनके इस जवाब ने पोस्ट को लेकर सियासी चर्चा और तेज कर दी है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि यह पोस्ट कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के अगले ही दिन आया है।
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पहले भी पार्टी लाइन से अलग रहा है रुख
मनीष तिवारी तीन बार के सांसद हैं। वह कई मौकों पर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग राय रखते रहे हैं। वह G-23 समूह का भी हिस्सा रहे हैं। इस समूह के नेताओं ने अतीत में राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी मनीष तिवारी का रुख कांग्रेस की ओर से लिए गए रुख से अलग रहा था। उन्होंने सरकार का समर्थन किया था। सरकार ने ऑपरेशन के दौरान भारत का पक्ष रखने के लिए सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुना था। मनीष तिवारी भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। हालांकि, कांग्रेस ने उनके नाम की सिफारिश नहीं की थी।
पंजाब में नजरअंदाज किए जाने पर भी जताई थी नाराजगी
मनीष तिवारी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के फैसलों को लेकर भी नाराज नजर आए थे। सीमा से लगे राज्य पंजाब में चुनावी तैयारियों के बीच कुछ फैसलों में खुद को नजरअंदाज किए जाने पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई थी।
अब सीडब्ल्यूसी की बैठक के अगले ही दिन आया उनका यह पोस्ट कई सवाल खड़े कर रहा है। तिवारी ने सीधे किसी नेता या पार्टी का नाम नहीं लिया है। लेकिन ‘आलोचना’, ‘खतरा’ और खासतौर पर ‘घातक’ शब्द पर उनका जोर इस पोस्ट को महज सामान्य टिप्पणी नहीं रहने देता।