बदायूं: कदमनगला में कटान फिर तेज, आधा गांव गंगा में समाया, ग्रामीण सड़कों पर रहने को मजबूर
बदायूं के उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी का कटान जारी है, जिससे कदमनगला गांव का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया है। ग्रामीणों के मकान ढह गए हैं और वे सड़क किनारे झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं।
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बदायूं जिले में कछला गंगा पुल पर मंगलवार को जलस्तर में चार सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई लेकिन गंगा की लहरों से उसहैत क्षेत्र में कटान जारी है। कदमनगला गांव आधे से ज्यादा गंगा में समा गया है। मंगलवार सुबह लहरों में उस मकान के अवशेष भी ढह गए, जिसको ग्रामीण ने कलेजे पर पत्थर रखकर जेसीबी से तुड़वाया था। वहीं, गांव में चारों ओर कीचड़ फैली है। टूटे मकानों का मलबा भी गांव में फैला हुआ है। अब मच्छरों संग जहरीले जीवों से ग्रामीण डरे हुए हैं।
गांव कदमनगला, सिथौली खाम और रैपुरा में मंगलवार को गंगा नदी का कटान तेज हो गया। गांव में जगह-जगह पानी भरा हुआ है। पानी में मच्छर ज्यादा पनप रहे हैं, अधिकतर ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर पहले से गांव से निकल गए, सिर्फ वही ग्रामीण बचे हैं, जो अपने मकान तोड़कर उसका मलबा संरक्षित कर रहे हैं। इन ग्रामीणों ने रहने के लिए सड़क किनारे झोपड़ी बना ली है। वहीं पर अस्थाई व्यवस्था कर जीवन यापन कर रहे हैं।
बिजली न होने से बढ़ी मुश्किलें
ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या शाम के बाद होती है। बिजली न होने से सोलर पैनल और बैटरी से काम चल रहे हैं। साथ ही जगह-जगह पानी भरा होने से मच्छरों का प्रकोप है। प्रशासन की ओर से दवा का छिड़काव और स्वास्थ्य शिविर लगाकर आवश्यक दवाएं वितरित की गईं। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के चारे की दिक्कत बढ़ रही है। दिन में खेतों में चरने के लिए छोड़ देते हैं। बाढ़ के साथ भूसा भी लगभग समाप्त हो चुका है।
गांव से चार किमी दूर लगा है राहत शिविर
प्रशासन का बाढ़ राहत शिविर गांव से चार किलोमीटर दूर है। ऊपर से वहां जाने का रास्ता बेहद दुर्गम है, इसलिए ग्रामीण सड़क किनारे तंबू लगाकर गांव में रहकर समय काट रहे हैं। वहीं, अन्य तटीय गांव ठाकुरी नगला, प्रेमी नगला, बेहटी, दलनगला, असमय रफतपुर, अहमद नगर बछौरा में पानी नहीं है। पानी खेतों में है, जिससे कोई खतरा अभी नहीं है।
ग्राम जटा का तटबंध अभी सुरक्षित
ग्राम जटा में कुछ दिन से शुरू हुआ कटान अभी थमा हुआ है। तटबंध के निकट खेतों में पानी है, बाढ़ खंड के अधिकारियों ने कई बार इलाके का दौरा किया। तटबंध फिलहाल सुरक्षित है। पानी का बहाव भी पहले से कम हुआ है।