पिथौरागढ़: तवाघाट-धारचूला सड़क पर फिर मलबा-बोल्डर का कहर, सात घंटे ठप रही आवाजाही, सैकड़ों यात्री फंसे
चीन सीमा और आदि कैलाश क्षेत्र को जोड़ने वाली तवाघाट-धारचूला सड़क पर शनिवार सुबह भारी मलबा और बोल्डर गिरने से सात घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। सड़क बंद होने से पूजा कर लौट रहे 400 से अधिक श्रद्धालुओं समेत सैकड़ों यात्री रास्ते में फंस गए।
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चीन सीमा के साथ ही आदि कैलाश और दारमा, व्यास, चौंदास घाटी को जोड़ने वाली तवाघाट-धारचूला सड़क पर फिर से मलबा और बोल्डर गिरने से सात घंटे तक आवाजाही ठप रही। इस दौरान हिमालयी क्षेत्रों में पूजा कराने गए सैकड़ों लोग फंस गए। बमुश्किल सड़क खुली तो लोग धारचूला लौट सके।
तवाघाट-धारचूला सड़क पर शनिवार सुबह पांच बजे के करीब कुलागाड़ और मलघाट में भारी मात्रा में पहाड़ी से मलबा आ गया। सड़क पर आवाजाही ठप होने से दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहन और यात्री फंस गए।वहीं दारमा और व्यास घाटी में पूजा संपन्न होने के बाद लौट रहे लोगों का भी धारचूला पहुंचना मुश्किल हो गया। सभी सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। बीआरओ ने बमुश्किल मलबा और बोल्डर हटाकर दोपहर करीब 12 बजे आवाजाही सुचारू कराई और फंसे यात्री गंतव्य को रवाना हो सके।
शनिवार को दारमा और व्यास घाटी से 400 से अधिक लोग पूजा से लौटे। पांगला के सोबन सिंह ने बताया कि कुलागाड़ और मलघाट में पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिर रहे हैं। ऐसे में सड़क के फिर से बंद होने की आशंका बनी हुई है।
दारमा घाटी से पूजा से लौटे दीलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष करन सिंह ग्वाल ने बताया कि कुलागाड़ व एलागाड़ के साथ ही तवाघाट से बालिंग तक कई जगहों पर बारिश में सड़क पर जगह-जगह कीचड़ जमा होने से वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी साबित हो रही है। यदि बीआरओ पानी की उचित निकासी करता तो आवाजाही सुरक्षित होती। वहीं धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि जगह-जगह जेसीबी तैनाती की गई हैं ताकि सड़कों पर जल्द आवाजाही सुचारु कराई जा सके।