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यूपीपीएससी : 598 परीक्षाओं की सीबीआई 2018 से कर रही जांच, बस बीत रहे साल दर साल

Sun, 23 Aug 2026 12:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 23 Aug 2026 12:37 PM IST
सार
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UPPSC News : यूपीपीएससी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच को शुरू हुए करीब नौ साल होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है। अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच हुई 598 परीक्षाओं की जांच में सीबीआई ने 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए और दो एफआईआर भी दर्ज कीं। कई लोगों को नोटिस जारी हुए, नामजदगी भी हुई, लेकिन गिरफ्तारी न होने से जांच की रफ्तार और उसके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।

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UPPSC CBI has been investigating 598 examinations since 2018; the years just keep rolling by.
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी)। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

झारखंड में जेन-जी के आंदोलन के बाद कई भर्ती परीक्षाएं निरस्त कर दी गईं लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू हुए नौ साल बीत रहे हैं पर अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। सीबीआई ने यूपीपीएससी की अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक की 598 परीक्षाओं की जांच की। 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के बयान लिए और दो एफआईआर भी दर्ज की गई। कुछ लोगों को नामजद किया गया। धांधली की आशंका में कई अभ्यर्थियों और आयोग के कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी किया लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। जांच अब ठंडे बस्ते में है।

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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग की भर्ती परीक्षाओं में धांधली सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा था। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश में आयोग के खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन हुआ था और भाजपा ने घोषणा की थी कि उसकी पार्टी की सरकार बनी तो सबसे पहले सीबीआई जांच कराई जाएगी। भाजपा ने वादा पूरा किया और जनवरी-2018 में भर्ती परीक्षाओं की जांच के लिए सीबीआई ने यूपीपीएससी परिसर में अपना पहला कदम रखा। हालांकि, शुरुआत में आयोग के तत्कालीन कर्मचारियों व अधिकारियों ने जांच का विरोध किया और मामला कोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जांच शुरू हुई।

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एपीएस भर्ती में मिले थे जांच के सुबूत

जांच तेजी से आगे बढ़ी और सबसे पहले पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 में हुई धांधली के सुबूत मिलने पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। इस मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को नामजद किया गया लेकिन सीबीआई ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। सीबीआई ने विभिन्न परीक्षाओं में चयनित टॉपर्स के भी बयान दर्ज किए क्योंकि उनके चयन में धांधली के आरोप लगे थे। इतनी कवायद के बाद जांच धीमी पड़ने लगी तो प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई को प्रति माह रिपोर्ट देने व एसआईटी गठित करने की मांग की। अवनीश का कहना है कि सीबीआई और सरकार दोनों ने प्रतियोगी छात्रों को हताश किया।

छह भर्तियों में सीबीआई ने दर्ज की है पीई

सीबीआई ने यूपीपीएससी की छह भर्ती परीक्षाओं में धांधली की आशंका में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की है। इनमें चार सीधी भर्तियां और पीसीएस-2011 व पीसीएस-2012 शामिल हैं। हालांकि, जांच आगे न बढ़ने के कारण इन भर्ती परीक्षाओं के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

करीब आ रहा चुनाव, फिर उठ सकता है मुद्दा

विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है ऐसे में सीबीआई जांच का मुद्दा फिर उठ सकता है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि हो सकता है कि सीबीआई फिर से अचानक सक्रिय हो जाए लेकिन नौ साल से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को समझ में आ चुका है कि जांच सिर्फ दिखावा है।

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