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पीलीभीत: शारदा की बदलती धारा में फंसा 279 करोड़ का पुल, बचाने के लिए 225 पेड़ काटने की मांगी अनुमति

Mon, 24 Aug 2026 04:04 PM IST
Mukesh Kumar अमित पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
अमित पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 24 Aug 2026 04:04 PM IST
सार
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पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में धनाराघाट पर 279 करोड़ रुपये का पुल शारदा की धारा बदलने से नई उलझनों में है। सेतु निगम ने डिजाइन बदला है। नए डिजाइन के लिए 225 से अधिक पेड़ काटने होंगे। इसके लिए अनुमति मांगी गई है।

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bridge worth Rs 279 crore is stuck in the changing course of the Sharda River in Pilibhit
शारदा नदी पर धनाराघाट में बन रहा पुल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पीलीभीत जिले में शारदा पार क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी को पूरनपुर तहसील व जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए धनाराघाट पर बन रहा 279 करोड़ का पक्का पुल नई उलझनों में फंस गया है। धारा बदलने के डर से सेतु निगम के इंजीनियरों ने पुल के डिजाइन में बदलाव कर निर्माण के रास्ते में आ रहे जंगल के सवा दो सौ से अधिक पेड़ कटवाने की तैयारी कर ली है। वहीं इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर संशय है तो साथ ही वर्षों से धारा के बदलाव को देखते आए ग्रामीणों के दिमाग में अलग हलचल है। उनका मानना है कि नया डिजाइन और बढ़ाई गई लंबाई का पुल भी उपयोगी साबित नहीं होगा। वे वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी बता रहे हैं। 

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बरसात के दिनों में पैंटून पुल हटते ही 16 ग्राम पंचायतों के लोगों को पूरनपुर तहसील जाने के लिए लखीमपुर खीरी और शाहजहांपुर होकर करीब 130 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस पक्के पुल से यह दूरी 65 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं नदी की मुख्य धारा के लगातार रुख बदलने से ग्रामीणों में डर है कि कहीं करोड़ों की लागत से तैयार हो रहा यह पुल बनने के बाद मुख्य धारा से दूर न छूट जाए।
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पेड़ों की कटान के लिए दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार
पुल का एक हिस्सा जंगल क्षेत्र की भूमि पर बनाया जाना है। इस दायरे में आ रहे 225 पेड़ों को काटे बिना काम आगे बढ़ना संभव नहीं है। सेतु निगम ने पेड़ काटने की अनुमति के लिए फाइल दिल्ली (केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय) भेजी है। स्वीकृति मिलते ही पेड़ों को हटाकर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। पेड़ कटने के बाद बनने वाले सेतु की लंबाई तीन किलोमीटर 287 मीटर होगी। इसके अलावा दोनों ओर पहुंच मार्ग की लंबाई 200-200 मीटर रहेगी।

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इन ग्राम पंचायतों के लोग होते हैं प्रभावित 
पूरनपुर तहसील के शारदा पार क्षेत्र में मुरैनिया गांधी, शांतिनगर, राणा प्रतापनगर, कबीरगंज, विजयनगर, नहरोसा, श्रीनगर, कुठिया गुदिया, सिद्धनगर, भरतपुर, वमनपुर भागीरथ, रामनगर, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, अशोकनगर और शास्त्रीनगर समेत 16 ग्राम पंचायतें हैं। इनकी करीब एक लाख आबादी प्रभावित होती है। वहीं पुल बनने के बाद न केवल पूरनपुर तहसील मुख्यालय बल्कि जिला मुख्यालय, लखीमपुर खीरी, पलिया, संपूर्णानगर और नेपाल सीमा क्षेत्र तक आवागमन आसान होगा।

बाढ़ में बदल जाता है नदी का भूगोल
शारदा नदी हर साल मानसून में नया रास्ता चुनती है। लोंगो का कहना है कि बाढ़ के दौरान कई इलाकों में कटान होती है व पानी नई दिशा में बहने लगता है। यदि नदी का मुख्य बहाव बदल गया, तो पुल का मूल उद्देश्य ही बेइमानी हो जाएगा। सिद्धनगर के फतेह सिंह का कहना है कि पुल बनने की खुशी है, लेकिन नदी का रुख जिस तरह बदल रहा है, उससे भविष्य में पुल सुरक्षित रहेगा या नहीं, इस पर चिंता बनी हुई है। शास्त्रीनगर के हरनाम का कहना है कि बरसात में नदी का पानी कटान कर नई दिशा पकड़ लेता है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पुल के बचाव में फिर करोड़ों रुपये फूंकने पड़ेंगे।

सेतु निगम के एसडीओ आशीष निरवाल ने बताया कि लोग केवल खड़े पिलर को देखकर भ्रमित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई तरह की बातें चल रही हैं। पुल का निर्माण केवल इस पिलर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीछे जंगल की ओर खड़ंजे के पास तक होना है। निर्माण का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि नदी की मुख्य धारा पुल के छोर से 500 मीटर अंदर ही सीमित रहेगी। पेड़ों की कटान की स्वीकृति मिलते ही काम और तेज होगा। परियोजना को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 

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