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राजस्थान पंचायत चुनाव: जिला प्रमुख-प्रधान बनाने का जिम्मा दिग्गजों के हाथ, कहीं केंद्रीय मंत्री तो कहीं सांसद
Mon, 19 Oct 2026 12:46 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:46 PM IST
राजस्थान में पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और क्षेत्रीय दिग्गजों को जिलावार जिम्मेदारी सौंपी है। अब इन नेताओं के सामने जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी तक पार्टी को पहुंचाने और स्थानीय सियासी समीकरण साधने की चुनौती होगी।
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बीजेपी मुख्यालय, जयपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहरों में निकाय चुनावों के बाद अब राजस्थान में गांवों की सरकार बनाने की तैयारी तेज हो गई है। पंचायत चुनाव में जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी तक पहुंचने के लिए भाजपा ने अपने स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने अलग-अलग जिलों में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और क्षेत्रीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। अब इन नेताओं के सामने सिर्फ चुनाव जीतने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि जिला परिषद और पंचायत समितियों में पार्टी का बोर्ड बनवाने का भी इम्तिहान होगा।
भाजपा ने ग्रामीण सियासत की इस लड़ाई में उन नेताओं पर भरोसा जताया है, जिनकी अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठकों में विधायकों और सांसदों को पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए थे। अब स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने, समर्थित उम्मीदवारों को जिताने और जिला प्रमुख व प्रधान के चुनाव में जरूरी समर्थन जुटाने का दारोमदार इन्हीं नेताओं पर रहेगा।
कहीं केंद्रीय मंत्रियों पर भरोसा, कहीं प्रदेश अध्यक्ष संभालेंगे कमान
भाजपा ने पंचायत चुनाव के लिए जिलेवार जिम्मेदारियां तय करते हुए अपने कई बड़े चेहरों को आगे किया है। बाड़मेर में राज्य मंत्री केके विश्नोई को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अलवर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मोर्चा संभालना है। पाली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ खुद जिम्मेदारी निभाएंगे।
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करौली में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और भरतपुर में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को जिम्मेदारी दी गई है। बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, देवी सिंह भाटी और मंत्री सुमित गोदारा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को ग्रामीण सियासत के समीकरण साधने का जिम्मा मिला है।
यह भी पढें- जयपुर: ई-रिक्शा से कैसे गायब हुए 2 करोड़ के हीरे-रत्न? जवाहरात मंडी को हिला देने वाली चोरी का खुलासा
इन जिलों में भी दिग्गजों के कंधों पर जिम्मेदारी
भाजपा ने झुंझुनूं में पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार और पूर्व सांसद संतोष अहलावत को जिम्मेदारी दी है। सवाई माधोपुर में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और जितेंद्र गोठवाल मोर्चा संभालेंगे, जबकि सीकर में प्रेम सिंह बाजोर को दारोमदार सौंपा गया है। दौसा में विधायक विक्रम बंशीवाल को जिम्मेदारी दी गई है।
अजमेर में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, भंवर सिंह पलाड़ा और मंत्री सुरेश रावत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। चित्तौड़गढ़ में सांसद सीपी जोशी और श्रीचंद कृपलानी, जबकि भीलवाड़ा में
सांसद दामोदर अग्रवाल के कंधों पर जिम्मेदारी रहेगी।
कोटा-बूंदी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खेमे को जिम्मेदारी दी गई है। झालावाड़-बारां में सांसद दुष्यंत सिंह को मोर्चा संभालना है, वहीं टोंक में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जयपुर ग्रामीण में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सतीश पूनिया, सांसद राव राजेंद्र सिंह और कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को जिम्मेदारी दी गई है।
असली परीक्षा बोर्ड बनाने में, सिर्फ सीटें जीतना काफी नहीं
पंचायत चुनाव में भाजपा के इन स्थानीय दिग्गजों की भूमिका इसलिए अहम होगी, क्योंकि जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव केवल पार्टी के चुनावी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में बहुमत जुटाने के साथ स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बैठाना भी जरूरी होता है।
कई जगहों पर टिकट वितरण, स्थानीय गुटबाजी और दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में क्षेत्रीय नेताओं को अपने समर्थकों के साथ दूसरे गुटों को भी साथ लाना होगा। जिन नेताओं की गांवों में लंबे समय से पकड़ रही है और जो पंचायत स्तर पर राजनीतिक समीकरण साधने का अनुभव रखते हैं, उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है।
भाजपा ने ग्रामीण सत्ता की इस लड़ाई में अपने बड़े चेहरों को जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव को स्थानीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
अब इन नेताओं की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक कौशल की परीक्षा होगी कि वे अपने-अपने जिलों में पार्टी को जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी तक पहुंचा पाते हैं या नहीं।
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भाजपा ने ग्रामीण सियासत की इस लड़ाई में उन नेताओं पर भरोसा जताया है, जिनकी अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठकों में विधायकों और सांसदों को पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए थे। अब स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने, समर्थित उम्मीदवारों को जिताने और जिला प्रमुख व प्रधान के चुनाव में जरूरी समर्थन जुटाने का दारोमदार इन्हीं नेताओं पर रहेगा।
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कहीं केंद्रीय मंत्रियों पर भरोसा, कहीं प्रदेश अध्यक्ष संभालेंगे कमान
भाजपा ने पंचायत चुनाव के लिए जिलेवार जिम्मेदारियां तय करते हुए अपने कई बड़े चेहरों को आगे किया है। बाड़मेर में राज्य मंत्री केके विश्नोई को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अलवर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मोर्चा संभालना है। पाली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ खुद जिम्मेदारी निभाएंगे।
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करौली में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और भरतपुर में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को जिम्मेदारी दी गई है। बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, देवी सिंह भाटी और मंत्री सुमित गोदारा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को ग्रामीण सियासत के समीकरण साधने का जिम्मा मिला है।
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इन जिलों में भी दिग्गजों के कंधों पर जिम्मेदारी
भाजपा ने झुंझुनूं में पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार और पूर्व सांसद संतोष अहलावत को जिम्मेदारी दी है। सवाई माधोपुर में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और जितेंद्र गोठवाल मोर्चा संभालेंगे, जबकि सीकर में प्रेम सिंह बाजोर को दारोमदार सौंपा गया है। दौसा में विधायक विक्रम बंशीवाल को जिम्मेदारी दी गई है।
अजमेर में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, भंवर सिंह पलाड़ा और मंत्री सुरेश रावत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। चित्तौड़गढ़ में सांसद सीपी जोशी और श्रीचंद कृपलानी, जबकि भीलवाड़ा में
सांसद दामोदर अग्रवाल के कंधों पर जिम्मेदारी रहेगी।
कोटा-बूंदी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खेमे को जिम्मेदारी दी गई है। झालावाड़-बारां में सांसद दुष्यंत सिंह को मोर्चा संभालना है, वहीं टोंक में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जयपुर ग्रामीण में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सतीश पूनिया, सांसद राव राजेंद्र सिंह और कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को जिम्मेदारी दी गई है।
असली परीक्षा बोर्ड बनाने में, सिर्फ सीटें जीतना काफी नहीं
पंचायत चुनाव में भाजपा के इन स्थानीय दिग्गजों की भूमिका इसलिए अहम होगी, क्योंकि जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव केवल पार्टी के चुनावी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में बहुमत जुटाने के साथ स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बैठाना भी जरूरी होता है।
कई जगहों पर टिकट वितरण, स्थानीय गुटबाजी और दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में क्षेत्रीय नेताओं को अपने समर्थकों के साथ दूसरे गुटों को भी साथ लाना होगा। जिन नेताओं की गांवों में लंबे समय से पकड़ रही है और जो पंचायत स्तर पर राजनीतिक समीकरण साधने का अनुभव रखते हैं, उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है।
भाजपा ने ग्रामीण सत्ता की इस लड़ाई में अपने बड़े चेहरों को जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव को स्थानीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
अब इन नेताओं की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक कौशल की परीक्षा होगी कि वे अपने-अपने जिलों में पार्टी को जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी तक पहुंचा पाते हैं या नहीं।