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मुंबई में थमे ऑटो-टैक्सी के पहिए: ड्राइवरों का दर्द- 60 की उम्र में कैसे सीखें मराठी, रोजी-रोटी पर आया संकट

Mon, 24 Aug 2026 03:00 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नवीन पारमुवाल Updated Mon, 24 Aug 2026 03:00 PM IST
सार
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मुंबई में मराठी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। ड्राइवरों का कहना है कि वे इस उम्र में नई भाषा कैसे सीखें और 15-20 हजार रुपये का भारी जुर्माना कैसे भरें।

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mumbai auto rickshaw taxi strike over marathi language directive for drivers protest heavy fines
मुंबई में ऑटो-टैक्सी की हड़ताल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mumbai Auto Rickshaw Strike: मुंबई की सड़कों पर आज लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक आज से तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल राज्य सरकार के उस आदेश के खिलाफ है जिसमें ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा बोलना अनिवार्य किया गया है। इस नियम का पालन न करने पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है, जिसका ड्राइवर पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
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क्या है ड्राइवरों का दर्द?
हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। एक ड्राइवर ने कहा, 'यह तीन दिवसीय ऑटो-रिक्शा हड़ताल है। हमारी कोई नहीं सुन रहा है। अगर आप 60 साल के व्यक्ति को अचानक मराठी बोलने के लिए कहेंगे, तो वे यह कैसे करेंगे? हम न्याय चाहते हैं।' एक अन्य ड्राइवर ने कहा, 'हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? हम टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उस पर भी विचार नहीं किया जा रहा है, इसके बजाय हम पर जुर्माना लगाया जा रहा है। क्या हम 15,000-20,000 रुपये का जुर्माना भर सकते हैं?'
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क्या है सरकार का नियम और क्यों हो रहा विवाद?
महाराष्ट्र में लंबे समय से स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की मांग होती रही है। सरकार का तर्क है कि ड्राइवरों को स्थानीय मराठी भाषा का ज्ञान होना चाहिए ताकि वे यात्रियों के साथ बेहतर संवाद कर सकें। पहले भी ऑटो-टैक्सी परमिट के लिए मराठी भाषा की जानकारी एक शर्त रही है, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं होता था। अब सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला किया है और नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया है। यह ही विवाद की मुख्य वजह बन गया है।
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सरकार का पक्ष और संजय निरुपम का हस्तक्षेप
इस मामले में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा, 'महाराष्ट्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि मुंबई और एमएमआर क्षेत्र के सभी ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। इसे 1 मई से लागू किया जाना था, लेकिन ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए समय दिया गया। 85% से अधिक ड्राइवरों ने मराठी का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लिया है। 12 अगस्त को एक महीने का अतिरिक्त विस्तार दिया गया था। हालांकि, आरटीओ अधिकारी ऑटो ड्राइवरों को परेशान कर रहे हैं। इसीलिए मैं इस मुद्दे को लेकर मंत्री प्रताप सरनाईक के पास आया हूं। उन्होंने कहा है कि अगर कोई अधिकारी सरकार के आदेश का उल्लंघन करता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'


यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें
इस हड़ताल के कारण मुंबई के लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोकल ट्रेनों और बसों में अतिरिक्त भीड़ देखी जा रही है। आफिस जाने वालों, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ड्राइवर यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता और उत्पीड़न बंद नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।
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