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कश्मीर की सियासत में भूचाल: नेकां में बढ़ी दरार, रुहुल्ला ने पार्टी को कहा अलविदा, अब किस ओर होगा सियासी रुख?

Tue, 03 Nov 2026 02:54 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, बडगाम
अमर उजाला नेटवर्क, बडगाम Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 03 Nov 2026 02:54 PM IST
सार
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आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने बडगाम में समर्थकों की मौजूदगी में नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने का एलान करते हुए कहा कि अब वह पार्टी से आजाद हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा।

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Massive crowd turns out in Budgam in support of Ruhullah
रुहुल्ला मेहदी - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

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सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने समर्थकों की भारी मौजूदगी के बीच मंच से जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने का एलान कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह अब पार्टी का हिस्सा नहीं हैं और खुद को नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग कर रहे हैं।

रुहुल्ला ने सभा में पहुंचे लोगों का आभार जताते हुए कहा, 'मैं आप सबका शुक्रगुजार हूं कि आप यहां आए। यहां कुर्सी संभालनी नहीं, बल्कि कुर्सी से उतरना था। उन्होंने कहा कि दोपहर 2:40 बजे तक वह नेशनल कॉन्फ्रेंस का हिस्सा थे, लेकिन अब वह खुद को पार्टी से आजाद करते हैं।

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इस एलान के बाद सभा में मौजूद समर्थकों ने नारेबाजी की। लोगों ने 'टाइगर-टाइगर, रुहुल्ला टाइगर' के नारे लगाकर उनके प्रति समर्थन जताया।

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रुहुल्ला ने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा और उनसे कहा कि वह इसे अपने हाथों से संबंधित लोगों तक पहुंचाएं। अशरफ मट्टू के बेटे तुफैल मट्टू की वर्ष 2010 में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में पुलिस फायरिंग के दौरान मौत हो गई थी।

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रुहुल्ला के समर्थन में नौ साल का एक बच्चा भी हाथ में तख्ती लेकर पहुंचा। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले दायम रजा की तख्ती पर उर्दू में लिखा था, 'वादा कुर्सी से बड़ा है।' वह अपने पिता और दादा के साथ श्रीनगर के हरवान इलाके से यहां पहुंचा था। बच्चे ने रुहुल्ला को ईमानदार और अच्छा नेता बताते हुए उनके समर्थन की बात कही। उसके दादा मोहम्मद रफीक ने कहा कि रुहुल्ला जनता की आवाज उठाते हैं और सच बोलने का साहस रखते हैं।

सभा में पहुंचे लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर चुनाव के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। समर्थकों का कहना था कि पार्टी ने अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर जनता से वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मागाम निवासी मोहम्मद शफी ने कहा कि पार्टी ने पिछले एक साल में लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली और एक लाख नौकरियों के वादे पूरे नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। वहीं, उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सोनावारी से पहुंचे हयात हुसैन ने कहा कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में रुहुल्ला ने पार्टी के लिए खूब प्रचार किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी ने उनके योगदान और जनता की उम्मीदों को नजरअंदाज किया।

समर्थकों का कहना है कि रुहुल्ला ने यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। उनके लिए पद और सत्ता से ज्यादा जनता का भरोसा और उनके मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। लोगों ने उम्मीद जताई कि सच और जनता के अधिकारों की लड़ाई में वे रुहुल्ला के साथ खड़े रहेंगे।

3 नवंबर की तारीख रुहुल्ला और उनके परिवार के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। इसी दिन वर्ष 2000 में उनके पिता आगा सैयद मेहदी की आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई थी। उनकी बरसी के मौके पर आयोजित इस सभा में रुहुल्ला के इस्तीफे को लेकर समर्थकों में खासा उत्साह और राजनीतिक माहौल में गर्माहट देखने को मिली।

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