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भोपाल का 90 डिग्री वाला विवादित ब्रिज: शुरू हुआ तो डेढ़ लाख लोगों का चक्कर बचेगा, रोज 3 लाख आवाजाही को राहत
Mon, 24 Aug 2026 03:00 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 24 Aug 2026 03:00 PM IST
भोपाल का विवादित 90 डिग्री ऐशबाग आरओबी सुधार के बाद दिसंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। मोड़ का घेरा बढ़ने और कैरिजवे चौड़ा होने से ब्रिज पर आवाजाही ज्यादा सुरक्षित और आसान होगी। ऐशबाग, महामाई का बाग, पुष्पा नगर समेत आसपास की करीब डेढ़ लाख आबादी को सीधा फायदा मिलेगा, जबकि रोजाना करीब 3 लाख लोगों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
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ऐशबाग का चर्चित 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऐशबाग का चर्चित 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज अब सुधार के बाद लोगों के लिए खुलने की दिशा में बढ़ रहा है। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की संशोधित डिजाइन के अनुसार मोड़ का घेरा बढ़ाने और वाहन चलने वाले हिस्से को चौड़ा करने का काम शुरू हो चुका है। करीब एक करोड़ रुपए के सुधार कार्य को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
ऐशबाग से पुष्पा नगर तक सीधा फायदा
ब्रिज शुरू होने के बाद ऐशबाग, महामाई का बाग, पुष्पा नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। रेलवे लाइन के कारण जिन रास्तों पर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, वहां सीधा संपर्क उपलब्ध होगा। आसपास की करीब डेढ़ लाख आबादी को इससे सीधा फायदा मिलने का अनुमान है।
रोज 3 लाख आवाजाही को राहत
निर्माण के समय सरकारी स्तर पर इस आरओबी से करीब 3 लाख लोगों की रोजाना आवाजाही को राहत मिलने का दावा किया गया था। यह संख्या सीधे लाभार्थियों की नहीं, बल्कि संभावित दैनिक आवागमन से जुड़ा अनुमान है। ब्रिज शुरू होने पर पुराने भोपाल और नए शहर के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
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रेलवे फाटक पर रुकना नहीं पड़ेगा
आरओबी शुरू होने के बाद वाहन चालकों को रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय बचेगा और ऐशबाग क्षेत्र में यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें-खंडेलवाल की पहली कार्यसमिति बैठक 30-31 अगस्त को, ओरछा में मिशन-2028 की रणनीति पर होगा मंथन
अब 90 डिग्री मोड़ होगा ज्यादा आसान
ब्रिज की सबसे बड़ी समस्या उसका लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ रहा है। अब संशोधित डिजाइन में इनर और आउटर रेडियस को 2 से 2.5 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। मोड़ के प्रवेश और निकास हिस्से में कैरिजवे भी करीब 3 से 3.5 फीट चौड़ा किया जाएगा। अतिरिक्त स्लैब का भार संभालने के लिए नया पियर, लंबा पियर कैप और 1200 मिलीमीटर व्यास की पाइल फाउंडेशन बनाई जाएगी। रेलवे ट्रैक और बिजली की ऊपरी लाइन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें-एमपी पर मानसूनी सिस्टम मेहरबान: 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, 27 अगस्त तक थमेगा नहीं दौर
दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
मोड़ सुधारने के लिए रेलवे और लोक निर्माण विभाग के बीच करीब 10 महीने तक बैठकें चलीं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की नई डिजाइन पर सहमति बनने के बाद अब मौके पर काम शुरू हो चुका है। निर्माण एजेंसी को ही सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। ब्रिज शुरू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा ऐशबाग-पुष्पा नगर क्षेत्र के लोगों को होगा। इसके साथ ही पुराने और नए भोपाल के बीच संपर्क सुधरेगा, रेलवे क्रॉसिंग पर इंतजार खत्म होगा और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
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ऐशबाग से पुष्पा नगर तक सीधा फायदा
ब्रिज शुरू होने के बाद ऐशबाग, महामाई का बाग, पुष्पा नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। रेलवे लाइन के कारण जिन रास्तों पर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, वहां सीधा संपर्क उपलब्ध होगा। आसपास की करीब डेढ़ लाख आबादी को इससे सीधा फायदा मिलने का अनुमान है।
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रोज 3 लाख आवाजाही को राहत
निर्माण के समय सरकारी स्तर पर इस आरओबी से करीब 3 लाख लोगों की रोजाना आवाजाही को राहत मिलने का दावा किया गया था। यह संख्या सीधे लाभार्थियों की नहीं, बल्कि संभावित दैनिक आवागमन से जुड़ा अनुमान है। ब्रिज शुरू होने पर पुराने भोपाल और नए शहर के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
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रेलवे फाटक पर रुकना नहीं पड़ेगा
आरओबी शुरू होने के बाद वाहन चालकों को रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय बचेगा और ऐशबाग क्षेत्र में यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
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अब 90 डिग्री मोड़ होगा ज्यादा आसान
ब्रिज की सबसे बड़ी समस्या उसका लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ रहा है। अब संशोधित डिजाइन में इनर और आउटर रेडियस को 2 से 2.5 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। मोड़ के प्रवेश और निकास हिस्से में कैरिजवे भी करीब 3 से 3.5 फीट चौड़ा किया जाएगा। अतिरिक्त स्लैब का भार संभालने के लिए नया पियर, लंबा पियर कैप और 1200 मिलीमीटर व्यास की पाइल फाउंडेशन बनाई जाएगी। रेलवे ट्रैक और बिजली की ऊपरी लाइन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है।
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दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
मोड़ सुधारने के लिए रेलवे और लोक निर्माण विभाग के बीच करीब 10 महीने तक बैठकें चलीं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की नई डिजाइन पर सहमति बनने के बाद अब मौके पर काम शुरू हो चुका है। निर्माण एजेंसी को ही सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। ब्रिज शुरू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा ऐशबाग-पुष्पा नगर क्षेत्र के लोगों को होगा। इसके साथ ही पुराने और नए भोपाल के बीच संपर्क सुधरेगा, रेलवे क्रॉसिंग पर इंतजार खत्म होगा और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
