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अल्मोड़ा के लाल का कमाल: 315 दिनों की पैदल यात्रा में नापे 12 ज्योतिर्लिंग और चारधाम; लोगों ने किया स्वागत

Sun, 23 Aug 2026 04:37 PM IST
गायत्री जोशी अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 23 Aug 2026 04:37 PM IST
सार
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अल्मोड़ा के मनोज पांडे 315 दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम के दर्शन करने के बाद सकुशल घर लौट आए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न राज्यों में बच्चों और बालिकाओं को आत्मरक्षा और योग का प्रशिक्षण भी दिया।

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Manoj Pandey from Almora covered the 12 Jyotirlingas and Char Dham on a 315-day journey on foot
अल्मोड़ा के एनटीडी में मनोज का स्वागत करते स्थानीय लोग। - फोटो : स्त्रोत: स्वयं

विस्तार

 दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत हौसले के दम पर नगर के एनटीडी निवासी मनोज पांडे ने एक नया इतिहास रच दिया है। देश के कोने-कोने में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धामों की पैदल परिक्रमा कर वे पूरे 315 दिनों बाद सकुशल अपने घर लौटे हैं। लंबी, दुर्गम और बेहद चुनौतीपूर्ण यात्रा को फतह कर गृहक्षेत्र पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।

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मनोज पांडे की यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने इसे एक सामाजिक मिशन का रूप दिया। अपनी 315 दिनों की लंबी पैदल यात्रा के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में बच्चों और बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। उन्होंने जगह-जगह रुककर बच्चों को योग, ध्यान और आत्मविश्वास बढ़ाने के प्रति जागरूक किया। विभिन्न शिविरों के माध्यम से उन्होंने बालिकाओं को अपनी सुरक्षा खुद करने और हर परिस्थिति में सजग रहने का एक मजबूत संदेश दिया। यात्रा पूरी कर वापस अल्मोड़ा पहुंचने पर एनटीडी में स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। वहां भुवन तिवारी, सौरभ वर्मा, लक्षित तिवारी, प्रमोद तिवारी आदि मौजूद रहे।

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यात्रा इंसान को सिखाती है विनम्र और छोटा होना

अपने कठिन सफर के अनुभवों को साझा करते हुए मनोज पांडे ने कहा यात्रा मनुष्य को छोटा होना सिखाती है, बौना होना सिखाती है। जब तक आप कुबाटा (कठिन और उबड़-खाबड़ रास्तों) पर नहीं चलेंगे तब तक आप एक सच्चे और अच्छे यात्री नहीं बन सकते। उन्होंने बताया कि पहाड़ों और मैदानों के इन दुर्गम रास्तों ने उन्हें जीवन में विनम्रता, असीम धैर्य और हर परिस्थिति से लड़कर सीखने की कला सिखाई है। कठिन रास्ते ही इंसान को भीतर से फौलाद बनाते हैं और जीवन को देखने का एक नया नजरिया देते हैं।

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