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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Major projects in the city's low-lying areas submerged; no relief from the problem of waterlogging.

प्रयागराज : शहर के निचले इलाकों में डूब गए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट, नहीं मिली जलभराव की समस्या से निजात

Fri, 21 Aug 2026 05:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Aug 2026 05:58 PM IST
सार
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जॉर्जटाउन, टैगोरटाउन समेत शहर के निचले इलाकों में जलभराव एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट लागू किए गए थे। अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद ये सभी योजनाएं विफल रहीं, जिससे इन इलाकों को कोई राहत नहीं मिली।

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Major projects in the city's low-lying areas submerged; no relief from the problem of waterlogging.
जार्जटाउन क्षेत्र में संघ कार्यालय के सामने वाली सड़क का हुए जलभराव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जॉर्जटाउन, टैगोरटाउन समेत शहर के निचले इलाकों में जलभराव एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट लागू किए गए थे। अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद ये सभी योजनाएं विफल रहीं, जिससे इन इलाकों को कोई राहत नहीं मिली।

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अब निचले इलाकों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए एक ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। कांग्रेस के यूपीए शासनकाल में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत सीवर लाइनें बिछाई गईं। इन लाइनों की ढलान सही दिशा में नहीं थी, जिससे जलभराव की समस्या बनी रही। भाजपा शासनकाल में वर्ष 2024-25 में जॉर्जटाउन की मालवीय रोड पर एक नई सीवर लाइन बिछाई गई, जो पहली ही बारिश में ध्वस्त हो गई।
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सीएम ग्रिड योजना के तहत भी नाले-नाली बनाए जा रहे हैं। सीएमपी डिग्री कॉलेज के पास नाले का निर्माण अधूरा रह गया, जिससे जॉर्जटाउन में फिर भीषण जलभराव हुआ। 12वें वित्त के तहत विशेष अनुदान से जल निकासी पर काम हुआ, पर क्षेत्र को जलभराव से कोई राहत नहीं मिली।

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योजनाओं में एक बड़ी कमी सड़कों को अलग-अलग विभागों को सौंपना था। कुछ सड़कें पीडीए को मिलीं तो कुछ नगर निगम को। शहर की जल निकासी प्रणाली को लेकर पीडीए के पास विशेषज्ञता नहीं थी। सड़क चौड़ीकरण के दौरान ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त हो गया। योजनाओं में सड़कों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग ठेकेदारों को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। ठेकेदारों के बीच समन्वय न होने के कारण सीवर लाइन की ढलान कहीं नीची तो कहीं ऊंची हो गई, जिससे सीवर का पानी उल्टा बहने लगा।

वरिष्ठ पार्षद शिवसेवक सिंह का आरोप है कि अधिकारियों ने इन परियोजनाओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। अरबों रुपये आते रहे और ठेकेदारों को जारी होते रहे। इंजीनियरों ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इस लापरवाही के कारण शहर के निचले इलाकों में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट विफल हो गए। इन सभी कारणों से जॉर्जटाउन में जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

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