फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Pellet gun case to become a major headache for Delhi Police two DCPs under scrutiny RAF gets a clean chit

Pellet Gun: दिल्ली पुलिस के गले की फांस बनेगा पैलेट गन केस, रडार पर होंगे दो डीसीपी; आरएएफ को मिली क्लीन चिट

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 21 Aug 2026 07:04 PM IST
सार
Register For Event

सीजेपी के आंदोलन के दौरान साहिल लोचव की पैलेट गन से चोट के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह केस, दिल्ली पुलिस के लिए गले की फांस बन सकता है। वजह, केस की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस के दो डीसीपी रडार पर हैं। 

विज्ञापन
Pellet gun case to become a major headache for Delhi Police two DCPs under scrutiny RAF gets a clean chit
राहुल गांधी और शिकायतकर्ता साहिल। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली है। शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पैलेट गन से घायल एक युवक को लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। राहुल गांधी की मौजूदगी में दिल्ली पुलिस ने कई घंटे बाद केस दर्ज कर लिया। हालांकि इस एफआईआर में किसी का नाम नहीं है, अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह केस, दिल्ली पुलिस के लिए गले की फांस बन सकता है। वजह, केस की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस के दो डीसीपी रडार पर रहेंगे। इन्होंने ही आरएएफ को पैलेट गन एवं दूसरे फायर आर्म्स चलाने का अधिकार दिया था। 

विज्ञापन


जानकारों का कहना है कि जांच के लिहाज से यह एक जटिल केस बन सकता है, क्योंकि इसमें दिल्ली पुलिस के अलावा सीआरपीएफ की विशेष इकाई 'रेपिड एक्शन फोर्स' भी शामिल है। जांच करते समय यह बात भी ध्यान में रखनी है कि दिल्ली पुलिस जिस केंद्रीय बल को कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बुलाती है, वह उसकी तैनाती और कार्रवाई के लिए भी जिम्मेदार होती है। दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ व आरएएफ सहित दूसरे केंद्रीय बलों की कंपनियां जंतर मंतर और दूसरे इलाकों में तैनात की जाएं। 
विज्ञापन


नई दिल्ली जिला डीसीपी ने दिया था ये आदेश  
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर नई दिल्ली जिला डीसीपी सचिन शर्मा ने बतौर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सीआरपीएफ/आरएएफ के सहायक कमांडेंट दिलावर सिंह को लिखित में यह अधिकार दिया था कि वे गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित हुई भीड़ को तितर बितर करने के लिए गैस, लाठीचार्ज व फायर आर्म्स का प्रयोग कर सकते हैं। आरएएफ ने इसी अधिकार का पालन किया। प्रदर्शन के दौरान नाजुक स्थिति को संभालने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जोन-1 में नॉर्थ डीसीपी ने दिया था आदेश 
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में उग्र हुई भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर पैलेट गन चलाई गई थी। आरएएफ ने उनके आदेश के बाद पैलेट गन के कई शेल दागे। पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड, दंगारोधी गन (2 बीसी) और प्लास्टिक पैलेट का भी इस्तेमाल किया गया। यह खुलासा दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज में हुआ है। 20 जुलाई की घटना के समय आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट सतीश सांगवान ड्यूटी पर थे। वे बी-208 यूनिट की कमान संभाल रहे थे। उन्होंने डीओ रूम में बताया कि वे जोन-1 में तत्कालीन नॉर्थ डीसीपी राजा बांठिया के साथ ड्यूटी पर थे। उनके आदेश पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगारोधी उपायों का इस्तेमाल किया गया। अन्य उपकरणों के साथ एंटी-रायट गन (एआरजी) का भी प्रयोग किया गया। यह गन कम जानलेवा हथियारों की श्रेणी में आती है और सावधानीपूर्वक इस्तेमाल किए जाने पर इसे जानलेवा नहीं माना जाता।


सीआरपीएफ डीजी ने थपथपाई आरएएफ जवानों की पीठ 
पैलेट गन के इस्तेमाल पर मचे सियासी संग्राम के बीच सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह, बाकायदा आरएएफ की वर्दी पहनकर जवानों से मिले थे। उन्होंने जवानों को भरोसा दिया था कि वे अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करें, बाकी मैं संभाल लूंगा। इसके बाद आरएएफ के उन जवानों ने राहत की सांस ली, जो पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद विभागीय कार्रवाई से डर रहे थे। हालांकि इससे पहले आरएएफ की आईजी सीमा ढूंढियाल ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, दिल्ली में तैनाती के दौरान परिस्थितियों का विश्लेषण किया गया है। आगामी आदेशों तक पैलेट गन, दंगारोधी गन, बिजली का झटका देने वाला उपकरण और इलेक्ट्रिक शील्ड का उपयोग नहीं होगा। आरएएफ जवानों को ये उपकरण जारी नहीं किए जाएंगे। दूसरी तरफ सीआरपीएफ मुख्यालय में इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि आरएएफ ने नियमों एवं तय प्रोटोकॉल के आधार पर दंगारोधी कार्रवाई की है। जवानों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं बनती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed