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Azamgarh News: मदरसा जामिया नूरुल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबित
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मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता से संबंधित भूमि और भवन के अभिलेखों में अनियमितता और फर्जीवाड़े के आरोप सत्य पाए गए हैं। इस पर मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बृहस्पतिवार को मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी है।
मदरसे की मान्यता से संबंधित भूमि व भवन के अभिलेखों में अनियमितता और फर्जीवाड़े की शिकायत हाजी अली इमाम ने की थी। इस पर रजिस्ट्रार व निरीक्षक अंजना सिरोही ने मदरसा प्रबंधन को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण और मूल दानपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
नोटिस में कहा गया है कि मदरसे की मान्यता के लिए प्रस्तुत कथित दानपत्र 20 जून 1997 का है, जिसमें भूमि तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ अंकित है। यह तथ्य संदेह पैदा करता है क्योंकि वर्ष 1988 में ही मऊ जनपद का गठन हो चुका था और मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जिले का हिस्सा था।
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दानपत्र और अभिलेखों पर उठे सवाल
वर्ष 1997 में आजमगढ़ जनपद का उल्लेख, जबकि मोहम्मदाबाद गोहना तब मऊ जिले का हिस्सा था, दस्तावेज को संदिग्ध बनाता है।फसली वर्ष 1408 से 1412 (1998-2004) तक के खसरा अभिलेखों में संबंधित भूमि पर किसी मदरसे या शैक्षणिक संस्था के संचालन का कोई उल्लेख नहीं पाया गया है। विभाग का कहना है कि यदि उस समय मदरसा संचालित होता, तो उसका विवरण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए था। विभागीय जांच में यह भी सामने आया है कि जिस समय कथित दानपत्र निष्पादित हुआ, उस समय मदरसे के वैध प्रबंधक जहीन अहमद थे, जबकि दानपत्र में निहाल अहमद को प्रबंधक दर्शाया गया है। यह विसंगति सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों में पाई गई है। विभाग ने कथित दानपत्र की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। अचल संपत्ति के दान के लिए पंजीकरण अनिवार्य होता है, लेकिन प्रस्तुत दानपत्र अपंजीकृत है और मात्र 10 रुपये के स्टांप पर निष्पादित दिखाया गया है, जो नियमों के विपरीत है। नोटरीकरण करने वाले अधिवक्ता के अधिकारों और पंजीकरण संबंधी विवरणों पर भी संदेह है। वर्ष 2013 में संबंधित भूमि की जो रजिस्ट्री मदरसे के पक्ष में कराई गई, उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि इससे पूर्व कोई अनुबंध या दान नहीं किया गया था। यह बात 1997 के कथित दानपत्र की सत्यता पर और अधिक संदेह पैदा करती है।
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भूमि-स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं
रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने आदेश में कहा है कि जांच रिपोर्ट में मदरसे की मान्यता के समय प्रस्तुत भूमि-स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही वर्ष 2013 के पंजीकृत बैनामे और वर्ष 2017 की पोर्टल-लॉकिंग प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत भूमि संबंधी अभिलेखों को लेकर भी सवाल सामने आए। परिषद ने प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए, लेकिन आदेश में उपलब्ध कराए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके तहत मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।
-- -- वर्जन
अभी हमें इस संबंध में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने के बाद जैसा निर्देश होगा, उसके हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी। -वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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मदरसे की मान्यता से संबंधित भूमि व भवन के अभिलेखों में अनियमितता और फर्जीवाड़े की शिकायत हाजी अली इमाम ने की थी। इस पर रजिस्ट्रार व निरीक्षक अंजना सिरोही ने मदरसा प्रबंधन को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण और मूल दानपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
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नोटिस में कहा गया है कि मदरसे की मान्यता के लिए प्रस्तुत कथित दानपत्र 20 जून 1997 का है, जिसमें भूमि तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ अंकित है। यह तथ्य संदेह पैदा करता है क्योंकि वर्ष 1988 में ही मऊ जनपद का गठन हो चुका था और मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जिले का हिस्सा था।
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दानपत्र और अभिलेखों पर उठे सवाल
वर्ष 1997 में आजमगढ़ जनपद का उल्लेख, जबकि मोहम्मदाबाद गोहना तब मऊ जिले का हिस्सा था, दस्तावेज को संदिग्ध बनाता है।फसली वर्ष 1408 से 1412 (1998-2004) तक के खसरा अभिलेखों में संबंधित भूमि पर किसी मदरसे या शैक्षणिक संस्था के संचालन का कोई उल्लेख नहीं पाया गया है। विभाग का कहना है कि यदि उस समय मदरसा संचालित होता, तो उसका विवरण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए था। विभागीय जांच में यह भी सामने आया है कि जिस समय कथित दानपत्र निष्पादित हुआ, उस समय मदरसे के वैध प्रबंधक जहीन अहमद थे, जबकि दानपत्र में निहाल अहमद को प्रबंधक दर्शाया गया है। यह विसंगति सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों में पाई गई है। विभाग ने कथित दानपत्र की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। अचल संपत्ति के दान के लिए पंजीकरण अनिवार्य होता है, लेकिन प्रस्तुत दानपत्र अपंजीकृत है और मात्र 10 रुपये के स्टांप पर निष्पादित दिखाया गया है, जो नियमों के विपरीत है। नोटरीकरण करने वाले अधिवक्ता के अधिकारों और पंजीकरण संबंधी विवरणों पर भी संदेह है। वर्ष 2013 में संबंधित भूमि की जो रजिस्ट्री मदरसे के पक्ष में कराई गई, उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि इससे पूर्व कोई अनुबंध या दान नहीं किया गया था। यह बात 1997 के कथित दानपत्र की सत्यता पर और अधिक संदेह पैदा करती है।
भूमि-स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं
रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने आदेश में कहा है कि जांच रिपोर्ट में मदरसे की मान्यता के समय प्रस्तुत भूमि-स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही वर्ष 2013 के पंजीकृत बैनामे और वर्ष 2017 की पोर्टल-लॉकिंग प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत भूमि संबंधी अभिलेखों को लेकर भी सवाल सामने आए। परिषद ने प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए, लेकिन आदेश में उपलब्ध कराए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके तहत मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।
अभी हमें इस संबंध में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने के बाद जैसा निर्देश होगा, उसके हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी। -वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।