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Ambedkar Nagar News: सरयू का जलस्तर कुछ घटा, गांवों में मुश्किलें बढ़ीं
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राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के आराजी देवारा के प्रसाद कुर्मी का पूरा मार्ग पर भरा पानी और गुजरते ग्र
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राजेसुल्तानपुर/विद्युतनगर। सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार को घटकर खतरे के निशान से चार सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा के चार मजरों के रास्तों पर अब भी पानी बह रहा है। एक मजरे के लोगों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। वहीं, करीब 250 बीघे धान की फसल जलमग्न होने से किसान परेशान हैं। उधरए टांडा क्षेत्र के माझा उल्टहवा व कई मोहल्लों में पानी घुसने से परेशानी बरकरार है। जिला प्रशासन की ओर से एक बार फिर से अलर्ट जारी किया गया है।
बृहस्पतिवार को सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए दो सेमी ऊपर पहुंच गया था। शुक्रवार को सरयू का जलस्तर 85.58 मीटर से घटकर 85.52 मीटर हुआ। खतरे का निशान 85.56 मीटर पर है। राजेसुल्तानपुर के आराजी देवारा के प्रसाद कुर्मी का पूरा और हंसू का पूरा मार्ग अभी पानी में डूबा है। हंसू के पूरा के एक मजरे के लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। मांझा कम्हरिया के कल्लू का पूरा के पास पक्के मार्ग पर भी पानी बह रहा है। इसी रास्ते से ग्रामीणों के साथ बच्चे भी स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।
बाढ़ के पानी ने खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा क्षेत्र में 250 बीघे के करीब धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव ने बताया कि नदी का जलस्तर घटा है और कुछ मार्गों पर पानी है, लेकिन फिलहाल स्थिति सामान्य है। राजस्व कर्मियों को क्षेत्र में लगाया गया है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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टांडा के गांवों में भी बढ़ी चौकसी
टांडा क्षेत्र के उल्टहवा मांझा, मांझा अवसानपुर, केवटला, डुहियां और महरीपुर में प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत चौकियों और नाविकों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यहां गांवों के किनारे और मुख्य मार्गों पर पानी भरा है। 300 बीघा से अधिक फसल जलमग्न हैं। जालिम का पूरा, दिलसेन का पूरा, बाबूराम का पूरा और कुशमौलिया में पानी सड़क तक पहुंच गया है। हालांकि अभी किसी घर में पानी नहीं घुसा है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में सैकड़ों बीघे कृषि भूमि जलमग्न है। टांडा नगर पालिका के नेहरूनगर के सभासद मन्नू ने बताया कि बिछावट के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ पानी भर गया है। मेहनिया में भी पानी पहुंच गया है लेकिन फिलहाल आबादी सुरक्षित है। टांडा हनुमानगढ़ी की सभी सीढ़ियां भी पानी में डूबी हुई हैं। बाढ़ खंड के जेई संजय ने बताया कि बाढ़ को लेकर गांवों में लगातार चौकसी की जा रही है। संवेदनशील और डेंजर प्वाइंटों की निगरानी के साथ नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पशुओं के लिए चारा लाने में हो रही परेशानी
माझा उल्टहवा के अलावा आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। यहां खेतों और नदी के कछार में पानी भर जाने से ग्रामीणों को हरा चारा लाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जलभराव वाले रास्ते से होकर जा रहे हैं। कई स्थानों पर रास्ते कच्चे होने के कारण गहराई अधिक है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने नागरिकों से अपील की है कि नदी के किनारे, जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से न जाएं। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों को ऐसे स्थानों से विशेष रूप से दूर रखने की अपील की है। जलभराव की स्थिति में बिजली के उपकरणों और खुले तारों से दूरी बनाए रखने तथा किसी भी तरह का जोखिम न उठाने की सलाह दी है।डीएम ने बताया कि प्रशासन नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक घबराएं नहीं और तत्काल स्थानीय प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
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बृहस्पतिवार को सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए दो सेमी ऊपर पहुंच गया था। शुक्रवार को सरयू का जलस्तर 85.58 मीटर से घटकर 85.52 मीटर हुआ। खतरे का निशान 85.56 मीटर पर है। राजेसुल्तानपुर के आराजी देवारा के प्रसाद कुर्मी का पूरा और हंसू का पूरा मार्ग अभी पानी में डूबा है। हंसू के पूरा के एक मजरे के लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। मांझा कम्हरिया के कल्लू का पूरा के पास पक्के मार्ग पर भी पानी बह रहा है। इसी रास्ते से ग्रामीणों के साथ बच्चे भी स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।
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बाढ़ के पानी ने खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा क्षेत्र में 250 बीघे के करीब धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव ने बताया कि नदी का जलस्तर घटा है और कुछ मार्गों पर पानी है, लेकिन फिलहाल स्थिति सामान्य है। राजस्व कर्मियों को क्षेत्र में लगाया गया है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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टांडा के गांवों में भी बढ़ी चौकसी
टांडा क्षेत्र के उल्टहवा मांझा, मांझा अवसानपुर, केवटला, डुहियां और महरीपुर में प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत चौकियों और नाविकों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यहां गांवों के किनारे और मुख्य मार्गों पर पानी भरा है। 300 बीघा से अधिक फसल जलमग्न हैं। जालिम का पूरा, दिलसेन का पूरा, बाबूराम का पूरा और कुशमौलिया में पानी सड़क तक पहुंच गया है। हालांकि अभी किसी घर में पानी नहीं घुसा है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में सैकड़ों बीघे कृषि भूमि जलमग्न है। टांडा नगर पालिका के नेहरूनगर के सभासद मन्नू ने बताया कि बिछावट के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ पानी भर गया है। मेहनिया में भी पानी पहुंच गया है लेकिन फिलहाल आबादी सुरक्षित है। टांडा हनुमानगढ़ी की सभी सीढ़ियां भी पानी में डूबी हुई हैं। बाढ़ खंड के जेई संजय ने बताया कि बाढ़ को लेकर गांवों में लगातार चौकसी की जा रही है। संवेदनशील और डेंजर प्वाइंटों की निगरानी के साथ नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पशुओं के लिए चारा लाने में हो रही परेशानी
माझा उल्टहवा के अलावा आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। यहां खेतों और नदी के कछार में पानी भर जाने से ग्रामीणों को हरा चारा लाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जलभराव वाले रास्ते से होकर जा रहे हैं। कई स्थानों पर रास्ते कच्चे होने के कारण गहराई अधिक है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने नागरिकों से अपील की है कि नदी के किनारे, जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से न जाएं। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों को ऐसे स्थानों से विशेष रूप से दूर रखने की अपील की है। जलभराव की स्थिति में बिजली के उपकरणों और खुले तारों से दूरी बनाए रखने तथा किसी भी तरह का जोखिम न उठाने की सलाह दी है।डीएम ने बताया कि प्रशासन नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक घबराएं नहीं और तत्काल स्थानीय प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।

राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के आराजी देवारा के प्रसाद कुर्मी का पूरा मार्ग पर भरा पानी और गुजरते ग्र