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Siddharthnagar News: कांशीराम आवास के आंगन में बढ़ रहीं दुश्वारियां
Sun, 23 Aug 2026 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Aug 2026 11:41 PM IST
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कांशीराम आवास में जल निकासी न होने से सड़क पर बह रहे गंदे पानी से होकर आवागमन करती महिलाएं। संवा
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सिद्धार्थनगर। घरों के बाहर पानी सड़ रहा है। सड़क कहां और नाली कहां है, इसका पता नहीं। पानी की हर घूंट और हर सांस के साथ जाने वाली हवा बीमारी बढ़ा रही है। दुर्गंध से दम घुट रहा है। यह कांशीराम का आंगन कहे जाने वाली कांशीराम आवास के लोगों की पीड़ा है।
आवास के हालात और सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम शहर में ही गोरखपुर-नौगढ़ मार्ग पर स्थित कांशीराम आवास पहुंची। पहले ही ब्लॉक में सड़क पर भरा सड़ता हुआ काला पानी और उसपर जमी कीचड़ की परत पर पड़े पॉलीथिन संचारी रोग नियंत्रण के दावों की पोल खोल रहे हैं।
मोहल्ले से होकर गुजरने वाले लोग नाक पर रुमाल लगाकर गुजरने को मजबूर हैं। बाइक से गुजर रहे सुमित ने कहा कि वह जगदीशपुर जा रहे हैं। उसके आने का यही मार्ग है। यहां पहुंचने के बाद नाक पर रुमाल न रखें तो खाया-पीया सब उल्ट जाएगा।
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कॉलोनी में आगे बढ़े तो सड़क और नाली का पता ही नहीं चल रहा था। यहां ईंट रखकर एक परिवार भोजन कर रहा था। पूछने पर उन्होंने बताया कि इसी में जिंदगी बसर करते हैं। आना-जाना, रहना यही ताे खाने कहां जाएं? सिस्टम से भरोसा उठ चुका है।
पहले गली से निकलने की कोशिश की तो दो ब्लॉक तक गंदा पानी और कीचड़ पसरा नजर आया, जहां से गुजरना काफी मुश्किल सा लगा। दूसरा रास्ता पकड़कर किसी तरह वहां पहुंचे तो देखा कि इसी कीचड़ और पानी से लोग गुजरते हुए आवास में जाते हुए देखे गए।
एक स्थान पर थोड़ा सूखा स्थान देखकर खड़े हुए तो मोहल्ले की संगीता ने कहा कि साहब क्या करने के लिए आएं हैं? कई लोग आते हैं लेकिन समस्या के लिए कोई निदान नहीं करता है। देखिए हर कमरा पानी से घिरा हुआ और सांस लेना दुश्वार हो गया है। पानी नहीं निकल पा रहा है।
इसी में खाना-पीना और रहना होता है। सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है और न ही मच्छरों और कीट-पंतगों से बचाव के लिए फॉगिंग ही कराई जा रही है। नल नाली में डूबा हुआ है। इसी से होकर आने वाली सप्लाई का पानी पीने को सभी मजबूर हैं। हर घूंट बीमार करने वाली है लेकिन पीना और नहाना इसी से होता है। केवल बिजली आपूर्ति की बात छोड़ दी जाए तो अन्य कोई सुविधा नहीं है।
वहीं रहने वाली शबाना ने कहा कि कहने के लिए हम शहरी हैं। हमारे दर्द को कोई सुनने और देखने वाला नहीं हैं। आवास की दीवारें दम तोड़ रही हैं। सोने के बाद हमेशा डर बना रहता है कि कब गिर जाए लेकिन कोई दूसरा आवास नहीं है, ऐसे में कहां जाएं।
वहीं, रेखा ने कहा कि साहब परिवार में कोई नहीं बचा है जो बीमार न पड़ा हो। यहां की गंदगी और इसमें बैठकर भोजन करना ही हमें बीमार बना रहा है। यह सब जानते हुए भी यही रहना मजबूरी है। ऐसा ही दर्द एक हजार परिवार का है जो यहां मजबूरी में घुटकर जी रहे हैं।
अन्य बदहाल की बात करें तो सभी हैंडपंप नाली में डूबे हैं। उसी में मोटर लगाकर लोग पानी पी रहे हैं। वॉटर सप्लाई का पाइप उसी में डूबा है। नाली के बीच से पानी की सप्लाई कितना शुद्ध पानी मिलता होगा, आसानी से समझा जा सकता है। वहीं, खेल के मैदान समाप्त हो चुके हैं। सड़क और नाली एक हो जाने के कारण कमरे में कैद होकर लोग बसर कर रहे हैं। सिस्टम इनकी सुरक्षा और सेहत को लेकर तनिक गंभीर नहीं है।
हाईवे से कनेक्ट हुई नाली तबसे बढ़ गई परेशानी : आवास में घरों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए आवास के पश्चिम दिशा में व्यवस्था थी।
बारिश होने पर कुछ समय तक समस्या होती थी लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो जाती थी। अब समस्या और गंभीर हो गई है। आवास गंदे पानी से घिरा हुआ है। आवास के पीछे से केंद्रीय विद्यालय होते हुए नाला बनाया गया है। जो हाईवे से कनेक्ट है। दोनों नाले में अंतर है, इसलिए यहां से पानी निकलने के बाद उल्टा यहां पर ही आ जाता है। यह वजह है कि पानी नहीं निकल पा रहा है। इससे सफाई भी नहीं हो पा रही है।
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आवास के हालात और सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम शहर में ही गोरखपुर-नौगढ़ मार्ग पर स्थित कांशीराम आवास पहुंची। पहले ही ब्लॉक में सड़क पर भरा सड़ता हुआ काला पानी और उसपर जमी कीचड़ की परत पर पड़े पॉलीथिन संचारी रोग नियंत्रण के दावों की पोल खोल रहे हैं।
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मोहल्ले से होकर गुजरने वाले लोग नाक पर रुमाल लगाकर गुजरने को मजबूर हैं। बाइक से गुजर रहे सुमित ने कहा कि वह जगदीशपुर जा रहे हैं। उसके आने का यही मार्ग है। यहां पहुंचने के बाद नाक पर रुमाल न रखें तो खाया-पीया सब उल्ट जाएगा।
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कॉलोनी में आगे बढ़े तो सड़क और नाली का पता ही नहीं चल रहा था। यहां ईंट रखकर एक परिवार भोजन कर रहा था। पूछने पर उन्होंने बताया कि इसी में जिंदगी बसर करते हैं। आना-जाना, रहना यही ताे खाने कहां जाएं? सिस्टम से भरोसा उठ चुका है।
पहले गली से निकलने की कोशिश की तो दो ब्लॉक तक गंदा पानी और कीचड़ पसरा नजर आया, जहां से गुजरना काफी मुश्किल सा लगा। दूसरा रास्ता पकड़कर किसी तरह वहां पहुंचे तो देखा कि इसी कीचड़ और पानी से लोग गुजरते हुए आवास में जाते हुए देखे गए।
एक स्थान पर थोड़ा सूखा स्थान देखकर खड़े हुए तो मोहल्ले की संगीता ने कहा कि साहब क्या करने के लिए आएं हैं? कई लोग आते हैं लेकिन समस्या के लिए कोई निदान नहीं करता है। देखिए हर कमरा पानी से घिरा हुआ और सांस लेना दुश्वार हो गया है। पानी नहीं निकल पा रहा है।
इसी में खाना-पीना और रहना होता है। सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है और न ही मच्छरों और कीट-पंतगों से बचाव के लिए फॉगिंग ही कराई जा रही है। नल नाली में डूबा हुआ है। इसी से होकर आने वाली सप्लाई का पानी पीने को सभी मजबूर हैं। हर घूंट बीमार करने वाली है लेकिन पीना और नहाना इसी से होता है। केवल बिजली आपूर्ति की बात छोड़ दी जाए तो अन्य कोई सुविधा नहीं है।
वहीं रहने वाली शबाना ने कहा कि कहने के लिए हम शहरी हैं। हमारे दर्द को कोई सुनने और देखने वाला नहीं हैं। आवास की दीवारें दम तोड़ रही हैं। सोने के बाद हमेशा डर बना रहता है कि कब गिर जाए लेकिन कोई दूसरा आवास नहीं है, ऐसे में कहां जाएं।
वहीं, रेखा ने कहा कि साहब परिवार में कोई नहीं बचा है जो बीमार न पड़ा हो। यहां की गंदगी और इसमें बैठकर भोजन करना ही हमें बीमार बना रहा है। यह सब जानते हुए भी यही रहना मजबूरी है। ऐसा ही दर्द एक हजार परिवार का है जो यहां मजबूरी में घुटकर जी रहे हैं।
अन्य बदहाल की बात करें तो सभी हैंडपंप नाली में डूबे हैं। उसी में मोटर लगाकर लोग पानी पी रहे हैं। वॉटर सप्लाई का पाइप उसी में डूबा है। नाली के बीच से पानी की सप्लाई कितना शुद्ध पानी मिलता होगा, आसानी से समझा जा सकता है। वहीं, खेल के मैदान समाप्त हो चुके हैं। सड़क और नाली एक हो जाने के कारण कमरे में कैद होकर लोग बसर कर रहे हैं। सिस्टम इनकी सुरक्षा और सेहत को लेकर तनिक गंभीर नहीं है।
हाईवे से कनेक्ट हुई नाली तबसे बढ़ गई परेशानी : आवास में घरों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए आवास के पश्चिम दिशा में व्यवस्था थी।
बारिश होने पर कुछ समय तक समस्या होती थी लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो जाती थी। अब समस्या और गंभीर हो गई है। आवास गंदे पानी से घिरा हुआ है। आवास के पीछे से केंद्रीय विद्यालय होते हुए नाला बनाया गया है। जो हाईवे से कनेक्ट है। दोनों नाले में अंतर है, इसलिए यहां से पानी निकलने के बाद उल्टा यहां पर ही आ जाता है। यह वजह है कि पानी नहीं निकल पा रहा है। इससे सफाई भी नहीं हो पा रही है।