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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के निलंबित डॉक्टरों को सेवा जारी रखने के निर्देश
फरीदकोट में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा यूनिवर्सिटी के अन्य संस्थानों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अगले आदेश तक अपनी सेवाएं जारी रखने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश यूनिवर्सिटी की ओर से पूर्व वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर उठे विवाद के बीच बड़ी संख्या में नए भर्ती कर्मचारियों, जिनमें डॉक्टर भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने के करीब एक सप्ताह बाद जारी किया गया है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह फैसला मरीजों की देखभाल और जरूरी/आपातकालीन सेवाओं की निरंतरता के व्यापक हित में लिया गया है। हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की सेवा जारी रखना पूरी तरह अस्थायी व्यवस्था है। इसे उनकी नियुक्तियों की वैधता, नियमितीकरण, मंजूरी या पुष्टि नहीं माना जाएगा और इससे संबंधित डॉक्टरों को किसी प्रकार का अधिकार या समानता का दावा हासिल नहीं होगा। यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट द्वारा नियुक्तियों की समीक्षा के लिए शुरू की गई प्रक्रिया भी पहले की तरह जारी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कई विभागों के अलावा यूनिवर्सिटी से जुड़े एडवांस्ड कैंसर इंस्टीट्यूट, बठिंडा, फाजिल्का और सिविल अस्पताल जलालाबाद की ओर से भी रेजिडेंट डॉक्टरों के सामूहिक निलंबन को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। डॉक्टरों के निलंबन से मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा था। यह मामला 11 अगस्त को हुई बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक के बाद सामने आया था। बैठक में डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों और पदोन्नतियों में “नियमों का पालन न किए जाने” की बात सामने आई थी। इसके बाद 180 से नए भर्ती कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि जनरल पूल में पदोन्नत करीब दो दर्जन डॉक्टरों को मामले की समीक्षा पूरी होने तक उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया। आरोप है कि कई नियुक्तियां और पदोन्नतियां बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की ओर से पदों की मंजूरी तथा बजटीय स्वीकृति के बिना की गईं।
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